मां बेटी की होती है पहली दोस्त

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मां बेटी की होती है पहली दोस्त

मासिक धर्म को लेकर समाज में फैली झिझक और भ्रांतियों को दूर करने के लिए मध्य विद्यालय बेलवा काशीपुर में सोमवार को मां–बेटी खुला संवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया

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किशनगंज

मासिक धर्म को लेकर समाज में फैली झिझक और भ्रांतियों को दूर करने के लिए मध्य विद्यालय बेलवा काशीपुर में सोमवार को मां–बेटी खुला संवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में बच्चियों और उनकी माताओं को पीरियड के प्रति जागरूक किया गया. विद्यालय प्रभारी शहजाद अनवर ने कहा कि मां ही बेटी की पहली दोस्त होती है. जब बच्चियां पहली बार मासिक धर्म से गुजरती हैं तो डर और शर्म महसूस करती हैं. ऐसे में मां ही उन्हें सही जानकारी देकर गलत धारणाओं से बाहर निकाल सकती है. उन्होंने माताओं से बेटियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की अपील की. महिला शिक्षिका कुमारी गुड्डी ने साफ-सफाई, सैनिटरी पैड के उपयोग और स्वास्थ्य सावधानियों की जानकारी दी. शिक्षिका जूही नाज ने कहा कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. इसे शर्म से नहीं, जागरूकता से देखना चाहिए. उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों के खिलाफ आगे आने का आह्वान किया. विद्यालय शिक्षा समिति की सचिव अल्पना देवी ने कहा कि विद्यालय सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि समाज की कुरीतियों को दूर करने का केंद्र भी है. ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाते हैं. इस मौके पर शिक्षिका शारका बेगम, फरहत पूर्वी, रौशन आरा परवीन, सुष्मिता देवी, सोमनाथ दास सहित बड़ी संख्या में माताएं और छात्राएं मौजूद थीं.

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Amit Kr Sinha

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