अमेरिका में नौकरी छोड़ फैलायी शिक्षा की रोशनी

किशनगंज : पदमश्री डा सैयद हसन के निधन से एक युग का अंत हो गया. अमेरिका में अच्छी खासी नौकरी छोड़ कर उन्होंने शैक्षणिक रूप से पिछड़े इस जिला में शिक्षा का अलख जगाने के लिए 14 नवंबर 1966 को इंसान स्कूल की स्थापना की. 30 सितंबर 1924 को जहानाबाद में जन्मे डा सैयद हसन […]
किशनगंज : पदमश्री डा सैयद हसन के निधन से एक युग का अंत हो गया. अमेरिका में अच्छी खासी नौकरी छोड़ कर उन्होंने शैक्षणिक रूप से पिछड़े इस जिला में शिक्षा का अलख जगाने के लिए 14 नवंबर 1966 को इंसान स्कूल की स्थापना की. 30 सितंबर 1924 को जहानाबाद में जन्मे डा सैयद हसन का पूरा जीवन शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने में बीता है.
शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सन 1991 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर वेंकटरमन द्वारा उन्हें पद्मश्री एवार्ड से नवाजा गया था. प्रारंभिक शिक्षा के साथ आइए तथा बीए उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से किया और पीएचईडी की डिग्री उन्होंने अमेरिका के कारबोनडेल स्थित यूनिवर्सिटी से मिली है. उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी भाग लिया.
उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए 1980 में नेहरू लिटेरिसी अवार्ड, 1990 में नेशनल इंट्रिगेशन अवार्ड, 1991 में पदमश्री, 2002 में नेशनल इंट्रिगेशन अवार्ड मीडिया ग्रुप, 2005 में उर्दू वेलफेयर सोसायटी द्वारा लाइफ टाइम सोशल वेलफेयर बोर्ड, 2007 में नेहरू युवा केंद्र द्वारा लाइफ टाइम इंस्पीरेशनल ओनर, 2008 में शिक्षा भारती पुरस्कार, 2003 में नोबेल पुरस्कार के लिए उनका नाम भेजा गया था. साथ ही बैंकॉक में इंटरनेशनल एचीवेंट अवार्ड, बिहार सरकार द्वारा बिहार गौरव अवार्ड एवं अमेरिका में भी उन्हें कई अवार्ड से नवाजा गया था.
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