टारगेट नहीं हुआ पुरा, 15 हजार के विरुद्ध मात्र 13.5 एमटी हुई गेहूं की खरीद
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 29 May 2024 11:59 PM
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से गेहूं खरीद को लेकर खोले गए क्रय केन्द्रों पर इस बार किसानों की भीड़ नहीं जुटी
खगड़िया. न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से गेहूं खरीद को लेकर खोले गए क्रय केन्द्रों पर इस बार किसानों की भीड़ नहीं जुटी. क्रय केन्द्र की जगह जिले के किसानों ने निजी व्यापारियों के हाथों गेहूं बेचने में रुचि दिखाई. जिस कारण इस साल गेहूं खरीद का टारगेट पूरा नहीं हो पाया. बता दें कि 31 मई तक जिले के क्रय केन्द्रों पर गेहूं का खरीद प्रस्तावित है. लेकिन स्थिति यह है कि आरंभ से लेकर समाप्ति तक क्रय केन्द्र पर विरानी छाई रही. इस साल जिले 15 हजार एमटी गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित था. लेकिन किसानों से मात्र 13.5 एमटी ही गेहूं की खरीद हो पाई. उल्लेखनीय है कि जिला-प्रशासन के द्वारा गेहूं अधिप्राप्ति के लिये सातों प्रखण्डों में 94 क्रय केन्द्र खोले गए थे.
बाजार मूल्य अधिक रहने से गेहूं की अधिप्राप्ति प्रभावित
गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य से गेहूं का बाजार मूल्य अधिक रहने के कारण किसान क्रय केन्द्र का रुख नहीं किये. कई पैक्स अध्यक्ष से इस संबंध में पूछे जाने पर बताया कि कोई भी किसान अपना नुकसान कर गेहूं नहीं बेचेंगे. बाजार मूल्य सौ रुपये क्विंटल अधिक है. कहा कि विभाग के दबाव के कारण क्रय केन्द्र खोले गए हैं. विभागीय पदाधिकारी को भी वस्तुस्थिति की पूरी जानकारी है. गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2275 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है. जबकि बाजार मूल्य अभी 23-24 सौ रुपये प्रति क्विंटल से अधिक है. लाभगांव के किसान मुकेश कुमार सिंह, बेला के किसान श्यामदेव सिंह, ओलापुर के मृत्युंजय सिंह ने बताया कि निजी व्यापारी से उन्हें गेहूं के अधिक मिल रहे हैं. जबकि क्रय केन्द्र पर उन्हें 100 रुपये से अधिक प्रति क्विंटल तक का नुकसान होगा. उपर से कागजात देने का भी वहां झंझट है. जानकार बताते हैं कि जब खुले बाजार में किसानों को गेहूं के अधिक दाम मिलेंगे तो कोई नुकसान उठाकर क्यों क्रय केन्द्र पर गेहूं देंगे. पूछे जाने पर सदर प्रखण्ड के बीसीओ ने कहा कि यह सही है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक खुले बाजार में गेहूं का मूल्य अधिक है. सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों को उन्हें फसल का उचित दाम दिलाना है. खुले बाजार में अगर किसानों को अधिक फायदा हो रहा है तो विभाग को इसमें क्या आपत्ति हो सकती है.
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