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सदर अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत, परिजनों ने किया हंगामा

Updated at : 13 Jul 2025 9:19 PM (IST)
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सदर अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत, परिजनों ने किया हंगामा

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अस्पताल में बगैर पैसे नहीं करायी जाती डिलेवरी

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-प्रसूता के पति का आरोप, नर्स ने डिलेवरी के लिए मांगा तीन हजार रूपये

-इमरजेंसी में चिकित्सक को बुलाकर प्रसूता का कराया गया ऑपरेशन

खगड़िया. सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष में नवजात की मौत हो गयी. घटना रविवार शाम की बतायी जा रही है. परिजनों ने नर्स व चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाया है. इस दौरान प्रसूता के परिजनों ने प्रसव कक्ष के बाहर हंगामा किया. अस्पताल परिसर में हंगामा कर रहे आक्रोशित परिजनों को चित्रगुप्त नगर थाना की पुलिस ने समझा-बुझाकर शांत कराया. नगर पंचायत के सन्हौली स्थित केनालय गांव के वार्ड संख्या 27 निवासी रणवीर कुमार के 24 वर्षीय पत्नी निगम देवी की प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गयी. प्रसूता के पति ने बताया कि निगम देवी को रविवार की सुबह डिलेवरी के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराए थे. चिकित्सक द्वारा कहा गया कि जच्चा व बच्चा ठीक है. तीन बजे तक प्रसव हो जाएगा. जब तीन बजे नर्स व चिकित्सक से डिलेवरी के संबंध में पूछा गया तो तीन हजार रुपये की डिमांड करने लगा. बताया कि नर्स को रुपये नहीं देने पर लापरवाही से नवजात की मौत हो गयी और प्रसूता जिंदगी और मौत से जुझ रही है. बताया कि नवजात की मौत होने पर प्रसूता निगम देवी दर्द से कराहती रही. लेकिन, चिकित्सक देखने नहीं आया. बताया कि जब हंगामा किया गया तो महिला चिकित्सक मंजू कुमारी को बुलाया गया. जिसके बाद प्रसूता का ऑपरेशन कर मृत बच्चे की डिलेवरी करायी गयी. इस दौरान अस्पताल प्रबंधक प्रणव कुमार ने पुलिस को घटना की जानकारी दी. चित्रगुप्त नगर थाना के एएसआई अस्पताल पहुंचकर हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराया. इधर, नर्स ने बताया कि प्रसूता को गंभीर स्थिति में भर्ती लिया गया था. चिकित्सक द्वारा हरसंभव बचाने का प्रयास किया गया. प्रसूता के परिजनों से लिखित बाद ऑपरेशन कराया गया. प्रसव कक्ष में ड्यूटी पर महिला चिकित्सक शशीबाला कुमारी, जीएनएम सोनी कुमारी व इंदू कुमारी मौजूद थी.

अस्पताल में बगैर पैसे नहीं करायी जाती डिलेवरी

परिजनों ने बताया कि सदर अस्पताल में बगैर चढ़ावा का स्वास्थ्य कर्मी डिलेवरी नहीं कराते हैं. गंभीर प्रसूता मरीज से अवैध राशि की उगाही की जाती है. उसके अलावे इलाज के लिए दवा निजी क्लिनिक से मंगाया जाता है. कमीशन के चक्कर में निजी क्लिनिक से दवा मंगाया जाता है. सदर अस्पताल में आर्थिक शोषण व मानसिक रूप से परेशान किया जाता है. यदि उक्त समस्याओं से बच भी जाए तो सदर अस्पताल के आसपास चक्कर लगा रहे महिला दलाल परिजन को जाल में फंसा लेती है. महिला दलाल का सदर अस्पताल में जमावड़ा लगा रहता है. प्रसूता के परिजनों का भय दिखाकर निजी नर्सिंग होम में ले जाती हैं. जहां निजी क्लिनिक व नर्सिंग होम संचालक द्वारा आर्थिक दोहन किया जाता है. उसके बाद महिला दलाल को कमीशन दिया जाता है. बताया जाता है कि निजी अस्पताल द्वारा एक हजार रुपये पर महिला बिचौलियों को 300 रुपये बंधा हुआ है. परिजनों ने बताया कि इस कमीशन में महिला दलाल, आशा व नर्स सभी की मिली भगत रहती है.

कहते हैं अस्पताल प्रबंधक

सदर अस्पताल के प्रबंधक प्रणव कुमार ने बताया कि प्रसूता के परिजनों को समझा बुझाकर शांत कराया गया. इमरजेंसी में महिला चिकित्सक को बुलाकर प्रसूता का ऑपरेशन कराया गया. प्रसूता सुरक्षित है. फिलहाल, अस्पताल में प्रसूता का इलाज किया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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