अनवरत जारी है गैंडे का शिकार

Published at :04 Jul 2016 3:18 AM (IST)
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अनवरत जारी है गैंडे का शिकार

विभागीय उदासीनता. विलुप्त होने के कगार पर हैं गैंडे, कैसे हो सुरक्षा सरकार की निंद्रा यदि जल्द नहीं टूटी तो बहुत जल्द गैंडे की प्रजाति पूरी तरह विलुप्त हो जायेगी. बताते चलें पिछले कुछ वर्षो में विश्व भर में गैंडो का शिकार तेजी से बढ़ा है इसका एकमात्र कारण गैंडे के सींग और चमड़े से […]

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विभागीय उदासीनता. विलुप्त होने के कगार पर हैं गैंडे, कैसे हो सुरक्षा

सरकार की निंद्रा यदि जल्द नहीं टूटी तो बहुत जल्द गैंडे की प्रजाति पूरी तरह विलुप्त हो जायेगी. बताते चलें पिछले कुछ वर्षो में विश्व भर में गैंडो का शिकार तेजी से बढ़ा है इसका एकमात्र कारण गैंडे के सींग और चमड़े से होने वाली आय है़
ठाकुरगंज : वन्य प्राणी तस्करों के कारण गैंडे का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है़ एक समय मौजूदा पाकिस्तान के सिंध प्रांत से लेकर नेपाल, भूटान, मयन्मार में पाये जाने वाला गैंडा आज केवल असम के काजीरंगा नेशनल पार्क में ही सिमट कर रह गया है़ यहां भी लगातार इसका शिकार होने से इस प्रजाति के विलुप्त होने का खतरा मंडराने लगा है़ जानकारों की यदि माने तो सरकार की निंद्रा यदि जल्द नहीं टूटी तो बहुत जल्द गैंडे की प्रजाति पूरी तरह विलुप्त हो जायेगी. बताते चलें पिछले कुछ वर्षो में विश्व भर में गैंडो का शिकार तेजी से बढ़ा है
इसका एकमात्र कारण गैंडे के सींग और चमड़े से होने वाली आय है़ इसके कारण हर साल गैंडो को मारने के बाद अरबो रुपये का कारोबार होता है़ बताते चलें कि गैंडे के सींग से नपुंसकता मिटाने की दवा बनती है जिसके कारण इसका शिकार लगातार होता है और ये सिलसिला यूं ही चला तो एक सींग वाले गैंडे केवल किताबो में ही रह जायेंगे और तो और काजीरंगा जिसे सरकार ने विशेष वन झेत्र घोषित कर रखा है वहां से यदी ऐसी घटना हो रही है तो ये चिंता की विषय है़ आंकड़ो पर यदि गौर करे वर्ष 2013 में 25 से अधिक गेंडे शिकारियों द्वारा मार दिये गये.
जानकार गैंडे के बढ़ते शिकार के पीछे सबसे बड़ा कारण गैंडे के एक किलो के सींग की भारतीय बाजार में कीमत एक करोड़ तो इंटरनेशनल मार्केट में इससे डेढ़ गुना ज्यादा बताते हैं. सूत्रों के अनुसार गैंडे के सींग का यौनवर्धक दवाइयों और कैंसर की दवा बनाने में इस्तेमाल होता है ही इसके सींग से बनी दवाओं का इस्तेमाल बुखार, गठिया, और जोड़ो के दर्द को दूर करने में भी किया जाता है़ गैंडे के सींग में पाये जाने वाला कार्बन और मेलेनिन दुर्लभ माना जाता है,
जिसका बहुतेरी औषधियों में प्रयोग किया जाता है़, लेकिन इसका खामियाजा इन निरीह जानवर को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है़ वहीं सरकार ने भी अब तक इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया है़ कभी असम के इस इलाके में आने वाली बाढ़ की चपेट में तो कभी वन अभ्यारण्य के इलाके में लगातार बढ़ती बसावट के कारण गेंडो का अस्तित्व आज खतरे में है़ बाढ़ से गैंडो के मरने की यदि बात करें तो 1988 में लगभग 1250 गैंडे मारे गये वहीं 2008 की बाढ़ में लगभग 655 गैंडो की मौत हुई वहीं 2012 में आयी बाढ़ में 28 गैंडे डूब कर मर गये.
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