किशोरियों के स्वास्थ्य की नई ढाल़, एचपीवी टीकाकरण पर बढ़ा फोकस

किशोरियों के स्वास्थ्य की नई ढाल़, एचपीवी टीकाकरण पर बढ़ा फोकस
हर एक बच्चा जीवनरक्षक टीकों का हकदार: अब एचपीवी वैक्सीन से बेटियों को कैंसर से सुरक्षा का संकल्प
नियमित टीकाकरण के साथ अब सर्वाइकल कैंसर से बचाव की मजबूत पहल
किशनगंज. स्वस्थ समाज की नींव तभी मजबूत होती है जब उसके बच्चे और माताएं सुरक्षित और रोगमुक्त हों. टीकाकरण न केवल बीमारियों से सुरक्षा देता है, बल्कि एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की गारंटी भी बनता है. आज के समय में, जहां एक ओर पारंपरिक टीके बच्चों को खसरा, पोलियो और अन्य संक्रामक रोगों से बचा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) के खिलाफ गार्डासिल वैक्सीन किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाने में एक नई उम्मीद बनकर उभरा है.
कमजोर प्रतिरक्षा वाले बच्चों के लिए टीकाकरण है सुरक्षा कवच
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है, जिससे वे संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं. ऐसे में समय पर दिया गया टीकाकरण उन्हें गंभीर बीमारियों से बचाने में अहम भूमिका निभाता है. उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान मां को टेटनस- डिप्थीरिया का टीका देना और जन्म के बाद बच्चे को सभी आवश्यक टीके लगाना बेहद जरूरी है. इससे न केवल बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, बल्कि कई घातक बीमारियों से भी सुरक्षा मिलती है.
जन्म से किशोरावस्था तक तय है टीकाकरण का पूरा चक्र
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि नवजात के जन्म के तुरंत बाद बीसीजी, ओरल पोलियो और हेपेटाइटिस-बी का टीका दिया जाता है. इसके बाद 6, 10 और 14 सप्ताह पर विभिन्न टीकों की श्रृंखला पूरी की जाती है.उन्होंने बताया कि 9 से 12 माह पर खसरा-रूबेला, 16 से 24 माह पर बूस्टर डोज और आगे के वर्षों में भी नियमित अंतराल पर टीकाकरण किया जाता है.डॉ. चौधरी ने यह भी जोड़ा कि अब किशोरियों के लिए एचपीवी (गार्डासिल) वैक्सीन बेहद महत्वपूर्ण हो गया है, जो सर्वाइकल कैंसर से बचाव में कारगर साबित हो रहा है.
गार्डासिल वैक्सीन: किशोरियों के लिए सुरक्षा की नई पहल
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवेंद्र कुमार ने बताया कि एचपीवी संक्रमण महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है. गार्डासिल वैक्सीन इस वायरस से सुरक्षा प्रदान करता है. डॉ देवेंद्र कुमार ने बताया कि 9 से 14 वर्ष की आयु की किशोरियों के लिए यह टीका सबसे अधिक प्रभावी होता है. समय पर टीकाकरण से भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को इस टीके से अवश्य आच्छादित कराएं और इसके प्रति किसी भी तरह की भ्रांति से बचें.
टीकाकरण के प्रति बढ़ी जागरूकता, जिले में बेहतर परिणाम
जिले में टीकाकरण को लेकर लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है. पिछले वर्षों में टीकाकरण का प्रतिशत लगातार बढ़ा है, जो इस बात का संकेत है कि लोग अब स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग हो रहे हैं. सरकारी स्वास्थ्य संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जहां अधिकतर बच्चों को मुफ्त और सुरक्षित टीकाकरण सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.
मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने में टीकाकरण की अहम भूमिका
सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने बताया कि टीकाकरण न केवल बच्चों को बीमारियों से बचाता है, बल्कि मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण और विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को टीकाकरण के प्रति प्रेरित किया जा रहा है.आज के दौर में टीकाकरण केवल एक स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा का सबसे मजबूत माध्यम बन चुका है. पारंपरिक टीकों के साथ-साथ गार्डासिल जैसे आधुनिक टीकों को अपनाकर हम आने वाली पीढ़ी को न सिर्फ बीमारियों से बचा सकते हैं, बल्कि उन्हें एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य भी दे सकते हैं.
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