गति सीमा पार न करें, कीमती है जान

गति सीमा पार न करें, कीमती है जान लोगो लगा देंने की कृपा करेंगे दिनों दिन बढ़ती जा रहीं सड़क दुर्घटनाएं नहीं संभल रहे वाहन चालक खगड़िया. जिले की सड़क चिकनी हुई तो वाहनों की रफ्तार बढ़ गयी. यही रफ्तार अब जान पर आफत बन गयी है. एनएच 31 के अलावा जिले के विभिन्न क्षेत्रों […]
गति सीमा पार न करें, कीमती है जान लोगो लगा देंने की कृपा करेंगे दिनों दिन बढ़ती जा रहीं सड़क दुर्घटनाएं नहीं संभल रहे वाहन चालक खगड़िया. जिले की सड़क चिकनी हुई तो वाहनों की रफ्तार बढ़ गयी. यही रफ्तार अब जान पर आफत बन गयी है. एनएच 31 के अलावा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हर रोज सड़क दुर्घटनाएं होती हैं. इन दुर्घटनाओं में लोगों की जानें भी जा रही हैं. हाथ पैर टूटने एवं हेड इन्ज्यूरी की घटनाएं तो आम बात हो गयी हैं. इसका मुख्य वजह तेज रफ्तार से वाहनों का परिचालन है. बावजूद सड़क दुर्घटना को रोकने के लिए प्रशासन कारगर कदम नहीं उठा रहा है. इससे प्रशासन पर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं. क्षमता से अधिक यात्रियों को भर चलाये जाते हैं वाहन सड़क हादसे के पीछे के कारणों में यदि जायेंगे, तो यह भी पता चलेगा कि क्षमता से अधिक यात्रियों को वाहन पर बैठाकर ले जाने के कारण भी हादसा होता है. खासकर ऑटो के दुर्घटनाग्रस्त होने के पीछे क्षमता से अधिक सवारियों को बैठाये जाने की बात सामने आयी है. बता दें कि ऑटो चालक नियमों को ताक पर रखकर चालक की सीट पर चार से पांच लोगों को बैठाकर गंतव्य तक का सफर करते हैं. स्थिति यह हो जाती है कि चालक अपनी सीट पर ठीक से बैठ भी नहीं पाता है. पैसे की लालच में वह यात्रियों की जान से खेलते हुए क्षमता से अधिक पैसेंजर को ढोता है. नहीं होती है कार्रवाई जिले में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन के द्वारा अब तक कोई ठोस पहल नहीं किया गया है. जिला परिवहन पदाधिकारी हों या फिर अन्य पुलिस पदाधिकारी अब तक तेज रफ्तार से वाहनों को चलाने के मामले में एक भी वाहन चालक पर कार्रवाई नहीं की गयी है. पुलिस भी पोस्टमार्टम करा कर या फिर घायलों को अस्पताल तक पहुंचाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेती है. उससे आगे वह भी कुछ नहीं कर रही है. शराब पीकर चलाते हैं वाहन सड़क दुर्घटनाओं में यह भी देखा जा रहा है हादसे की वजह शराब पीकर वाहनों को चलाना भी है. खासकर एनएच 31 सहित जिले के अन्य सड़कों पर हादसे हुए हैं. उसमें शराब पीकर गाड़ी चलाने की बात भी सामने आयी है. शराब पीकर गाड़ी चलाने से चालक की जान तो खतरे में रहती ही है. वहीं यात्रियों की जान भी सांसत में अटकी होती है. वाहन चलाते समय रखें ध्यान वाहन चलाते समय गतिसीमा का करें पालनबाइक चलाते समय हेलमेट का करें प्रयोग शराब या फिर नशीला पदार्थ का सेवन कर न चलाएं गाड़ीक्षमता से अधिक यात्रियों को वाहनों पर न बैठायें बगैर लाइसेंस के वाहन न चलाएं वाहन चलाते समय यातायात नियमों का करें पालनओवरटेकिंग से बचें, प्रशासनिक निदेर्शों का करें पालन मोटर वाहन कानून का नहीं होता है पालन प्रतिदिन होने वाली दुर्घटनाओं से स्पष्ट है कि वाहन चलाते समय लोगों के द्वारा मोटर वाहन कानून का पालन नहीं किया जाता है. लोग अपनी मर्जी के हिसाब से वाहन को तेज गति से चलाते हैं. निर्धारित कानून के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि जहां भी भीड़ भाड़ या फिर सड़कों पर लोगों को आवागमन ज्यादा हो वहां पर 15 से 20 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से वाहन को चलाना है. पर, उस स्थिति में भी वाहनों की रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटा से कम नहीं रहती है.जबकि सामान्य नियमों के अनुसार 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहनों को वैसे स्थानों पर चलाना है, जहां लोगों का आवागमन कम हो. इसका पालन न तो छोटे वाहन करते हैं और न ही बड़े वाहन ही. बाइक एवं ऑटो चालकों के लिए तो गति सीमा कोई मायने ही नहीं रखती है. वे अपनी मर्जी के हिसाब से वाहन चलाते हैं. हेलमेट व कागजात पर रहता है फोकस प्रशासनिक अधिकारी हों या फिर पुलिस. इन दोनों का फोकस हेलमेट या बगैर कागजात के वाहन चलाने वालों को जुर्माना करने पर जरूर रहता है. चुनाव को लेकर जिले में वाहन चेकिंग अभियान भी चलाया जा रहा है. इसमें हेलमेट एवं कागजात नहीं रहने के मामले में जुर्माना भी किया गया है. परंतु तेज रफ्तार पर ब्रेक के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गयी है.कहते हैं परिवहन पदाधिकारी परिवहन पदाधिकारी अब्दुल रज्जाक ने बताया कि गति सीमा को लेकर कई बार लोगों को जागरूक किया गया है. वाहन चेकिंग के दौरान गति सीमा की सलाह भी वाहन चालकों को दी जाती है.
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