आंगनबाड़ी केंद्र में अवैध उगाही : जांच के नाम पर खानापूर्ति

Published at :23 Dec 2015 9:31 PM (IST)
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आंगनबाड़ी केंद्र में अवैध उगाही : जांच के नाम पर खानापूर्ति

आंगनबाड़ी केंद्र में अवैध उगाही : जांच के नाम पर खानापूर्ति मामला परबत्ता में प्रति आंगनबाड़ी केंद्र 1500 रुपये की अवैध उगाही के आरोप का ————-सीडीपीओ द्वारा महिला पर्यवेक्षिका के माध्यम से चल रहा वसूली का धंधा ————–1500 रुपये प्रति केंद्र कमीशन मिलने के बाद ही टीएचआर व पोषाहार का वाउचर पास ——– कागज पर […]

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आंगनबाड़ी केंद्र में अवैध उगाही : जांच के नाम पर खानापूर्ति मामला परबत्ता में प्रति आंगनबाड़ी केंद्र 1500 रुपये की अवैध उगाही के आरोप का ————-सीडीपीओ द्वारा महिला पर्यवेक्षिका के माध्यम से चल रहा वसूली का धंधा ————–1500 रुपये प्रति केंद्र कमीशन मिलने के बाद ही टीएचआर व पोषाहार का वाउचर पास ——– कागज पर आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कर की जा रही खानापूर्ति ————–अधिकारी, सेविका व बिचौलिया की मिलीभगत से फल-फूल रहा उगाही का गोरखधंधा ————-सीडीपीओ सहित दो महिला पर्यवेक्षिका पर लगे आरोपों की जांच कर डीएम ने मांगी रिपोर्ट —परबत्ता मंे सीडीपीओ द्वारा दो महिला पर्यवेक्षिका के माध्यम से प्रति केंद्र 1500 रुपये अवैध वसूली की शिकायत की जांच अभी चल रही है. जल्द ही सच सबके सामने होगा. पूरी रिपोर्ट डीएम को सौंपी जायेगी. – सियाराम सिंह, डीपीओ, बाल विकास परियोजना विभाग. ————————परबत्ता में प्रति आंगनबाड़ी केंद्र 1500 रुपये अवैध उगाही प्रकरण में जांच में खानापूर्ति किये जाने के आरोप लगने शुरू हो गये हैं. लोगों का कहना है कि आखिर कोई सेविका की क्या मजाल है कि सीडीपीओ व महिला पर्यवेक्षिका के खिलाफ मुंह खोले. बीते दिनों परबत्ता पहुंचे डीपीओ ने जब सेविकाओं से पूछा कि कोई पैसा भी लेता है तो इंकार कर दिया. आखिर अधिकारी का कोपभाजन कौन बनने के लिये आगे आये. इधर, डीपीओ ने कहा कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है. ———————खगडि़या. परबत्ता मंे प्रति आंगनबाड़ी केंद्र 1500 रुपये अवैध उगाही के आरोपों की जांच शुरू होते ही विवादों में घिर गया है. लोगों ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिस ढंग से जांच की जा रही है उससे लीपापोती की आशंका बढ़ गयी है. इधर, परबत्ता में प्रति आंगनबाड़ी केंद्र 1500 रुपये कमीशन वसूली प्रकरण में डीएम के निर्देश बाद डीपीओ सियाराम सिंह द्वारा शुरू की गयी जांच अब तक पूरी नहीं हो पायी है. इधर, पूरे मामले में परबत्ता सीडीपीओ सहित दो महिला पर्यवेक्षिका की भूमिका संदिग्ध बतायी जा रही है. आरोप के घेरे में आई दोनों महिला पर्यवेक्षिका सीडीपीओ की विश्वासपात्र बतायी जाती है. —————-कौन बने बलि का बकरा भला कोई अदना सा कर्मचारी अपने अधिकारी के सामने मुंह खोलने की हिम्मत कर क्यों बलि का बकरा बनना चाहेगा. कुछ इसी तरह परबत्ता मंे आंगनबाड़ी केंद्रों में हो रहे अवैध उगाही मामले की जांच का भी हो रहा है. बीते दिनों परबत्ता पहुंचे डीपीओ सियाराम सिंह ने सीडीपीओ सहित स्थानीय बाल विकास परियोजना विभाग के अधिकारी के समक्ष मौजूद सेविकाओं से जब पूछा कि कोई अवैध वसूली भी करता है तो अनुमान के मुताबिक मौजूद सेविकाओं ने इंकार कर दिया. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सीडीपीओ के समक्ष बोल कर कोई अपनी नौकरी खतरे में क्यों डालना चाहेगा. हुआ भी यही. —————-अवैध उगाही प्रकरण में मैनेज का खेलबताया जाता है कि परबत्ता मंे आंगनबाड़ी केंद्रों से अवैध वसूली प्रकरण में डीएम के कड़े रुख के बाद स्थानीय मैनेज का दौर शुरू हो गया. जिसमें महिला पर्यवेक्षिका को सेविकाओं को अपने पक्ष मंे करने का भार सौंपा गया. साथ ही इशारे इशारे में मुंह खोलने पर अंजाम भुगतने की भी ताकीद की गयी. ताकि पूरा मामले को दबाया जा सके. हुआ भी कुछ यही. डीपीओ की मानें तो करीब सौ सेविका ने सीडीपीओ को क्लीन चिट देते हुए कहा है कि हमारे यहां कोई अवैध वसूली नहीं होती है. बता दें कि परबत्ता मंे कुल 215 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं. इन सारे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर गुप्त रुप से जांच करने के अनुरोध को दरकिनार कर सीडीपीओ के सामने ही सेविकाओं से पूछताछ कहीं मामला दबाने की साजिश तो नहीं है. हालांकि डीपीओ सियाराम सिंह साफतौर पर कहते हैं जांच में सब कुछ साफ हो जायेगा. तुम भी चुप और हम भी खुश बाल विकास परियोजना विभाग में तुम भी चुप और हम भी खुश की तर्ज पर खेल चल रहा है. बताया जाता है कि आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलने वाली रकम का वाउचर पास करवाने के एवज में कमीशन का खेल में लाखों रुपये की उगाही होती है. डीएम दरबार तक पहुंचे शिकायत में कहा गया है कि परबत्ता सीडीपीओ ने अवैध वसूली के काम के लिये दो महिला पर्यवेक्षिका को लगा रखा है. महिला पर्यवेक्षिका नूतन कुमारी, मणि प्रभा द्वारा सभी केंद्रों की सेविका को कार्यालय में बुला कर कमीशन की वसूली की जाती है. जिसके बाद ही वाउचर पास किया जाता है. हालांकि परबत्ता सीडीपीओ रंजू देवी ने कहा कि सारे आरोप बेबुनियाद हैं. इधर, आरोप के घेरे में आई महिला पर्यवेक्षिका नूतन कुमारी, मणि प्रभा ने सभी आरोपों को मनगढ़ंत करार दिया है. सूत्रों की मानें तो परबत्ता ही नहीं अधिकांश प्रखंडों में अवैध उगाही के फेर में आंगनबाड़ी केंद्रों का बेड़ा गर्क हो रहा है. लेकिन परबत्ता में हाल कुछ ज्यादा ही खराब है.————-

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