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परबत्ता अस्पताल के प्रसूति वार्ड में नहीं थम रहा वसूली का धंधा

Updated at : 04 Dec 2025 10:05 PM (IST)
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परबत्ता अस्पताल के प्रसूति वार्ड में नहीं थम रहा वसूली का धंधा

कुछ मामलों में तो शिकायत तक हो चुकी है लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने के चलते इन स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल काफी बड़ा हुआ है

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परबत्ता. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्य कर्मियों पर एक बार फिर वसूली का आरोप लगा है. बताया जाता है कि प्रसव कक्ष में तैनात नर्स एवं कर्मियों पर लगा यह आरोप कोई नया नहीं है. कई बार इस तरह के आरोप लग चुके हैं. कुछ मामलों में तो शिकायत तक हो चुकी है लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने के चलते इन स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल काफी बड़ा हुआ है. गुरुवार को भी कबेला की एक महिला विह्वल होकर प्रेस के सामने आई और उसने बताया कि बुधवार रात को ही उनके एक परिजन ने नार्मल प्रक्रिया के तहत शिशु को जन्म दिया और सुबह अस्पताल में तैनात कर्मियों ने उनसे कहा कि पैसेंट का सिलाई किया गया है और 700 रुपये देना होगा. इसके बाद कर्मियों ने महिला से जबरन रुपए ले लिए सूत्र बताते हैं कि प्रसवी महिला के साथ आए परिजनों की मानसिक स्थिति को भांपकर तैनात स्वास्थ्य कर्मी सामान्य कार्यों के नाम पर पैसे ऐंठने से बाज नहीं आते मजबूरी में परिजनों को चढ़ावा के रूप में कुछ ना कुछ राशि देनी ही होती है. वही चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर कशिश ने कहा कि शिकायत नहीं मिली है. अगर मामला सामने आया तो दोषी कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. प्रसवी वार्ड में बिचौलियों की मजबूत पकड़ गौरतलब है कि लाख प्रयास के बावजूद परबत्ता अस्पताल इन दिनों बिचौलियों के लिए एकदम सेफ जोन बना हुआ है. अस्पताल में गार्ड और सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, लेकिन दलालों की प्रसव वार्ड और वहां पर तैनात कर्मियों के साथ अच्छी तालमेल है डिलिवरी के नाम पर मरीजों या उनके साथ रहनेवाले परिजनों से रुपये ले लिए जाते है. लोग बताते हैं कि मरीज के साथ आए परिजन इलाज में किसी तरह की बाधा ना हो जाए इसलिए चुप रहने में ही भलाई समझते है. जिससे बिचौलियों के साथ स्वास्थ्यकर्मियों के भी हौसले बुलंद है. शिकायत या विरोध करने पर रेफर का डर परबत्ता अस्पताल के प्रसूति वार्ड के अंदर का हाल काफी डरावना है नाम नहीं छापने के शर्त पर एक कर्मी ने बताया कि ज्यादातर गरीब एवं पिछड़े घर से आए मरीजों का इलाज के नाम पर दोहन होता है अगर परिजन ने विरोध किया तो उन्हें रेफर का डर दिखाया जाता है यह सिलसिला यहीं नहीं थमता है यदि रेफर किया गया तो इसमें दलालों की एंट्री होती है और फिर उसे बरगला कर प्राइवेट अस्पताल भेजा जाता है और फिर वहां से मोटा कमीशन कुछ कर्मियों को प्राप्त हो जाता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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