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मोह जीवन में समस्याओं की जड़, नियंत्रण जरूरी : आचार्य प्रमुख सागर

Updated at : 09 May 2025 9:20 PM (IST)
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मोह जीवन में समस्याओं की जड़, नियंत्रण जरूरी : आचार्य प्रमुख सागर

मोह जीवन में समस्याओं की जड़, नियंत्रण जरूरी : आचार्य प्रमुख सागर

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किशनगंज

. किशनगंज के धर्मशाला रोड स्थित पार्श्वनाथ भवन में आचार्य प्रमुख सागर जी महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि मोह सारे कर्मों का राजा है. मोह के कारण व्यक्ति संसार में भ्रमण करता है. सुबह परिवार के लिए पैसा कमाने के लिए घर से बाहर निकल कर शाम को वापस लौटता है. ठीक उसी तरह जैसे ग्वाला अपनी गाय को घास चरने के लिए वह भी शाम को अपने खूंटे पर बंध जाती है. आचार्य श्री ने कहा कि ऐसे ही मोह की प्रवृति होती है, जो हमें संसार की भ्रमण करती, संसार में भौतिक वस्तु मोह करती है, सुख का अहसास करती है, लेकिन वो सब सुखभास है सब संसार में रह जाएगा. साथ में कुछ जाने वाला नहीं है, इसलिए हम सभी को मोह से बचना चाहिए. आचार्य श्री संघ में मुनि श्री प्रभाकर सागरजी, आर्यिका प्रतिज्ञा माता जी, आर्यिका प्रतिभा जी, आर्यिका परीक्षा माताजी, आर्यिका पृक्षा माताजी, आर्यिका प्रमत्थिया माताजी, क्षुल्लक प्रगुण सागर जी,परमानंद सागर जी, क्षुल्लिका आराधना श्री, क्षुल्लिका परमसाध्य श्री, क्षुल्लिका परमसाध्य श्री, क्षुल्लिका परमशांता श्री का संघ विराजमान है, जहां रोजाना प्रातः धार्मिक कार्यक्रम जैन समाज द्वारा संचालित होते हैं, उसके बाद आहार का कार्यक्रम होता है. एक विशेष बात यह है कि जैन संत 24 घंटे में एक बार ही खड़े होकर अन्न-जल का ग्रहण करते हैं जो आज के समय में विशेष बात है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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