परिसीमन की मार से परेशान हैं दियारा वासी

Published at :03 Jan 2016 9:32 PM (IST)
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परिसीमन की मार से  परेशान हैं दियारा वासी

परिसीमन की मार से परेशान हैं दियारा वासी गृह जिले से कटे मुंगेर के दर्जनों गांव के लोग गोगरी पर हैं निर्भरहरिणमार व झौआ बहियार के लोग खगडि़या जिला से जोड़ने की मांग को लेकर उठाते रहे हैं आवाजप्रतिनिधि, गोगरीदियारा के मुंगेर जिला से जुड़े झौआ बहियार व हरिणमार के दर्जनों गांव को गंगा की […]

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परिसीमन की मार से परेशान हैं दियारा वासी गृह जिले से कटे मुंगेर के दर्जनों गांव के लोग गोगरी पर हैं निर्भरहरिणमार व झौआ बहियार के लोग खगडि़या जिला से जोड़ने की मांग को लेकर उठाते रहे हैं आवाजप्रतिनिधि, गोगरीदियारा के मुंगेर जिला से जुड़े झौआ बहियार व हरिणमार के दर्जनों गांव को गंगा की धारा ने अपने जिले से अलग कर रखा है. जिस कारण ग्रामीण आज अनेक समस्याओं से जूझते नजर आ रहे हैं. यहां कि भौगोलिक बनावट एक तरफ विकास के आड़े आ रही है तो दूसरी ओर इसकी भौगोलिक बनावट के कारण यह क्षेत्र अपराध व नक्सली गति विधि को लेकर सुर्खियों में रहा है. मूलभूत सुविधाओं से वंचित यहां के लोग मुख्यत: गोगरी अनुमंडल के जमालपुर व गोगरी बाजार पर निर्भर हैं और गोगरी बाजार से ही नमक से लेकर लकड़ी तक खरीदते हैं. जिस करण यहां के लोग कई बार खगड़िया से जोड़ने की मांग उठाते रहे है.यहां की भौगोलिक बनावटदियारा क्षेत्र जीएन बांध के अंदर का इलाका कहलाता है. जिसमें कुछ गांव गोगरी के हैं तो कई मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखंड से जुड़े हैं. जिनमें हरिणमार, झौआ बहियार हंसु सिंह टोला, कारेमरड़ टोला आदि हैं.दियारा क्षेत्र के गांव व टोलों के बीच गंगा की मुख्य धारा बहने के कारण यह जिला मुख्यालय से कटा है. जबकि यह गोगरी अनुमंडल मुख्यालय से महज दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर है. इस इलाके में गंगा की उपधारा के साथ गंडक की धारा भी बहती है. जिसके कारण इस गांव का भूगोल बनता बिगड़ता रहता है. वहीं इसका फायदा अपराधी व नक्सली उठाते रहते हैंअपराध का हालइस क्षेत्र में वर्षों से अपराध का बोलबाला रहा हैं. यहां नरसंहार की कई घटनाएं घटित हो चुकी है. वहीं आपराधिक मामले में हत्याएं होती रही है. भौगोलिक स्थिति के कारण यहां हथियार तस्कर भी अपना डेरा जमाये रहते हैं. फसल कटते ही वर्चस्व की लड़ाई में सक्रिय गिरोह के लोगों द्वारा चलाये गये गोली की तरतड़ाहट से संपूर्ण दियारा क्षेत्र गूंजता रहता है. मुंगेर के क्षेत्र में गोलियां चलने के कारण गोगरी पुलिस इसमें रूचि नहीं लेती है. जबकि मुंगेर जिले के बरियारपुर थाना की पुलिस के पहुंचने से पहले ही अपराधी अपने कार्य को अंजाम देकर चले जाते हैं. मिनी गन फैक्ट्री का होता है संचालन भौगोलिक बनावट विरल होने के कारण दियारा क्षेत्र में कई मिनी गन फैक्ट्री भी संचालित होता रहा है.बीते वर्ष भी चार मिनी गन फैक्टरी का उद्भेदन हुआ था. वर्ष 2012 में एक साथ 9 मिनी गन फैक्टरी का उद्भेदन हुआ था. वहीं 2010 में एक साथ 16 कथित नक्सली की हत्या कर दी गई थी. ऐसे कई घटनाएं उदाहरण मात्र हैं. जिस पर जिला पुलिस चाह कर भी अंकुश नहीं लगा पा रही है.शिलान्यास के एक दशक बाद भी नहीं मिली सड़क सुविधावैसे तो इस दियारा क्षेत्र के लोग आज भी मूलभूत सुविधा से वंचित है. जिला मुख्यालय से कटे इस क्षेत्र के लोग अब तक गोगरी से भी सीधा नहीं जुड़ सके हैं. हाल यह है कि इन पंचायतों को गोगरी से जोड़ने के लिए 2004 में ही हरिणमार से गोगरी तक पहुंच पथ का शिलान्यास किया गया. संवेदक आधा अधूरा कार्य कर गायब हो गया जो अब तक अधूरा है. खगड़िया से जोड़ने की होती रही है मांगहरिणमार व झौआ बहियार के लोग समस्या व असुविधा को लेकर वर्षों से इस गांव को खगड़िया जिला से जोड़े जाने की मांग करते रहे हैं. लोक सभा चुनाव के समय भी इसी मांग को लेकर वोट बहिष्कार तक करने की बात कही थी. स्थानीय भरत कुमार मनोज कुमार के अनुसार हरिणमार व झौआ बहियार को खगडि़या से जोड़ने को लेकर लोग मांग के साथ धरना व अन्य प्रदर्शन भी कर चुके हैं लोक सभा चुनाव के समय वोट बहिष्कार की घोषणा के बाद नेताओं द्वारा इस ओर पहल का आश्वासन दिया गया पर अब तक कोई पहल नहीं हुई.

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