बन्नी बांध पर बनाया बसेरा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Aug 2016 4:40 AM (IST)
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परेशानी . शुद्ध पानी उपलब्ध करवाने में पीएचइडी विभाग विफल गुस्सायी गंगा ने हजारों लोगों को बेघर कर दिया है. पेट भरने के लिये सरकारी राहत ही सहारा है. मिला तो पेट भरेगा वरना भूखे सोने की नौबत है. आने जाने के लिये नाव भी नाकाफी रहने से लोगों को आने जाने में खतरों से […]
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परेशानी . शुद्ध पानी उपलब्ध करवाने में पीएचइडी विभाग विफल
गुस्सायी गंगा ने हजारों लोगों को बेघर कर दिया है. पेट भरने के लिये सरकारी राहत ही सहारा है. मिला तो पेट भरेगा वरना भूखे सोने की नौबत है. आने जाने के लिये नाव भी नाकाफी रहने से लोगों को आने जाने में खतरों से जूझना पड़ रहा है. हालांकि डीएम जय सिंह के निर्देश में बुधवार को राहत कार्य में तेजी आयी तो बाढ़ पीड़ितों के चेहरे पर सुकून की लकीर देखने को मिला.
खगड़िया : बन्नी बांध के दोनों ओर पॉलीथिन वाले तंबू में बाढ़ पीड़ित आशियाना बनाये हुए हैं.
पीड़ित महिला रुबी देवी ने प्रभात खबर टीम को बताया कि गुस्सायी गंगा ने बेघर कर दिया तो किसी तरह जान बचा कर बांध पर आ गये. भोजन पानी सब बाढ़ में बह गये थे. किसी तरह पेट भरने के जुगाड़ में लगने पर सूखा राशन मिला तब जाकर पेट भर पाया. वरना भूखे सोने की नौबत थी.
एक चापाकल दिलवा दीजिये साहब जी : इसी बीच प्रभात खबर की टोली आगे बढ़ती है तो कुछ दूर जाने के बाद बाढ़ पीड़ित घेर लेते हैं. शायद उन्हें लगा हो कि प्रशासन वाले राहत की लिस्ट बनाने आये हैं. नाम लिखवाने की होड़ मचते देख कहना पड़ा कि वे लोग मीडिया वाले हैं. फिर भी दर्द से जूझते इन परिवारों ने दर्द बयां करना जारी रखा. इस बीच एक महिला ने कहा कि एक पॉलीथिन वाले तंबू में एक दर्जन सदस्यों वाले परिवार के साथ रह रही हूं.
कैसे दिन कट रहा है यह तो रहने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन प्रशासन को क्या पता कि घर-द्वार छीनने का दर्द क्या होता है. एक पॉलीथिन दे दिया बस कर्तव्य पूरा. एक चापाकल के तीन दिनों से जो आते हैं उसे कह रही हूं लेकिन अब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. अंत में उन्होंने कहा कि एक चापाकल दिलवा देते तो शायद प्यास बुझा कर समय कट जाता.
बन्नी बांध पर व्यथा सुनाते बाढ़ पीड़ित.
शासन के लोग आये थे. पीड़ितों की संख्या के लिहाज से बांटे गये पॉलीथिन कम पड़ गये हैं. शुद्ध पानी की किल्लत बनी हुई है. नाव नहीं रहने से लोगों को आवागमन में संकट का सामना करना पड़ रहा है. अभी भी टेम्भाबन्नी, इंग्लिश बन्नी, धर्मपुर बन्नी गांवों के दर्जनों बाढ़ पीड़ितों को सरकारी राहत नहीं मिल पाया है.
सुनैना देवी, वार्ड सदस्य
राहत के लिए अभी भी सैकड़ों लोग टकटकी लगाये हुए है. धर्मपुर बन्नी सरकारी राहत शिविर शुरू होने से भोजन पानी के संकट से थोड़ी बहुत राहत जरूर मिली है, लेकिन राहत कार्य में तेजी लाये जाने की जरूरत है. साथ ही डॉक्टरों की एक टीम को मुआयना करने के लिए जल्द भेजने की जरूरत है. ताकि बीमार लोगों का उपचार हो सके.
अमरदीप, वार्ड सदस्य (21)
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