ठंड बढ़ते ही युवतियों की पहली पसंद बनी मोहनी कोरी कार्डिगन

Published at :09 Dec 2015 9:29 PM (IST)
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ठंड बढ़ते ही युवतियों की पहली पसंद बनी मोहनी कोरी कार्डिगन

ठंड बढ़ते ही युवतियों की पहली पसंद बनी मोहनी कोरी कार्डिगन फोटो है 4,5,6 व 7 मेंकैप्सन- ऊलेन बाजार में स्वेटर खरीदती महिला, एनएच पर लाइट के सहारे गुजरते वाहन, अलाप तापते लोग व ठंड में स्कूल जाते बच्चे प्रतिनिधि, खगड़ियाठंड बढ़ते ही ऊलेन की दुकानों में गर्म कपड़ों के लिए ग्राहकों की भीड़ देखी […]

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ठंड बढ़ते ही युवतियों की पहली पसंद बनी मोहनी कोरी कार्डिगन फोटो है 4,5,6 व 7 मेंकैप्सन- ऊलेन बाजार में स्वेटर खरीदती महिला, एनएच पर लाइट के सहारे गुजरते वाहन, अलाप तापते लोग व ठंड में स्कूल जाते बच्चे प्रतिनिधि, खगड़ियाठंड बढ़ते ही ऊलेन की दुकानों में गर्म कपड़ों के लिए ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है. ठंड में युवतियों की पहली पसंद मोहनी कोरी कार्डिगन लेडीज टॉप, स्टाईलीस ब्लू रोज जैकेट तथा कश्मीरी कोट की मांग तेज हो गयी है. बुधवार को मेन रोड में लगे सेल की दुकान में लोगों की भीड़ लगी रही. दुकानदार सतेंद्र कुमार, सुरेश कुमार, मैनेजर राज कुमार ने बताया कि सर्वाधिक सेल लेडीज टॉप व कार्डिगन, ब्लेजर की हो रही है. बच्चों के लिए स्वेटर व जैकेट तथा युवाओं के लिए भी लेटेस्ट डिजाइन के ऊनी स्वेटर , ब्लेजर व जैकेट उपलब्ध है. जो युवाओं की पहली पसंद बनी हुई है. उल्लेखनीय है कि जिले के अधिकांश रेडिमेड की दुकान में ठंड बढ़ते ही रेडिमेड ऊलेन कपड़े की मांग बढ़ गयी है. इधर दुकानदार ने बताया कि ब्रांडेड शो रूम में जैकेट 6 हजार से 10 हजार तक का उपलब्ध है. जबकि सेल की दुकान में 25 सौ से 600 रुपये तक के जैकेट की बिक्री हो रही है. मोनु राज ने बताया कि किलर शो रूम में सर्वाधिक 10 हजार रुपये तक की जैकेट व 5 हजार तक के स्वेटर उपलब्ध हैं. कुहासा से गाड़ियों की रफ्तार हुई धीमी बुधवार को अहले सुबह से ही आसमान में कुहासा छाये रहने के कारण सड़क पर गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गयी थी. एनएच 31 पर वाहन चालक दिन में भी लाइट जलाकर गंतव्य तक पहुंचने का प्रयास कर रहे थे. हालांकि इस दौरान छोटी बड़ी सभी गाड़ियों की रफ्तार धीमी देखी गयी. लकड़ी की बढ़ी मांगठंड बढ़ते ही अलाव के लिए लकड़ी की मांग बढ़ गयी है. दुकानदारों द्वारा 500 रुपये मन लकड़ी की बिक्री की जा रही है. सड़क के चौक चौराहों पर ठंड से बचाव के लिए लोग अलाव तापते नजर आ रहे थे. स्कूली बच्चों को हुई परेशानी ठंड बढ़ते ही स्कूली बच्चों की परेशानी बढ़ गयी है. अभिभावकों ने बताया कि यदि ठंड की रफ्तार यही रही तो विद्यालय संचालन के समय में परिवर्तन कर देना उचित होगा. अभिभावकों ने बताया कि 8 बजे सुबह से ही विद्यालय में पठन पाठन शुरू कर दिये जाने के कारण बच्चों को सुबह 6 बजे उठ कर तैयार होना पड़ता है. बच्चों के साथ साथ अभिभावकों की भी परेशानी बढ़ जाती है.

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