जेल अधीक्षक प्रकरण . पूर्व में भी लगे थे अश्लीलता के आरोप, नहीं हुई कार्रवाई
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 Mar 2016 6:55 AM (IST)
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शहर में चर्चा का बाजार रहा गरम किशनगंज : जेल अधीक्षक कृपा शंकर पांडेय प्रकरण को लेकर शहर में चर्चा का बाजार गर्म रहा. बुधवार देर शाम कृपा शंकर पांडेय की गिरफ्तारी के बाद गुरुवार को पुलिस अधीक्षक राजीव रंजन उससे पूछताछ करने स्वयं एसडीपीओ कार्यालय पहुंचे. किन-किन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आरोपी जेल अधीक्षक से […]
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शहर में चर्चा का बाजार रहा गरम
किशनगंज : जेल अधीक्षक कृपा शंकर पांडेय प्रकरण को लेकर शहर में चर्चा का बाजार गर्म रहा. बुधवार देर शाम कृपा शंकर पांडेय की गिरफ्तारी के बाद गुरुवार को पुलिस अधीक्षक राजीव रंजन उससे पूछताछ करने स्वयं एसडीपीओ कार्यालय पहुंचे. किन-किन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आरोपी जेल अधीक्षक से पूछताछ करना है इस संबंध में पुलिस ने पहले से ही सवालों की एक सूची तैयार कर लिया था.
पूछताछ के तुरंत बाद जेल अधीक्षक को पेशी के लिए न्यायालय ले जाया गया. गिरफ्तारी के बाद थाना के हाजत में नहीं रख कर जेल अधीक्षक को विशेष सुविधा प्रदान करने के आरोप झेल रहे थानाध्यक्ष ने हथकड़ी लगा कर जेल अधीक्षक को न्यायालय पेशी के लिए भेजा.
कोर्ट परिसर में भीड़
गिरफ्तार जेल अधीक्षक कृपा शंकर पांडेय को देखने के लिए कोर्ट परिसर में लोगों का हुजूम लगा था. जेल अधीक्षक द्वारा उम्र के आखिरी पड़ाव में इस तरह की ओछी हरकत से लोग कई तरह के टिप्पणी करते दिखे.
पूर्व में भी लगे थे आरोप
कृपाशंकर पांडेय पर किशनगंज मंडल कारा में बतौर जेलर रहते लगभग 9 माह पूर्व भी कई तरह के संगीन आरोप लगे थे. एक महिला के साथ हमबिस्तर होने के दौरान खुद से वीडियो बनाने का मामला सामने आया था. एक कैदी ने ही उक्त वीडियो वायरल कर कृपा शंकर पर आरोप लगाया था कि यह वीडियो दिखा कर जेलर साहब अप्राकृतिक यौन संबंध के लिए उकसाते हैं. उस समय कृपा शंकर ने कैदी के आरोप को निराधार और झूठा बता दिया और वीडियो के संबंध में कहा कि इसमें जो महिला है वह मेरी पत्नी है.
मामले की हुई थी जांच
पोर्न वीडियो एवं कैदी द्वारा लगाये गये आरोप को लेकर तत्कालीन डीएम अनिमेष कुमार पराशर ने एडीएम वीरेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में एसडीओ शफीक आलम और एसडीपीओ मो कासीम को मामले की जांच के निर्देश दिये थे.
न ही निलंबन न ही एफआइआर
पोर्न वीडियो मामले को लेकर कृपा शंकर के विरुद्ध न तो निलंबन की कार्रवाई हुई न ही एफआईआर दर्ज हुआ था, बल्कि कुछ दिन बाद ही कृपा शंकर जेलर से जेल अधीक्षक बन गये. इतने गंभीर आरोप के बाद कार्रवाई के बदले पदोन्नति लोगों को हजम नहीं हो रहा था.
कार्रवाई नहीं होने का कारण
पूर्व के मामले में कृपा शंकर के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होने का मामला अब प्रकाश में आया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिकारियों ने गोल मटोल जांच रिपोर्ट प्रस्तुत किया था, जिसे तत्कालीन डीएम ने गृह विभाग को भेज दिया. रिपोर्ट से असंतुष्ट गृह विभाग ने जांच अधिकारियों से स्पष्ट मंतव्य की मांग की थी. लेकिन जांच अधिकारियों द्वारा विगत मंगलवार तक कोई स्पष्ट मंतव्य नहीं भेजा था. जब पुन: अश्लीलता के आरोप में कृपा शंकर घिरे तब आनन-फानन में पूर्व मामले का स्पष्ट मंतव्य भेजा गया है, जिसका खुलासा प्रशासन नहीं किया है.
पद के दुरुपयोग का आरोप
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