करोड़ों खर्च के बाद भी जिले के लोग पी रहे आर्सेनिक युक्त पानी

खगडि़या. जिले में स्वास्थ्य विभाग के करोड़ों रुपये लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर खर्च हो चुके हैं. लेकिन स्थिति तस की तस बनी हुई है. अभी भी लोग आर्सेनिक युक्त पानी पीने को मजबूर बने हुए हैं. जानकारी के अनुसार जिले के 129 पंचायतों में आयरन युक्त पानी पाया जाता है. […]
खगडि़या. जिले में स्वास्थ्य विभाग के करोड़ों रुपये लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर खर्च हो चुके हैं. लेकिन स्थिति तस की तस बनी हुई है. अभी भी लोग आर्सेनिक युक्त पानी पीने को मजबूर बने हुए हैं.
जानकारी के अनुसार जिले के 129 पंचायतों में आयरन युक्त पानी पाया जाता है. वहीं गंगा एवं गंडक नदी के किनारे बसे गांवों में आर्सेनिक मिश्रित पानी पाया जाता है. जो लोगों के लिए काफी खतरनाक होता है. ऐसे जगहों पर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा चापाकल में लाल चिन्ह लगा दिया गया है.
जिला प्रशासन के द्वारा यह घोषणा की गई थी कि जिले के आर्सेनिक प्रभावित गांव व मुहल्ले को शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाएगी. लेकिन विभाग की घोषणा दम ताड़ती नजर आ रही है.
हालांकि इस ओर जिला प्रशासन ने प्रयास तो किया था. जिसके तहत अलौली, रांको, परवत्ता, गोगरी, चैथम और बेलदौर में जलमीनार पानी टंकी का निर्माण किया गया था. कई जगहों पर पानी टंकी बनकर तैयार भी हो गया. लेकिन आज तक इस टंकी से शुद्ध पानी लोगों को नसीब नहीं हो सका. गांव तो गांव जिला मुख्यालय का भी यही हाल बना हुआ है.
जहां कभी कभी नल से गंदे पानी आने की शिकायत होती लगी रहती है. उल्लेखनीय है कि पीएचईडी द्वारा जिले को आयरन मुक्त बनाने में करोड़ों रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है. लेकिन समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है. अगर चापाकल की बात करें तो हजारों की लागत से विद्यालय व चैक चैराहों पर वाटर फिल्टर करने वाले चापाकल लगाये गये.
जिससे कुछ दिन तो लोगों को शुद्ध पानी नसीब हुआ फिर स्थिति वहीं की वहीं आ गयी. वहीं अगर जल मीनार की स्थिति पर ध्यान दिया जाये तो रांको प्रखंड में जलमीनार का निर्माण कई वर्ष बीत चुके हैं. लेकिन आज तक स्थानीय लोगों का शुद्ध पेयजल सपना बना हुआ है. कभी कभी जलमीनार को चालू किया जाता है तो उससे भी गंदा पानी निकलता है.
जिसका उपयोग स्थानीय लोग या कपड़ा फिचने में या फिर खेत पटाने में करते हैं. इतना ही नहीं पीएचईडी के पानी से लोग अपनी गाडि़या भी साफ करते नजर आते हैं. पूछने पर पानी गंदा होने की बात कही जाती है. वहीं अगर नल की बात करें तो लोगों को शुद्ध पेयजल पीलाने वाली नल आज खूद कचरे व जंगल झार में पड़े हैं.
पानी के लिए लगाये गये लगभग सभी नल टूट चुके हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि अगर समय पर टंकी की साफ सफाई की जाती तथा रोजाना टंकी का चालू रखा जाता तो लोगों को शुद्ध पानी मुहैया करायी जाती है.
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