एक शक्षिक के सहारे प्रावि कज्लवन

Published at :08 Dec 2015 9:51 PM (IST)
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एक शक्षिक के सहारे प्रावि कज्लवन

एक शिक्षक के सहारे प्रावि कज्लवन फोटो है 1 मेंकैप्सन- स्कूल में पढ़ते छात्र प्रतिनियुक्त शिक्षक के सहारे चल रहा है विद्यालय शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने नहीं देखा है स्कूलपांच वर्ष में नहीं हुआ एक भी निरीक्षणप्रतिनिधि, परबत्ताप्रखंड में एक विद्यालय ऐसा है, जहां आज तक पदाधिकारी का पदार्पण नहीं हुआ है. इस विद्यालय […]

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एक शिक्षक के सहारे प्रावि कज्लवन फोटो है 1 मेंकैप्सन- स्कूल में पढ़ते छात्र प्रतिनियुक्त शिक्षक के सहारे चल रहा है विद्यालय शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने नहीं देखा है स्कूलपांच वर्ष में नहीं हुआ एक भी निरीक्षणप्रतिनिधि, परबत्ताप्रखंड में एक विद्यालय ऐसा है, जहां आज तक पदाधिकारी का पदार्पण नहीं हुआ है. इस विद्यालय के स्थापना काल के पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक एक बार भी किसी पदाधिकारी का निरीक्षण नहीं हो सका है. प्रखंड के जोरावरपुर पंचायत अंतर्गत कज्लवन गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय कज्वलन दियारा की स्थापना 18 दिसंबर, 2010 को की गयी थी. स्थापना के दो वर्षों के बाद तक विद्यालय भूमिहीन था तथा झोपड़ी में चलता था. वर्ष 2012 में गांव के नागेश्वर मंडल ने विद्यालय की स्थापना के लिए तीन कट्ठा जमीन दान दी. फिलहाल विद्यालय में 120 छात्र छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन एक शिक्षकीय विद्यालय होने के कारण विद्यालय प्रधान के मीटिंग आदि में जाने पर विद्यालय बंद करने की नौबत आ जाती है. इस विद्यालय के स्थापना के दो वर्ष बीतने के बाद वर्ष 2012 में भवन निर्माण होने पर अब यह सुचारु रूप से चलने लगा है. परबत्ता प्रखंड की मुख्य भूमि से नौ किलोमीटर दूर दियारा में विद्यालय होने की वजह से यहां भवन निर्माण से लेकर मध्याह्न भोजन योजना चलाना एक दुरुह कार्य है. भवन निर्माण सामग्री को कई गाड़ियां बदलकर ले जाना पड़ता है तथा यही स्थिति मध्याह्न भोजन योजना के खाद्यान्न का भी है. संवेदक द्वारा इस विद्यालय का खाद्यान्न को गोढियासी में ही उतार दिया जाता है. विद्यालय में इकलौते शिक्षक सह प्रभारी राजेश मूल रूप से एक अन्य विद्यालय प्राथमिक विद्यालय सतखुट्टी के शिक्षक हैं. उन्हें यहां 2010 से ही प्रतिनियोजित कर विद्यालय का संचालन कराया जा रहा है. विद्यालय की भौगोलिक स्थिति यह है कि स्थापना के पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक शिक्षा विभाग के किसी स्तर के किसी पदाधिकारी द्वारा निरीक्षण नहीं किया गया है. इस विद्यालय में बाढ़ के दिनों में छुट्टी रहती है. वर्तमान में यह गोगरी नारायणपुर बांध पर नयागांव गोढियासी से पश्चिम गंगा नदी की तरफ तीन किलोमीटर दूर है. यहां तक जाने में गंगा की उपधारा को पार करना पड़ता है. जोरावरपुर पंचायत नियोजन इकाई द्वारा वर्ष 2012 में इस विद्यालय के लिए रिक्ति घोषित की गयी तथा आवेदक का चयन भी हुआ था. पर, विद्यालय की भौगोलिक स्थिति को देखकर आवेदक ने दूसरे नियोजन इकाई का रुख किया. वर्तमान में यह विद्यालय प्रतिनियोजित शिक्षक के भरोसे घिसट कर चल रहा है. इस स्कूल के लिए शिक्षा विभाग तथा पंचायती राज व्यवस्था पांच वर्षों में एक शिक्षक का इंतजाम नहीं कर सका एवं इकलौते प्रतिनियोजित शिक्षक के भरोसे पांच कक्षाओं के इस विद्यालय से छात्र-छात्राओं को शिक्षा का कितना प्रकाश मिल सकता होगा, यह सहज ही समझा जा सकता है. वस्तुत: यह विद्यालय चरवाहा विद्यालय के तर्ज पर चलने को अभिशप्त है, जिसमें बच्चे केवल भोजन करने ही आते हैं.

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