बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं सदर अस्पताल के मरीज, पानी पीने की नहीं है व्यवस्था

Updated at : 31 Mar 2026 9:47 PM (IST)
विज्ञापन
बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं सदर अस्पताल के मरीज, पानी पीने की नहीं है व्यवस्था

बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं सदर अस्पताल के मरीज, पानी पीने की नहीं है व्यवस्था

विज्ञापन

सदर अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज कराने आते हैं इलाज, चापाकल व वाटर प्लांट खराब

खगड़िया. सदर अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज व अभिभावक पानी के बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं. अस्पताल में पानी की किल्लत से मरीज परेशान हैं. पानी के लिए इधर-उधर दर-दर भटक रहे हैं. प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन दवा खाने के बाद पानी पीने की बात आती है तो पानी के लिए खाकर छानना पड़ता है. इसके बावजूद पानी नहीं मिलता है. थक-हारकर सीलबंद बोतल पानी खरीदना पड़ता है. इमरजेंसी कक्ष से लेकर भर्ती वार्ड, यहां तक की ओपीडी और रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास भी पीने के पानी की सुविधा नहीं है. अस्पताल कर्मी भी घर से बोतल में पानी लेकर आ रहे हैं या तो खरीदकर पीते हैं. अस्पताल प्रबंधक व जिला प्रशासन मरीज व कर्मियों की समस्या से अब तक अनभिज्ञ हैं.

दवा से ज्यादा पानी पीने में मरीजों का हो रहा खर्च

सदर प्रखंड के भदास गांव निवासी रीता देवी, माड़र निवासी रामसखी देवी ने कहा कि अस्पताल में भर्ती तै छियै, लेकिन दवा खाबै लैय पानी भी खरीदकर लाबै पड़े छैय. अस्पताल में दवा व जांच तै हो छै, लेकिन पानी लाना बड़का परेशानी छैय. कहा कि मरीज के साथ साथ परिजनों को पानी पीने के लिए खरीदकर लाना पड़ता है. अस्पताल में दवा से अधिक तो खरीदकर पानी पीने में खर्च हो जाता है. अस्पताल के कर्मियों ने बताया कि यह दुख सदर अस्पताल में महीनों से है. सदर अस्पताल में पुरुष, महिला, आईसीयू, इमरजेंसी, प्रसव, एमसीएच वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए पीने का पानी का व्यवस्था नहीं है. इमरजेंसी वार्ड के समीप लगे वाटर फिल्टर खराब है. मरीजों को ठंडा पानी नहीं मिल पा रहा है. संपन्न परिवार के मरीज तो बाहर से पानी खरीद ले रहे हैं, लेकिन गरीब मरीजों के लिए अशुद्ध व गर्म पानी भी नसीब नहीं है. इलाज कराने पहुंची अलौली की रेखा देवी ने बताया कि आधे घंटे से पानी खोज रहे हैं, लेकिन कहीं नहीं मिल रहा.

सदर अस्पताल में तीनों चापाकल है खराब

सदर अस्पताल में पुरुष वार्ड, महिला वार्ड, आईसीयू वार्ड, प्रसव केंद्र और एमसीएच वार्ड का संचालन मुख्य भवन में होता है. परिसर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा तीन चापाकल लगाया गया था. तीनों चापाकल खराब पड़ा हुआ है. चापाकल का हेंडिल चोरों द्वारा चोरी कर लिया गया. अस्पताल प्रबंधक द्वारा चापाकल को ठीक कराया जाता है, लेकिन बार-बार चापाकल का हेंडिल चोरी कर लिया जाता है. बताया जाता है कि कुछ शरारती तत्वों द्वारा जान-बुझकर चापाकल को खराब कर दिया जाता है. इसके कारण मरीजों को पानी-पीने के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है. एसएनसीयू के समीप लगे वाटर कूलर तो है, लेकिन खराब है. उससे गर्म व अशुद्ध पानी निकलता है. सैकड़ों मरीज किसी तरह प्यास बूझा रहे हैं, लेकिन वो भी पानी पीने योग्य नहीं है. पानी में आयरन अत्यधिक होने के कारण लोग पानी पीने से परहेज करते हैं. सदर अस्पताल की स्थिति बेहद चिंताजनक है. जिले के सबसे बड़े अस्पताल में पेयजल की सुविधा पूरी तरह बदहाल है.

लाखों की लागत से लगे वाटर प्लांट है खराब

सदर अस्पताल के मरीजों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तत्कालीन सांसद चौधरी महबूब अली कैसर के प्रयास से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन द्वारा लाखों रुपये की लागत से एक हजार लीटर पीएच वाटर प्लांट लगाया गया था. उद्घाटन के बाद से ही प्लांट में ताला लगा हुआ था, लेकिन कुछ दिनों पहले ही प्लांट का ताला खोला गया. वो अस्पताल भवन निर्माण में पानी के उपयोग के लिए, ना की मरीजों के लिए . प्लांट से भवन निर्माण पानी छिड़काब किया जाता है. मरीजों ने बताया कि धूप व गर्मी से गला तर हो रहा है. अस्पताल परिसर में लगे वाटर प्लांट मुंह चिढ़ा रहा है. जिले के सबसे बड़े अस्पताल में पानी पीने की व्यवस्था नहीं है. बच्चों को परेशानी हो रही है.

अस्पताल का चापाकल है खराब तो खूब फल-फुल रहा पानी का कारोबार

सदर अस्पताल परिसर में प्रतिदिन सिर्फ पानी का हजारों रुपये का कारोबार होता है, गर्मी में गला तर करने के लिए मरीजों को कीमत चुकानी पड़ती है. कहा जाता है मरीजों के इलाज के लिए प्रतिदिन लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन मरीजों को अस्पताल में शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है. अस्पताल परिसर में मरीजों के लिए आरओ व वाटर प्लांट नहीं करने के कारण पानी कारोबार फल-फुल रहा है. कारोबार द्वारा मरीज से एक बोतल का 20 रुपये लिया जाता है. सदर अस्पताल के मुख्य गेट पर कई दुकानदार सिलबंद पानी बेचते हैं. जो प्रतिदिन हजारों रुपये का कारोबार करता है.

अस्पताल प्रबंधक के कथनी और करनी में फर्क

सदर अस्पताल के प्रबंधक डॉ. प्रणब कुमार ने बताया कि वाटर कूलर, चापाकल व वाटर प्लांट चालू है. मरीज को पानी मिल रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि अस्पताल परिसर में कहीं भी चापाकल नहीं है. आरओ नहीं है ना ही वाटर प्लांट चालू है. मरीज पानी खरीदकर पी रहे हैं. स्थिति यह है कि सदर अस्पताल में एक हजार लीटर का टंकी लगाकर बेचा जाता है. महिनों से चापाकल खराब है. वर्षो से वाटर प्लांट खराब है. सदर अस्पताल के आपातकालीन कक्ष के बाहर शुद्ध और ठंडा पीने योग्य पानी का बोर्ड लगा है. लिखा है कि कृपया पानी को बर्बाद नहीं करें. लेकिन, आरओ गायब है. मरीज प्रतिदिन बोर्ड देखकर शुद्ध पानी के लिए पहुंचते हैं, लेकिन आरओ गायब देखकर कोसते हुए चले जाते हैं, शुद्ध और ठंडा पीने योग्य पानी प्रतिदिन मरीजों को मुंह चिढ़ा रहा है. लेकिन, स्वास्थय प्रशासन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है.

कहते हैं सदर अस्पताल प्रबंधक

सदर अस्पताल के प्रबंधक डॉ. प्रणब कुमार ने बताया कि वाटर कूलर, चापाकल व वाटर प्लांट चालू है. मरीज को पानी मिल रहा है.

विज्ञापन
RAJKISHORE SINGH

लेखक के बारे में

By RAJKISHORE SINGH

RAJKISHORE SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन