खजरैठा में होती हैं वैष्णवी की आराधना

खजरैठा में होती हैं वैष्णवी की आराधना दुर्गा सप्तशती के साथ रामचरितमानस का नवाह पाठमां की महिमा है अगम अपारअति प्राचीन है खजरैठा का दुर्गा मंदिरप्रतिनिधि, परबत्ताप्रखंड के खजरैठा पंचायत अंतर्गत वैष्णवी दुर्गा मंदिर खजरैठा प्रखंड में चर्चित पूजा स्थानों में एक है. ऐसा माना जाता है कि सर्वप्रथम भगवान श्रीराम ने समुद्र तट पर […]
खजरैठा में होती हैं वैष्णवी की आराधना दुर्गा सप्तशती के साथ रामचरितमानस का नवाह पाठमां की महिमा है अगम अपारअति प्राचीन है खजरैठा का दुर्गा मंदिरप्रतिनिधि, परबत्ताप्रखंड के खजरैठा पंचायत अंतर्गत वैष्णवी दुर्गा मंदिर खजरैठा प्रखंड में चर्चित पूजा स्थानों में एक है. ऐसा माना जाता है कि सर्वप्रथम भगवान श्रीराम ने समुद्र तट पर नवरात्र पूजा प्रारम्भ की थी. इस पूजन के आरंभ होने के दसवें दिन लंका विजय के साथ अधर्म पर धर्म तथा असत्य पर सत्य की जीत हुई. प्रखंड के खजरैठा गांव में वैष्णवी मां भगवती की पूजा वहां के ग्रामीण वर्षों से करते आ रहे हैं. लोगों का मानना है कि मां की महिमा अपरमपार है. मां सभी कष्टों को दूर करती हैं तथा भक्तों की मन्नतें पूर्ण करती है. मंदिर के पंडित मणिकांत चौधरी, रवीन्द्र चन्द्र राय, पुरोहित अर्जुन झा, आचार्य केसरी नंदन बताते हैं कि इस वर्ष पूजा की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. यहां के मंदिर में वैष्णवी मां भगवती की पूजा होती है. पूरे नौ दिनों तक ग्रामीण भक्त गण दुर्गा सप्तशती के साथ रामचरितमानस का नवाह पाठ करते हैं. यह परंपरा कई सौ वर्षों से चलती आ रही है. मां के साथ भगवान श्रीराम की भी जयकार होती हैं. यहां मां के नौ रूप की पूजा पूरे विधि विधान तरीके से होती है. निशा पूजा सांकेतिक रूप में की जाती हैं. यहां अस्त्र शस्त्र का प्रयोग वर्जित है. नवग्रह पूजा की भी विशेष परम्परा है. खजरैठा निवासी पंकज कुमार राय बताते हैं कि इस वर्ष मां भगवती की प्रतिमा का निर्माण आकर्षक ढंग से किया जा रहा है. खजरैठा की दस भुजा वाली वैष्णवी मां भगवती की आराधना करने वाले भक्त को हर संकट से मुक्ति मिलती है. यहां दूर दराज से भक्त गण शारदीय नवरात्र में आते हैं. वैष्णवी मां भगवती सुख, समृद्धि का प्रतीक हैं. खजरैठा के ग्रामीण श्रद्धा भक्ति के साथ धूमधाम से शारदीय नवरात्र मनाते हैं. दुर्गा सप्तशती एवं रामचरितमानस के नवाह पाठ के ध्वनि से नौ दिनों तक वातावरण गुंजायमान रहता है. मंदिर में खास तरीके की रोशनी की व्यवस्था में लोग लगे हुए हैं. नवमी पूजा के दिन कुंवारी कन्या पूजन का विशेष महत्व है. उस दिन 51 से अधिक संख्या में कुंवारी कन्या का पूजन मंदिर में किया जाता है. भक्त अपने अपने चिह्नित कुंवारी कन्या को नये वस्त्र एवं श्रृंगार से सुशोभित करते हैं. कुंवारी कन्या पूजन के बाद मंदिर परिसर में नवमी एवं दसवीं के दिन भोजन करवाया जाता है. कुंवारी कन्या द्वारा जो भोजन प्राप्त किया जाता है, उसमें से बचा भाग प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है. नवमी की रात मंदिर परिसर में ब्राह्मण भोजन करवाने की भी परम्परा है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










