केस-मुकदमे के झंझट से बेहतर है लोक अदालत

Published at :13 Dec 2015 12:42 AM (IST)
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केस-मुकदमे के झंझट से बेहतर है लोक अदालत

किशनगंज : लोक अदालत मामलों के निस्तारण का एक सशक्त मंच है इससे पक्षकारों में रिश्ते प्रगाढ़ बनते हैं. वर्तमान समय में लोक अदालत की महत्ता काफी महत्वपूर्ण हो चुकी है. ये बाते जिला एवं सत्र न्यायाधीश (डीजे) रमेश कुमार रतेरिया ने कही. वे शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार […]

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किशनगंज : लोक अदालत मामलों के निस्तारण का एक सशक्त मंच है इससे पक्षकारों में रिश्ते प्रगाढ़ बनते हैं. वर्तमान समय में लोक अदालत की महत्ता काफी महत्वपूर्ण हो चुकी है. ये बाते जिला एवं सत्र न्यायाधीश (डीजे) रमेश कुमार रतेरिया ने कही. वे शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के सौजन्य से आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के उदघाटन के मौके पर बोल रहे थे.

इसके पूर्व एक बुजुर्ग पक्षकार ने डीजे व डीएम, डीबीए के अध्यक्ष व महासचिव व अन्य न्यायिक पदाधिकारियों की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर लोक अदालत का उदघाटन किया. श्री रतेरिया ने बताया कि लोक अदालत में सुलहनीय आपराधिक, दीवानी, श्रम, जमीन विवाद, मनरेगा, विद्युत, वन विभाग, बैंक, टेलीफोन के अलावा अन्य विभागों से जुड़े मामलों का निपटारा किया जायेगा. जिला पदाधिकारी ने कहा कि अक्सर कई ऐसे मामलों में देखा गया है कि कई वर्षों तक मुकदमा लड़ने के बाद अंत में समझौता के माध्यम से ही वादों का निपटारा होता है. अगर यही समझौता विवाद के शुरूआती दौर में किया जाए तो मुवक्किल समय के साथ आर्थिक क्षति से भी बच सकेंगे.

जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अधिवक्ता नुरूस सोहेल ने कहा कि यह लोक अदालत गरीब एवं असहायों के लिए कारगर है. लोक अदालत में मुवक्क्लि को कोई शुल्क नहीं लगता है. सुलह के आधार पर न्याय दिया जाता है. महासचिव ओम कुमार ने लोगों से अपील की कि केस मुकदमा के चक्कर में न पड़ें. लोक अदालत का फैसला अंतिम होता है.
इसका अपील या रिविजन नहीं किया जा सकता है. मौके पर लोक अदालत में कुल 10536 आवेदन पड़े. जिसमें 8538 मामलों का निस्तारण किया गया. वहीं एक करोड़ 72 लाख 78 हजार 197 रूपये के मामले सेटल हुआ. कुल मामलों में से 1130 मामले बैंक से संबंधित थे. बैंकों ने कुल एक करोड़ 69 लाख 83955 रूपये की वसूली की. यहां बता दे कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में सात बेंचों का गठन किया गया था.
बेंच संख्या एक पर अपर जिला व सत्र न्यायाधीश ए के तिवारी, अधिवक्ता संजय मोदी, विनय मंडल, आनंद कुमार झा, बेंच संख्या दो पर अपर जिला व सत्र न्यायाधीश द्वितीय सत्येंद्र कुमार, अधिवक्ता अनिन्दो कुमार दास, अनुज राज, गीता कुमारी, बेंच संख्या तीन पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पन्ना लाल, अधिवक्ता प्रमेाद कुमार, श्याम शाबरी, आदु लाल हरिजन, बेंच संख्या चार पर एसीजेएम पुष्पम कुमार झा, अधिवक्ता मधुकर गुप्ता, अबु तालिब, मदन पोद्दार,
बेंच संख्या 5 पर मुंसिफ प्रथम केके चौधरी, पुष्पा कुमारी, बेंच संख्या 06 पर एसडीओ शफीक आलम, सीओ संजय कुमार श्रीवास्तव, अधिवक्ता मानव कुमार सहा तथा बेंच संख्या सात पर एलआरडीसी, अधिवक्ता अमृत कुमारी, राकेश कुमार मिश्रा ने उपस्थित होकर मामलों का निष्पादन किया.
लोक अदालत के कारण सिविल कोर्ट परिसर में मेले जैसा नजारा था. इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सह एसीजेएम पुष्पम कुमार झा, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अली हसन, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पन्ना लाल, जिला परिषद अध्यक्ष कमरूल होदा, नप अध्यक्षा आची देवी जैन, पूर्व नप अध्यक्ष त्रिलोक चंद्र जैन व अन्य न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित थे.
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