कामिनी की कामना...चमकता रहे लोकतंत्र अपना

Published at :12 Oct 2015 10:30 PM (IST)
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कामिनी की कामना...चमकता रहे लोकतंत्र अपना

खगड़िया : 12 अक्तूबर का दिन. सुबह के आठ बजे होंगे व हम शहर के जेएनकेटी विद्यालय के मॉडल बूथ पर पहुंचे. लेकिन वहां पर वोटरों की लंबी लाइन थी. पुरुष से अधिक लंबी लाइन महिलाओं की नजर आ रही थी. सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से निबट रहा था. इसी बीच चेहरे पर मुस्कान लिए […]

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खगड़िया : 12 अक्तूबर का दिन. सुबह के आठ बजे होंगे व हम शहर के जेएनकेटी विद्यालय के मॉडल बूथ पर पहुंचे. लेकिन वहां पर वोटरों की लंबी लाइन थी. पुरुष से अधिक लंबी लाइन महिलाओं की नजर आ रही थी.

सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से निबट रहा था. इसी बीच चेहरे पर मुस्कान लिए कामिनी वोट देकर बाहर निकलती हैं. कैमरे को देख वह ठिठक जाती हैं. जैसे उसे कुछ कहना हो. वोट देने के सवाल पूछने से पहले ही वह कहती है कि वोट दे दिया.

अब घर में जाकर खाना बनाना है. क्या बुजुर्ग, क्या जवान, सब के चेहरे पर वोट के प्रति गजब का उत्साह नजर आ रहा था. खासकर युवतियों में मतदान के प्रति ललक थी.

कामिनी जैसी लाखों बेटियों ने 12 अक्तूबर को मतदान में भाग लेकर लोकतंत्र के साथ-साथ खगड़िया का भी मान बढ़ाया. जिले के चारों विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न बूथों पर महिलाओं की लंबी कतार देख पुलिस-प्रशासन के साथ साथ लोकतंत्र के प्रहरी भी गदगद नजर आये.

पोते का हाथ थाम बूथ पर पहुंची दादी अभी हम खगड़िया विधानसभा के माड़र दक्षिण पंचायत के उर्दू मध्य विद्यालय में थे. यहां चार केंद्र बनाये गये थे. मतदान केंद्र में प्रवेश करने की आपाधापी बता रही थी कि यहां के लोगों में लोकतंत्र के प्रति अटूट आस्था है. कोई लाठी के सहारे तो कोई पोते-पोतियों के सहारे मतदान केंद्र पर पहुंच रही थी.

मतदाता शांतिपूर्ण माहौल में मतदान करते नजर आये. अल्पसंख्यक बहुल इस पंचायत के बारे में युवा मुखिया तनवीर हसन कहते हैं देखियेगा यहां 65 से 70 प्रतिशत मतदान होगा. साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल में शुमार इस पंचायत में लोकतंत्र के प्रति आस्था देख लोकतंत्र की नींव रखने वाले सुकून महसूस कर रहे होंगे.

उपकरण के सहारे वोट देने पहुंचे कई विकलांग विभिन्न बूथों पर भ्रमण के दौरान लोकतंत्र में विश्वास जगाती कई तस्वीर नजर आयी. पैर से विकलांग संजय सुबह सात बजे अलौली विधानसभा के हरिपुर स्थित बूथ पर पहुंचे हुए थे.

वह डाक्टर साहब द्वारा दिये गये सहायक उपकरण के सहारे मतदान करने पहुंचा था. पूछने पर वह कहते हैं कि क्या हुआ, थोड़ी मेहनत करनी पड़ी लेकिन यह मलाल तो नहीं रहेगा कि लोकतंत्र में भागीदारी निभाने में वह पीछे रह गया.

सो सुबह सुबह ही संजय मतदान करने पहुंच गया. विभिन्न मतदान केंद्रों पर ऐसी तस्वीर बता रही थी कि लोकतंत्र के इस महापर्व में भागीदारी निभाने की सब में बराबर की भूख है. चलो-चलो जल्दी… वोट गिराने भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम माने जाने वाले अलौली विधानसभा के अमौसी इलाके में घूसे ही थे कि लोकतंत्र को चार चांद लगाती एक तस्वीर नजर आयी.

धान के खेत के बीच से घूंघट की ओंट में आती आधा दर्जन ग्रामीण महिलाओं की टोली सामने से आ रही थी. फोटो की फ्लश चमकते ही महिलाओं ने घूंघट के अंदर से पूछा कि फोटो काहे खींचे. अखबार के बारे में बताने पर वह कहतीं है कि अभी पीछे से बड़ी टोली आ रही है. इतने में एक महिलाएं कहतीं है कि जल्दी चलो, धूप तेज हो रही है. लाइन लंबी हो जायेगी.

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