सावन करीब, अब तक नहीं बन पाया पुल

Published at :04 Jul 2016 1:38 AM (IST)
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सावन करीब, अब तक नहीं बन पाया पुल

खगड़िया : खगड़िया-सहरसा सीमा पर स्थित इलाके की सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल कात्यायनी मंदिर के निकट स्थित पुल नंबर पचास इन दिनों फिर से चर्चा में है. चर्चा की वजह पिछले बीस दिनों में इस पुल से गिर कर हो चुकी दो मौतें हैं. लेकिन न प्रशासन और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर कुछ […]

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खगड़िया : खगड़िया-सहरसा सीमा पर स्थित इलाके की सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल कात्यायनी मंदिर के निकट स्थित पुल नंबर पचास इन दिनों फिर से चर्चा में है. चर्चा की वजह पिछले बीस दिनों में इस पुल से गिर कर हो चुकी दो मौतें हैं. लेकिन न प्रशासन और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर कुछ बोलने को तैयार हैं और हर रोज पुल से गिरने से लोग घायल हो रहे हैं. कांवरिये इसी रास्ते जाते हैं मटेश्वर धाम. सावन आने में अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं

और कात्यायनी मंदिर के निकट स्थित पुल संख्या 50 को अब तक दुरुस्त नहीं किया गया है. जिससे मुंगेर घाट से जल लेकर बलवा हाट स्थित मटेश्वर धाम जाने वाले कांवरिये चिंतित हैं. ज्ञात हो कि मुंगेर घाट होकर आने वाले कांवरिये पिछले साल इसी पुल से फिसल कर गिर गये थे. हालांकि उस घटना में सभी कांवरिये सकुशल बच गये थे. सावन में जल लेकर इसी रास्ते जाने वाले कांवरिये बताते हैं कि खुला और छोटा पुल बारिश की वजह से फिसलन युक्त हो जाता है. जिस कारण फिसलने की आशंका बढ़ जाती है.

बीस दिनों में दो मौत
पिछले बीस दिनों में पुल से गिर कर दो की मौत हो चुकी है. वहीं पुल से गिर कर घायल होना आम बात है. बीते 27 जून को बनमा इटहरी प्रखंड के इटहरी गांव निवासी मनोज यादव के पुत्र पप्पू कुमार बाइक सहित पुल से नदी में गिर गये, जिसे बचा लिया गया. वहीं 24 जून को सहरसा जिला अंतर्गत रघुनाथ गांव के युवक की पुल से गिरकर मौत हो गयी और मानसी के बलहा बाजार दुकानदार शंभु साह की भी पुल से गिर कर मौत हो गयी.
राज्यरानी की घटना के बाद उठी थी एसएच निर्माण की मांग
तीन वर्ष पूर्व 19 अगस्त 2013 को धमारा घाट उस वक्त सुर्खियों में आया जब सुबह सवेरे 12567 सहरसा-पटना राज्यरानी सुपरफास्ट एक्सप्रेस से कट कर कइयों की मौत हो गयी थी. घटना के वक्त धमारा के विकास और बदला-कोपड़िया के बीच स्टेट हाइवे बनाने तक की बात हुई थी, लेकिन वक्त की लंबी खेप गुजर जाने के बावजूद सड़क दर्शन दुर्लभ ही है. आज भी रेलवे के रिटायर्ड पुल ही इस इलाके की पहचान है और यही इनके साथी. जिनके सहारे लोग गंतव्य को जाते हैं.
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