पसराहा-अगुआनी फोरलेन निर्माण में पकड़ी रफ्तार, रोटरी ट्रैफिक सिस्टम व पीवीडी तकनीक किया इंस्टॉलेशन

Published by :RAJKISHORE SINGH
Published at :29 Apr 2026 9:43 PM (IST)
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पसराहा-अगुआनी फोरलेन निर्माण में पकड़ी रफ्तार, रोटरी ट्रैफिक सिस्टम व पीवीडी तकनीक किया  इंस्टॉलेशन

पसराहा-अगुआनी फोरलेन निर्माण में पकड़ी रफ्तार, रोटरी ट्रैफिक सिस्टम व पीवीडी तकनीक किया इंस्टॉलेशन

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आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल, धसान क्षेत्र में विशेष सतर्कताखगड़िया. पसराहा-अगुआनी फोरलेन परियोजना के तहत एप्रोच पथ का निर्माण कार्य तीव्र गति से की जा रही है. यातायात को सुगम, व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से आधुनिक रोटरी ट्रैफिक सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिससे भविष्य में जाम और दुर्घटनाओं की संभावना को हद तक कम किया जा सके. परियोजना का निर्माण कार्य एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा कराया जा रहा है. पसराहा जोन के धसान क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरती जा रही है. इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए पहले सर्वे कराया गया और मिट्टी की गुणवत्ता की जांच की गयी. जांच में जहां मिट्टी कमजोर पायी गयी वहां उसे हटाकर उपयुक्त और मजबूत मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि सड़क की दीर्घकालिक मजबूती सुनिश्चित की जा सके. वर्तमान में यहां प्रीफैब्रिकेटेड वर्टिकल ड्रेन इंस्टॉलेशन का कार्य जारी है. इस तकनीक के माध्यम से जमीन के अंदर जमा अतिरिक्त पानी को बाहर निकाला जाता है, जिससे मिट्टी जल्दी सख्त होती है और सड़क निर्माण के लिए मजबूत आधार तैयार होता है. अधिकारियों ने बताया कि निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किए जा रहे हैं. तय समय सीमा के भीतर फोरलेन निर्माण को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. फोरलेन के चालू होने के बाद क्षेत्र में आवागमन और अधिक सुगम हो जायेगा. इससे न सिर्फ स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि दूर-दराज के यात्रियों के लिए भी यात्रा सुरक्षित और तेज़ होगी.

क्या है पीवीडी तकनीक

निर्माण कार्य में पीवीडी का अर्थ प्रीफैब्रिकेटेड वर्टिकल ड्रेन या विक ड्रेन होता है, जो नरम और जलयुक्त मिट्टी को स्थिर करने की आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग तकनीक है. इस प्रक्रिया में क्रेन या उत्खनन मशीन की मदद से एक विशेष मैंड्रेल के जरिए पीवीडी स्ट्रिप्स को जमीन की गहरायी तक डाला जाता है. ये स्ट्रिप्स मिट्टी के अंदर मौजूद पानी को तेजी से बाहर निकालने का रास्ता बनाती हैं. जिससे मिट्टी सूखकर सख्त हो जाती है. इंस्टॉलेशन के बाद ऊपर से सैंड या मिट्टी की परत (बेड) तैयार की जाती है. उस पर जियोटेक्सटाइल बिछाया जाता है. जिससे पूरी संरचना को स्थायित्व मिलता है. यह तकनीक खासकर उन क्षेत्रों में उपयोगी होती है, जहां जमीन दलदली या कमजोर होती है और पारंपरिक तरीकों से सड़क निर्माण करना कठिन होता है.

कहते हैं प्रोजेक्ट डायरेक्टर

अगुवानी–सुल्तानगंज गंगा नदी पर बन रहे फोरलेन पुल और उससे जुड़े एप्रोच पथ का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है. परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के लक्ष्य है. निर्माण स्थल पर दिन-रात कार्य जारी है. पसराहा क्षेत्र में बन रहा आधुनिक रोटरी ट्रैफिक सिस्टम भी इस परियोजना का अहम हिस्सा है. पुल निर्माण के साथ-साथ इस रोटरी ट्रैफिक सिस्टम को भी समय सीमा के भीतर पूरी तरह तैयार कर लिया जायेगा.

संजय कुमार सिंह, एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी प्रोजेक्ट डायरेक्टर

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