सैकड़ों गुरुजी को नौकरी से धोना पड़ेगा हाथ !

Published at :07 Dec 2015 9:39 PM (IST)
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सैकड़ों गुरुजी को नौकरी से धोना पड़ेगा हाथ !

खगड़िया : फर्जीवाड़ा कर गुरुजी बनने वालों के लिए बुरी खबर है. प्रमाण पत्र की जांच में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने पर नौकरी जाने के साथ-साथ जेल की हवा भी खानी पड़ेगी. पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बाद निगरानी की टीम सरगरमी से जांच कर रही है. इसके लिये 2006 से लेकर अब तक बहाल […]

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खगड़िया : फर्जीवाड़ा कर गुरुजी बनने वालों के लिए बुरी खबर है. प्रमाण पत्र की जांच में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने पर नौकरी जाने के साथ-साथ जेल की हवा भी खानी पड़ेगी. पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बाद निगरानी की टीम सरगरमी से जांच कर रही है. इसके लिये 2006 से लेकर अब तक बहाल शिक्षकों के प्रमाणपत्र सहित अन्य कागजात विभाग से मांगे गये हैं.

इसमें से माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक शिक्षकों के प्रमाणपत्र सहित अन्य कागजात निगरानी को विभाग ने सौंप दिया है. प्रारंभिक शिक्षकों के कागजात वाले फोल्डर के लिए निगरानी की टीम खगड़िया में डेरा जमाये हुए है. सोमवार को निगरानी के इंस्पेक्टर कन्हैया लाल ने शिक्षा विभाग के डीपीओ स्थापना कार्यालय में पहुंचे.

यहां उन्होंने शिक्षा विभाग से जिले में बहाल करीब 4479 प्रारंभिक शिक्षकों का फोल्डर तलब किया है. इधर, शिक्षा विभाग भी निगरानी को फोल्डर देने में जुटा हुआ है. बताया जाता है कि जिले में फर्जीवाड़ा कर सैकड़ों शिक्षक पिछले दरवाजे से बहाल होने में कामयाब रहे हैं. धीरे-धीरे ऐसे गुरुजी की करतूत सामने आ रही है.

इधर, पटना उच्च न्यायालय के कड़े रुख को देखते हुए कार्रवाई के डर से 17 प्रारंभिक शिक्षकों ने अब तक नौकरी से त्यागपत्र दे दिया है. सूत्रों की मानें तो अभी भी सैकड़ों शिक्षक ऐसे हैं, जो नौकरी कर रहे हैं.

अलौली में कई गुरुजी की जायेगी नौकरी सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के अनुसार, अलौली प्रखंड में कई ऐसे गुरुजी हैं, जो फर्जीवाड़ा कर बहाल हुए हैं. अब निगरानी जांच के भय से ऐसे शिक्षकों के हाथ-पांव फूल रहे हैं.

सूत्रों की मानें तो 2009-10 में बहाल करीब चार दर्जन शिक्षकों की डिग्री ऐसे विश्वविद्यालय से है, जिसे सरकार से मान्यता ही प्राप्त नहीं है. ऐसे में निगरानी जांच में इन शिक्षकों की नौकरी जाने की प्रबल संभावना है. बिना जांच के ही दिया सर्टिफिकेट शुक्र हो पटना उच्च न्यायालय का, जो बिहार में 2006 से अब तक बहाल शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच निगरानी ने शुरू कर दी. वरना फर्जीवाड़ा के सहारे बहाल हुए गुरुजी का बाल बांका भी नहीं होता.

तभी तो 2013 में अलौली में मांगी गयी जानकारी में तत्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों को सही करार दे दिया था. इसमें कहा गया था कि प्रखंड में 2009-10 में बहाल हुए 45 प्राथमिक शिक्षक व 46 पंचायत शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच विभिन्न चरणों में तत्कालीन बीइओ राम विलास प्रसाद व बैद्यनाथ प्रसाद सिंह द्वारा की गयी.

जांच कर्ता द्वारा समर्पित प्रतिवेदन के आधार पर किसी फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों को नियोजन नहीं किया गया है. बताया जाता है कि बिना जांच के ही सभी शिक्षकाें के प्रमाण पत्र को सही बता दिया गया, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है. इसका खुलासा निगरानी जांच के बाद होने की उम्मीद है. -संदेहास्पद विश्वविद्यालय/ संस्थानों की सूची सिस्टर निवेदिता कॉलेज, कोलकाता विजय कृष्णा महाविद्यालय, हावड़ा दशमेश डिग्री कालेज, फागवाड़ालाल बहादुर शास्त्री बीएड कॉलेज, बेंगलुरु विश्व भारती शांति निकेतन नवभारत शिक्षा परिषद, ओड़िसा माध्यमिक शिक्षा परिषद,

दिल्ली मानव सेवा संस्थान, वाराणसी गुरुकुल विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मथुरा नव भारत शिक्षा परिषद इंडिया विनयाले मिशन, सेलम ऑक्सफोर्ड कॉलेज ऑफ एडुकेशन, कोलकाता ऑल इंडिया करसपोंडेंस कोचिंग सोसाइटी, किलकाटा यूनिवर्सिटी ऑफ नार्थ बंगाल रवीन्द्र विश्वविद्यालय, नई दिल्ली सेवा भारती अध्यापन मंदिर, सेवापुरी, वाराणसीमानव सेवा संस्थान, वाराणसी सोसाइटी प्रीपार्टीसिपेट्री इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट,

दिल्ली वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ प्राइमरी एडुकेशन, कोलकाता उत्तर माध्यमिक शिक्षा परिषद, दिल्ली सेंट्रल बोर्ड ऑफ हायर एडुकेशन, दिल्ली नवभारत शिक्षा संस्थान, राउरकेला (सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के अनुसार )(सूत्रों की मानें तो जिले में तैनात कई ऐसे गुरुजी हैं, जिनके प्रमाण पत्र इन्हीं में से एक विवि से निर्गत हैं.)

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