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लाखों की दवा की हेराफेरी की आशंका

किशनगंज : स्थानीय सदर अस्पताल कर्मियों की मिलीभगत से लाखों रुपये मूल्य के दवा की हेराफेरी करने का मामला प्रकाश में आया है. मामले का खुलासा सोमवार को उस वक्त हुआ जब विभिन्न बीमारियों का इलाज कराने सदर अस्पताल पहुंचे मरीजों को दवा वितरण काउंटर में बैठे कर्मियों ने बिना डॉक्टर के सलाह के ही […]

किशनगंज : स्थानीय सदर अस्पताल कर्मियों की मिलीभगत से लाखों रुपये मूल्य के दवा की हेराफेरी करने का मामला प्रकाश में आया है. मामले का खुलासा सोमवार को उस वक्त हुआ जब विभिन्न बीमारियों का इलाज कराने सदर अस्पताल पहुंचे मरीजों को दवा वितरण काउंटर में बैठे कर्मियों ने बिना डॉक्टर के सलाह के ही ऑफ्लोक्सीन एंड ऑरनीडायजोल नामक दवा उपलब्ध करानी शुरू कर दी.

इसी दरम्यान जब स्थानीय सुभाषपल्ली निवासी मरीज विनोद यादव 37 वर्ष पिता रामदेव यादव दवाओं के सेवन की विधि जानने चिकित्सक के पास पहुंचा, तो दवा को देख चिकित्सक भी चौंक पड़े. दरअसल, कमजोरी की शिकायत लेकर सदर अस्पताल पहुंचे विनोद यादव को चिकित्सक ने अन्य दवाओं के साथ साथ विटामिन की दवा लेने का सुझाव दिया था.

परंतु जब विनोद दवा काउंटर पर पहुंचे तो उन्हें अन्य दवा तो दे दी गयी परंतु विटामिन की दवा के स्थान पर दस्त की दवा दे दी गयी और परची पर लिखे विटामिन की दवा के नाम के सामने सही का निशान भी लगा दिया गया. दरअसल, यह सारा मामला दवाओं के खरीद पर टिका है. वर्ष 2014 में खरीदी गयी ऑफ्लोक्सीन नामक दवा की बड़ी खेप सदर अस्पताल के स्टोर रूम की आज भी शोभा बढ़ा रही है.

स्टोर कीपर रमेश कुमार ने विगत दिनों सदर अस्पताल में दवाओं की घोर किल्लत के वक्त इस दवा को भी दबा दिया था. परंतु फरवरी 2016 में दवा के एक्सपायरी डेट होने के कारण अब दवा को ठिकाने लगाने की तैयारी की जा रही है. इलाज कराने पहुंचे मरीजों को अन्य के स्थान पर ऑफ्लोक्सीन की दवा मुहैया करा कर स्टॉक को साफ करने का प्रयास किया जा रहा है. चाहे इसके लिए किसी मरीज की जान पर ही क्यों न बन जाये.

हालांकि सदर अस्पताल के चिकित्सक घटना को जान से खिलवाड़ से इनकार कर दिया. परंतु इसे सदर अस्पताल के गरिमा को धुमिल करने का प्रयास जरूर बताया. उन्होंने कहा कि विटामिन के स्थान पर ऑफ्लोक्सीन की दवा के सेवन से मरीज के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर तो नहीं पड़ेगा परंतु मरीज का स्वास्थ्य लाभ भी नहीं होगा. हालांकि सदर अस्पताल के चिकित्सक भी पूरे मामले को स्टॉक क्लीयरेंस से जोड़ कर ही देख रहे है.

क्या कहते हैं उपाधीक्षक. इस संबंध में पूछे जाने पर अस्पताल उपाध्यक्ष डा आरपी सिंह ने अपना मुंह तक खोलना उचित नहीं समझा.
क्या कहते हैं सिविल सर्जन. सिविल सर्जन डा परशुराम प्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा. उन्होंने कहा कि घटना की शिकायत वरीय पदाधिकारी से कर दी गयी है तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
Prabhat Khabar Digital Desk
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