किशनगंज शहर के लोहारपट्टी स्थित शिव शक्ति धाम दुर्गा मंदिर में नौ दिवसीय श्री राम कथा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. महोत्सव के तीसरे दिन शनिवार को कथा वाचक आचार्य अमन शास्त्री जी महाराज ने राम-सीता के विवाह के प्रसंग के वर्णन किया. इस दौरान कथा वाचक ने बताया कि जनकपुर के राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के लिए एक स्वयंवर का आयोजन किया, जिसमें सीता के भावी पति का चयन होना था. इस स्वयंवर में भगवान शिव का धनुष था, जिसे कोई भी तोड़कर सीता को जीत सकता था. जब श्री राम ने धनुष उठाया और उसे खंडित कर दिया, तो राजा जनक ने उन्हें सीता का पति घोषित कर दिया. इस प्रकार, श्री राम और माता सीता का विवाह हुआ.राजा दशरथ, श्री राम के पिता, अपने पूरे परिवार के साथ जनकपुर पहुंचे. विवाह के अवसर पर श्री राम और माता सीता ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और अग्नि के सामने सात फेरे लिए. विवाह के बाद, श्री राम और माता सीता अयोध्या वापस आए, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया. श्री राम के पिता राजा दशरथ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया और उन्हें राज्य का राजा बनाने की घोषणा की. कथा के दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचकर श्री राम और माता-सीता के विवाह का वर्णन सुनकर आनंद विभोर हुए. आचार्य अमन शास्त्री जी महाराज के द्वारा राम-सीता के विवाह का वर्णन करने पर माहौल भक्ति में हो गया. श्रद्धालुओं ने राम-सीता के विवाह का वर्णन सुनकर अपने आप को भाग्यशाली माना और आचार्य अमन शास्त्री जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त किया.
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