धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सद्भाव का दिखा विराट संगम अलौली. प्रखंड क्षेत्र के शुम्भा गाजी घाट में दो दिवसीय रामधुनी महायज्ञ के लिए सोमवार को भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गयी. शुम्भा गाजी घाट स्थित सार्वजनिक हनुमान मंदिर का पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया. जब रामधुनी महायज्ञ की शुरुआत भव्य और ऐतिहासिक कलश शोभा यात्रा के साथ हुयी. जय श्रीराम, हर-हर महादेव और बजरंगबली के गगनभेदी जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा. चारों ओर केसरिया आस्था, ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तों की श्रद्धा ने शुम्भा को धर्म नगरी में बदल दिया. कड़ाके की ठंड के बावजूद भी सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी महिलाएं सिर पर गंगा जल से भरे कलश धारण कर शोभा यात्रा में शामिल हुयी. कलश शोभा यात्रा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर गाजी घाट, मुशहरी टोला, मराईन थान, सरस्वती स्थान चौक, भगवती नगर और नागरटोली के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर परिसर में पहुंची. यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुशासन, आस्था और एकता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया. शोभा यात्रा के मार्ग में जगह-जगह ग्रामीणों ने फूलों की वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया. स्थानीय युवाओं, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभालते हुए आयोजन को भव्य और अनुशासित स्वरूप देने में अहम भूमिका निभायी. आयोजकों ने बताया कि दो दिवसीय रामधुनी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है. महायज्ञ के दौरान धार्मिक प्रवचन, नेपाल की प्रसिद्ध महिला मंडली कलाकारों द्वारा किया जाएगा. मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, रामधुनी पाठ तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा. यज्ञ का मुख्य उद्देश्य समाज में शांति, सद्भाव, नैतिक मूल्यों और धार्मिक चेतना का प्रसार करना है. सार्वजनिक हनुमान मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि महायज्ञ में दूर-दराज से आए विद्वान पंडित, धर्माचार्य और कलाकार भाग ले रहे हैं. दो दिनों तक गाजी घाट शुम्भा क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठान, हवन-पूजन और सामूहिक भजन संध्या का आयोजन होगा. जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है. कलश शोभा यात्रा कार्यक्रम में स्थानीय विधायक रामचंद्र सदा ने भाग लिया. उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन धर्म हमारी संस्कृति की पहचान है. इसे आगे बढ़ाना हम सभी का सामूहिक कर्तव्य है. ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में एकता, भाईचारा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. उन्होंने महायज्ञ के सफल आयोजन के लिए मंदिर समिति और समस्त ग्रामवासियों को साधुवाद दिया.
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