बढ गया बजट, असुविधाओं से जूझ रहे लोग

Published at :19 Dec 2015 10:22 PM (IST)
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बढ गया बजट, असुविधाओं से जूझ रहे लोग

बढ गया बजट, असुविधाओं से जूझ रहे लोगफोटो है 1,2,3 व 4 मेंकैप्सन- तैयार पुल का पाया, जान जोखिम में डाल लाइन पार करते लोग, जल्दी जाने के चक्कर में खड़ी महिलाएं, ओवरब्रिज निर्माण की तैयारी करते इंजीनियर.पूर्वी केबिन बंद होने से लोगों को हो रही है परेशानीप्रतिनिधि, खगड़ियास्थानीय जंकशन का पूर्वी केबिन बंद होने […]

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बढ गया बजट, असुविधाओं से जूझ रहे लोगफोटो है 1,2,3 व 4 मेंकैप्सन- तैयार पुल का पाया, जान जोखिम में डाल लाइन पार करते लोग, जल्दी जाने के चक्कर में खड़ी महिलाएं, ओवरब्रिज निर्माण की तैयारी करते इंजीनियर.पूर्वी केबिन बंद होने से लोगों को हो रही है परेशानीप्रतिनिधि, खगड़ियास्थानीय जंकशन का पूर्वी केबिन बंद होने का असर अब लोगों के किचन तक पड़ने लगा है. लोग चाह कर भी इस परेशानी से अपना पीछा नहीं छुड़ा पा रहे हैं. पूर्वी केबिन के बंद हो जाने के कारण लोगों को प्रत्येक दिन छह किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है. कुछ लोग तो एनएच 31 पर होने वाली घटनाओं के कारण रात में नितांत आवश्यक कार्य होने के बाद भी बाजार जाने से परहेज करते हैं. शहर की बनावट कुछ इस प्रकार की है कि रेलवे की पटरियां शहर को दो भागों में बांटती हैं.शहर के उत्तरी भाग में सभी महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय, अस्पताल, शिक्षण संस्थान आदि हैं. वहीं शहर के दक्षिणी भाग में बाजार. ऐसे में दोनों ही भाग में रहने वाले लोगों को किसी न किसी कार्य से शहर के दूसरे भाग में जाना ही पड़ता है. उसपर भी पूर्वी केबिन बंद हो जाने के कारण लोगों को तीन किलोमीटर की दूरी परमानंदपुर होकर तय करनी पड़ती है या फिर दूसरा विकल्पबखरी बस स्टैंड का केबिन यानी रेलवे का पश्चिमी केबिन पार करना पड़ता है.पर, दोनों की दूरी समान है. ऐसे में रिक्शा चालकों ने भी ज्यादा दूरी होने के कारण किराया बढ़ा रखा हुआ है. वहीं अगर लोग बाइक की सवारी करते हैं, तो तीन किलोमीटर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है. पूर्वी केबिन पर बनने वाले आरओबी का निर्माण कार्य भी कच्छप गति से चल रहा है. इस कारण लोगों की परेशानियां और बढ़ गयी हैं. लोगों ने पूर्वी केबिन को जल्द से जल्द खोलने की मांग की है.कहते हैं समाजसेवी समाजसेवी सह रेल उपभोक्ता संघर्ष समिति के संयोजक सुभाष चंद्र जोशी ने बताया कि आरओबी 15 महीने में तैयार किया जाना था. 93 करोड़ में यह ठेका रेल विभाग से इरकॉन कंपनी ने प्राप्त किया था. पर, अनावश्यक विलंब के कारण ब्रह्मपुत्र कंस्ट्रक्शन कंपनी को कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गयी. फिर भी समय पर उचित प्रगति नहीं हुई. उक्त आरओबी का रि टेंडर पुन: 65 करोड़ में किया गया है. कार्य में गति आयी है, लेकिन अभी भी कार्य पूर्ण होने में डेढ़ वर्ष से अधिक का समय लग सकता है. उन्होंने बताया कि यह कार्य हरि कंस्ट्रक्शन को पूरा करना है.

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