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श्रीकृष्ण की बाल लीला का वर्णन सुन श्रद्धालु हुए भाव-विभोर

Updated at : 05 Sep 2019 7:47 AM (IST)
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श्रीकृष्ण की बाल लीला का वर्णन सुन श्रद्धालु हुए भाव-विभोर

ठाकुरगंज : भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा में पांचवें दिन श्री कृष्ण की बाल लीला का वर्णन किया गया. व्यास पीठ पर विराजमान कथावाचक बाल व्यास केशव कृष्ण जी महाराज ने इस भागवत कथा में कहा कि कृष्ण हिंदू धर्म में विष्णु के अवतार हैं. सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्वपापहारी पवित्र और समस्त […]

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ठाकुरगंज : भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा में पांचवें दिन श्री कृष्ण की बाल लीला का वर्णन किया गया. व्यास पीठ पर विराजमान कथावाचक बाल व्यास केशव कृष्ण जी महाराज ने इस भागवत कथा में कहा कि कृष्ण हिंदू धर्म में विष्णु के अवतार हैं. सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्वपापहारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं.

जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है, तब-तब भगवान विष्णु किसी किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं. वैसे तो भगवान विष्णु ने अभी तक तेईस अवतारों को धारण किया. इन अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण के ही माने जाते हैं. श्री कृष्ण का जन्म क्षत्रिय कुल में राजा यदु कुल के वंश में हुआ था.
कथा वाचक केशव कृष्ण जी महाराज ने कृष्ण जी के जीवन गाथा का विस्तार पूर्वक विवरण किया. पंडित जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रत्येक रूप मनोहारी है. उनका बालस्वरूप तो इतना मनमोहक है कि वह बचपन का एक आदर्श बन गया है. इसलिए जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के इसी रूप की पूजा-अर्चना की जाती है, जिसमें वे चुराकर माखन खाते हैं, गोपियों की मटकी तोड़ते हैं और खेल-खेल में असुरों का सफाया भी कर देते हैं. इसी प्रकार उनकी रासलीला, गोपियों के प्रति प्रेम वाला स्वरूप भी मनमोहक है.
इसी प्रकार उनका योगेश्वर रूप और महाभारत में अर्जुन के पथ-प्रदर्शक वाला रूप सभी को लुभाता और प्रेरणा देता है. अपनी लीला में वे माखनचोर हैं, अर्जुन के भ्रांति-विदारक हैं, गरीब सुदामा के परम मित्र हैं, द्रौपदी के रक्षक हैं, राधाजी के प्राणप्रिय हैं, इंद्र का मान भंग करने वाले गोवर्धनधारी हैं. उनके सभी रूप और उनके सभी कार्य उनकी लीला हैं. उनकी लीला इतनी बहुआयामी हैं कि उन्हें सनातन ग्रंथों में लीलापुरुषोत्तम कहा गया है.
इस दौरान आयोजक फुल चन्द्र अग्रवाल और सरस्वती देवी के अलावे दिलीप अग्रवाल, मदन केजड़ीवाल, श्रवण अग्रवाल, कमल अग्रवाल, बिमल अग्रवाल, रोहित अग्रवाल, गणेश अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, जुगल अग्रवाल, मुरारी अग्रवाल, संजय अग्रवाल, नीतू अग्रवाल, लक्ष्मी देवी, प्रीति अग्रवाल, नीतू अग्रवाल, बबिता, कविता, सरिता अग्रवाल, सुशीला अग्रवाल, प्राची अग्रवाल, सोनू पौदार आदि मौजूद थे.
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