शिकायत पर शक्षिा विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई

Published at :26 Nov 2015 9:48 PM (IST)
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शिकायत पर शक्षिा विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई

शिकायत पर शिक्षा विभाग नहीं कर रहा कार्रवाईमामला ग्रामीणों की शिकायत के बाद तीन स्कूलों की जांच नहीं करने का ग्रामीणों की शिकायत के महीनों बाद भी नहीं खुली अधिकारियों की नींद सरकारी स्कूलाें में व्याप्त कुव्यवस्था की जांच के प्रति विभाग लापरवाह ग्रामीणों की शिकायत की जांच हो, तो खुल सकते हैं कई राज […]

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शिकायत पर शिक्षा विभाग नहीं कर रहा कार्रवाईमामला ग्रामीणों की शिकायत के बाद तीन स्कूलों की जांच नहीं करने का ग्रामीणों की शिकायत के महीनों बाद भी नहीं खुली अधिकारियों की नींद सरकारी स्कूलाें में व्याप्त कुव्यवस्था की जांच के प्रति विभाग लापरवाह ग्रामीणों की शिकायत की जांच हो, तो खुल सकते हैं कई राज ग्रामीणों की शिकायत को फाइलों में दबा कर बरती जा रही लापरवाही —————–अभी तक शिकायतों की जांच नहीं हो पायी है. जल्द ही तीनों स्कूलाें का भ्रमण कर जांच कर रिपोर्ट सौंप दी जायेगी. – रामकुमार सिंह, बीईओ, चौथम —————-प्रतिनिधि, खगड़ियाशिक्षा विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं खुलने के कारण ग्रामीणों के शिकायत की जांच अब तक नहीं हो पायी है. जबकि ग्रामीणों द्वारा शिकायत किये दो महीने से अधिक समय बीत चुका है. पूरा मामला चौथम प्रखंड के तीन स्कूलों में व्याप्त कुव्यवस्था से जुड़ा हुआ है. ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायत बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारी का कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. इधर, जिले में शिक्षा विभाग के अधिकारी के लचर रवैये व शिक्षकों की मनमर्जी के कारण सरकारी स्कूलों की स्थिति दिन ब दिन बदतर होती जा रही है. —————–तुम भी चुप और हम भी खुशतुम भी चुप और हम भी खुश इसी तर्ज पर सरकारी स्कूलों का संचालन हो रहा है. अधिकांश विद्यालयाें में व्याप्त कुव्यवस्था के प्रति शिक्षा विभाग के लचर रवैये के कारण गोलमाल का सिलसिला जारी है. कहीं बच्चों से चावल चोरी करवाये जा रहे हैं, तो कई स्कूलों में शिक्षकों के महीनों गायब रहने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. किसी स्कूल में एमडीएम बंद है तो कहीं स्कूल खटाल बन गया है. कहीं सरकारी पैसों का उठाव कर प्रधान शिक्षक मौज कर रहे हैं तो कहीं पोशाक राशि का गोलमाल किया जा रहा है. ऐसी कई समस्या सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था चौपट कर रही है. इधर, स्थिति यह है कि शिकायत के बाद अधिकारी कुंडली मार कर बैठे रहते हैं. पिछले दरवाजे से सेटिंग गेटिंग की बदौलत मामले को सुलझाने से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं. नतीजनत, स्कूलों में पठन पाठन से लेकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है. रद्दी की टोकरी में ग्रामीणों की शिकायत सितंबर महीने में चौथम प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय कात्यायनी स्थान की जांच के दौरान ग्रामीणों ने और भी कई स्कूलों में व्याप्त कुव्यवस्था से संबंधित शिकायत अधिकारी से कर जांच की मांग की थी. जांच को गये अधिकारी ने तो अपनी रिपोर्ट में ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर चौथम प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय आदर्शनगर बंगलिया, प्राथमिक विद्यालय लाहावासा बंगलिया, प्राथमिक विद्यालय पूर्वी टोला बंगलिया के जांच की जरूरत जतायी थी. लेकिन शिकायत के महीनों बीतने के बाद भी शिक्षा विभाग नींद में है. ग्रामीणों ने इन स्कूलों में पठन-पाठन में लापरवाही, शिक्षकाें के गायब रहने, विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ देने में आनाकानी सहित कई गंभीर आरोप लगाये थे. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जांच से अधिकारी क्यों कतरा रहे हैं.

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