अतिक्रमण व जाम से त्रस्त है पौआखाली बाजार, बढ़ी परेशानी

Updated at : 02 Apr 2019 6:19 AM (IST)
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अतिक्रमण व जाम से त्रस्त है पौआखाली बाजार, बढ़ी परेशानी

पौआखाली : ठाकुरगंज प्रखंड में पौआखाली दूसरा सबसे बड़ा व्यावसायिक केंद्र है. इतना ही नहीं राजनीतिक दृष्टिकोण से हो या फिर प्रशासनिक दृष्टिकोण से पौआखाली हमेशा केंद्र बिंदु रहा है. किंतु दुर्भाग्य है पौआखाली बाजार का, जिन्हें संवारने का बीड़ा ना आजतक प्रशासन ने और ना ही अबतक के चुने गये जनप्रतिनिधियों ने उठाया है. […]

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पौआखाली : ठाकुरगंज प्रखंड में पौआखाली दूसरा सबसे बड़ा व्यावसायिक केंद्र है. इतना ही नहीं राजनीतिक दृष्टिकोण से हो या फिर प्रशासनिक दृष्टिकोण से पौआखाली हमेशा केंद्र बिंदु रहा है. किंतु दुर्भाग्य है पौआखाली बाजार का, जिन्हें संवारने का बीड़ा ना आजतक प्रशासन ने और ना ही अबतक के चुने गये जनप्रतिनिधियों ने उठाया है.

हालत यह है कि आज देखते ही देखते इस हाट से मवेशी क्रय बिक्री, पटुआ, धान आदि जो वृहत पैमाने पर एक निश्चित जगहों में होता था.
वह समाप्त हो गया है.यही कारण है कि इलाके में एक बेहतर और बड़ा व्यावसायिक केंद्र होने के बावजूद पौआखाली बाजार का जो अस्तित्व मौजूदा स्थिति में होना चाहिए था. वह आज भी धीरे-धीरे दम तोड़ता नजर आ रहा है. इसके पीछे प्रशासनिक उपेक्षा और अतिक्रमण सबसे बड़ा प्रमुख कारण है.
राजस्व हाट की जमीन भूमाफियाओं के अधीन दरअसल पौआखाली बाजार के इर्द-गिर्द काफी सरकारी भू-भाग को वर्षों पूर्व भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि लग गयी. जो बाद में प्रशासनिक मिलीभगत से लाखों रुपये मूल्य की कीमती जमीन के हिस्से को अपने कब्जे में कर लिया.
कहा जाता है कि अगर आज भी कब्जाधारियों के रिकार्ड को खंगाला जाये तो कई चौकाने वाले तथ्य वाले सामने आयेंगे कि कैसे-कैसे इस पौआखाली बाजार से पटुआ क्रय-बिक्री स्थल और धान क्रय-बिक्री वाले भू-भाग निजी घर, दुकान और गोदाम में तब्दील हो गये है.
इतना ही नहीं बाजार में सड़क के दोनों छोड़ के अलावे बाजार के अन्य भू-भाग पर रोजाना ही अतिक्रमण का दौर जारी है. जिस पर कार्रवाई के लिए प्रशासन के पास कोई कार्य योजना है भी या नहीं यह यह प्रशासन ही बेहतर जाने.
बाजार के दो सरकारी जलाशयों की जमीन पर अवैध कब्जा पौआखाली बाजार में वर्षों पुराने दो बड़े सरकारी जलाशय प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बना रहा. जिसके कारण आज बाजार के चंद पूंजीपतियों ने ना सिर्फ उन जलाशयों की जमीन को हड़प रखा है, बल्कि लगातार मिट्टी भराई कर उसपर अवैध निर्माण भी खड़ा करने का काम जारी रखा है. इतना ही नहीं लोगों ने घर मकान दुकान का गंदा पानी बहाकर बेकार कर दिया है.
लोगों का मानना है कि अगर प्रशासन चाहे तो आज भी उन जलाशयों की स्थिति का जायजा लेकर उनकी साफ सफाई कराकर इसके सौन्दर्यकरण करवा सकते है, अथवा मृत प्राय इन जलाशयों में मिट्टी भराई कर एक सुंदर सा मार्केटिंग कॉम्पलेक्स का निर्माण करा सकते है. जिसे लीज पर देकर स्थानीय व्यवसायियों को बहुत बड़ा लाभ दिला सकती है प्रशासन.
कुव्यवस्था का शिकार है बाजार पौआखाली बाजार पूरी तरह से कुव्यवस्था का शिकार है. बाजार में ना दुकानें व्यवस्थित है और ना ही किसी तरह की प्रशासनिक सुविधा ही व्यवसायियों को प्रदान है.
इतने बड़े राजस्व बाजार में ना तो एक अदद शुलभ शौचालय का निर्माण किया गया है ना ही स्वच्छ पेयजल की ही सुविधाएं है. बाजार की गलियों में वर्षों पूर्व खरंजे आज बिखरकर लोगों का मुंह चिढ़ा रही है. बरसात के दिनों में बाजार में कीचड़ व जलजमाव भी गंभीर समस्या उत्पन्न करती है.
बाजार में तीन दसक पूर्व बने मार्केटिंग यार्ड शेड ध्वस्त पड़ा है. जिसमें मजबूरन आज भी छोटे मोटे व्यवसायी अपना रोजी रोटी के लिए धंधा चलाते है. र नये सिरे से निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो पायी है.
जो दुःखद का विषय है. इसी तरह पूर्व विधायक गोपाल अग्रवाल के समय गुदड़ी बाजार में एकमात्र मार्केटिंग शेड का निर्माण कर व्यवसायियों को सौपा गया. किंतु,चंद पूंजीपति व्यवसायियों ने उस पर कब्जा कर गोदाम बना डाला है.
फलतः आम व्यवसायी को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है. उधर आवासीय इलाके में बूचड़खाना और मछली बिक्री करने वालों के कारण आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसलिए बाजार में एक तय और व्यवस्थित जगह की जरूरत महसूस की जा रही है.
जाम की समस्या पौआखाली बाजार में जाम की समस्या से लगातार व्यवसायी वर्ग और अन्य लोग जूझ रहें हैं. यहां पवना बालू खदान, मीरभिट्टा का क्षतिग्रस्त पुल और ऑटो व जुगार वाहनों की बेतरतीब परिचालन की वजह से सड़क में आये दिन काफी लंबा जाम लगता है.
बैंक शाखा की कमी पौआखाली बाजार के व्यवसायी आज भी एक अदद राष्ट्रीकृत बैंक शाखा की कमी से दो चार हो रहे हैं. इतने बड़े बाजार में एक मात्र उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक के भरोसे व्यवसायी वर्ग लेनदेन का कार्य करते है, जो परेशानी का सबब बना हुआ है. यहां के व्यवसायी भारतीय स्टेट बैंक व अन्य बैंकों से लेनदेन करने छह से 20 किलोमीटर दूरी तक का सफर तय करते है.
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