अर्धरात्रि में होती है निशा पूजा, इस पूजन का है विशेष महत्व

Published at :19 Oct 2015 9:03 PM (IST)
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अर्धरात्रि में होती है निशा पूजा, इस पूजन का है विशेष महत्व

परबत्ता : प्रखंड के लगार पंचायत अंतर्गत बिशौनी गांव स्थित चतुर्भुज दुर्गा मां के मंदिर में प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्र के दौरान किये जाने वाले निशा पूजन का एक अलग ही महत्व है. मां शक्ति के सातवें रुप को कालरात्रि के रुप में जाना जाता है. सप्तमी को मां का महास्नान कराया जाता है. इसी दिन […]

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परबत्ता : प्रखंड के लगार पंचायत अंतर्गत बिशौनी गांव स्थित चतुर्भुज दुर्गा मां के मंदिर में प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्र के दौरान किये जाने वाले निशा पूजन का एक अलग ही महत्व है. मां शक्ति के सातवें रुप को कालरात्रि के रुप में जाना जाता है. सप्तमी को मां का महास्नान कराया जाता है. इसी दिन रात में निशा पूजा का आयोजन होता है.

मंदिर के मुख्य पुजारी के देख रेख में निशा पूजा का आयोजन किया जाता है. इस पूजन में अन्य धार्मिक क्रिया कलापों के अलावा गांव के एक परिवार विशेष द्वारा दी गयी बलि से इसकी शुरूआत होती है.

इसमें काले कबूतर व काले छागर की बलि दी जाती है. इस पूजा की शुरूआत बारह बजे रात में होती है,जो अगले दो घंटे तक चलती है. ऐसी मान्यता है कि इस पूजन को देखने मात्र से मनोकामनाएं पूर्ण होती है तथा मां का आशीर्वाद मिलता है. इस पूजा को देखने के लिये प्रतिवर्ष काफी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में जुटते हैं. ऐसी मान्यता है कि मां जिस भक्त पर प्रसन्न होती हैं उसे ही निशा पूजा देखने का सौभाग्य प्राप्त होता है. जिन पर मां की कृपा नहीं होती है.

वे पूजा शुरू होने तक स्वयं को रोक नहीं सकते हैं और निद्रा के आगोश में चले जाते हैं. पूजा के समापन पर भक्तों को प्रसाद दिया जाता है. इस प्रसाद को प्राप्त करने वालों को उसी समय बिना रुके अपने घर जाना पड़ता है तथा उसे प्रसाद देना पड़ता है. जिसके लिये मन्नत मांगी गयी है. निशा पूजा देखने एवं प्रसाद प्राप्त करने के चमत्कारिक परिणामों के दर्जनों किस्से इलाके के लोगों के जुबान पर है. इस वर्ष यह पूजा आज यानि मंगलवार रात में होगा.

नवरात्र को लेकर पूरे प्रखंड में रामायण पाठ होता है. बड़ी संख्या में लोग फलाहार व्रत रखते हैं. वहीं कुछ लोग केवल जल पर ही दसों दिन अपना काम चलाते हैं तथा दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं. सिराजपुर,तेमथा राका,खनुआ राका, चकप्रयाग,लगार,कुल्हरिया,मड़ैया,

भरतखंड आदि गांवों में पहली पूजा से ही मेला का माहौल लगने लगता है. वहीं डुमडि़या बुजुर्ग तथा परबत्ता गांव में प्रतिमा की बजाय कलश स्थापित कर पूजा अर्चना की जाती है. प्रखंड में चारों ओर भक्ति, समर्पण, आराधना व सात्विकता का माहौल बना हुआ है. सभी पूजा समितियों द्वारा भक्तों की सुविधा के लिये तरह तरह के इंतजाम किये गये हैं.

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