सिपाही कर रहे टाइपिस्ट व रीडर का काम

Updated at : 29 Nov 2017 5:45 AM (IST)
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सिपाही कर रहे टाइपिस्ट व रीडर का काम

उदासीनता. अक्तूबर में जिले में 329 मामले दर्ज, आधे से अधिक मामले का नहीं हुआ सुपरविजन खगड़िया : नक्सल प्रभावित जिले में मैनपावर की कमी है. जिले के एक भी थाना में रीडर नहीं है. टाइपिस्ट का काम सिपाही व चौकीदार से लिया जा रहा है. अपराध पर अंकुश लग गया है. लेकिन इंस्पेक्टर के […]

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उदासीनता. अक्तूबर में जिले में 329 मामले दर्ज, आधे से अधिक मामले का नहीं हुआ सुपरविजन

खगड़िया : नक्सल प्रभावित जिले में मैनपावर की कमी है. जिले के एक भी थाना में रीडर नहीं है. टाइपिस्ट का काम सिपाही व चौकीदार से लिया जा रहा है. अपराध पर अंकुश लग गया है. लेकिन इंस्पेक्टर के रूप में नियुक्त थानाध्यक्ष की जिम्मेवारी बढ़ गयी है. थाने में सब इंस्पेक्टर की जगह इंस्पेक्टर की पोस्टिंग हो चुकी है. साधारण मामले के केस में सुपरविजन की जिम्मेवारी भी इंस्पेक्टर को दे दी गयी है. लेकिन मैनपावर की कमी के कारण आधे से अधिक मामले का सुपरविजन नहीं हो पाया है.
अक्तूबर माह में सिर्फ जिले में 329 मामले दर्ज किये गये हैं. लेकिन आधे से अधिक मामले का सुपरविजन नहीं हो पाया है. इंस्पेक्टर को काम का बोझ सुपरविजन रिपोर्ट तैयार करने में बाधा बन रहा है. हालात यह है कि पुलिस अधीक्षक को भी रीडर नहीं है. पूरे जिला में मात्र एक रीडर है. जो पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थापित है. कई ऐसे थाने हैं जहां सुपरविजन रिपोर्ट लिखने के लिए सिपाही को प्रशिक्षित कर काम लिया जा रहा है. रीडर नहीं रहने के कारण प्रत्येक माह आधे से अधिक सुपरविजन नहीं हो पा रहा है.
लॉ एं्ड ऑडर डीएसपी का पद हुआ सृजित
अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस मुख्यालय से खगड़िया में लॉ एण्ड ऑडर के लिए डीएसपी का पद सृजित किया गया है. लेकिन अब तक पोस्टिंग नहीं हुआ है. लॉ एण्ड ऑडर डीएसपी आने से कार्य का लोड घटेगा.
दबाव में किया जा रहा है सुपरविजन
लंबित मामले के निष्पादन के लिए लगातार पुलिस अधीक्षक द्वारा दिये जा रहे दबाव पर सुपरविजन रिपोर्ट तैयार किया जाता है. दबाव में लिखे गये सुपरविजन की गुणवत्ता में कमी होने की आशंका बनी रहती है. कई बार तो उच्चाधिकारी सुपरविजन रिपोर्ट को पुन: तैयार करने का आदेश दिया जाता है. पुलिस पदाधिकारी को हर क्राइम मीटिंग में सुपरविजन रिपोर्ट का जवाब देना होता है. थाने में रीडर नहीं होने के कारण सुपरविजन रिपोर्ट का टाइप करने में विलंब होता है. अधिकांश थाने में प्रति माह लगभग डेढ़ दर्जन मामले दर्ज हो रहे हैं. लेकिन एक दर्जन से भी कम मामले का सुपरविजन हो पा रहा है. सदर अंचल में अक्तूबर माह में 181 मामले दर्ज किया गया. जिसमें सर्वाधिक नगर थाना, मुफस्सिल थाना में दर्ज किया गया है. जबकि गोगरी अंचल में 148 मामले दर्ज किये हैं. सर्वाधिक मामले गोगरी थाना में 47 तथा परबत्ता थाना में 44 मामले दर्ज किये गये हैं.
थानेदार के रूप में इंस्पेक्टर की जिम्मेवारी
आइटी एक्ट और गंभीर प्रवृत्ति से जुड़े केस का अनुसंधान करना
प्रतिदिन एंटी क्राइम चेकिंग और गश्ती के साथ थाना में लोगों की समस्या सुनना
वर्तमान में वाहन चेकिंग अभियान की जिम्मेवारी
पुलिस मुख्यालय से लेकर एसपी और मुख्यमंत्री, जन संवाद मामले में रिपोर्ट तैयार करना
विधि व्यवस्था, धरना प्रदर्शन, वीआइपी मूवमेंट में ड्यूटी
कोई घटना होने पर घटना का स्थलीय निरीक्षण करना
पासपोर्स्ट से लेकर चरित्र सत्यापन, आर्म्स लाइसेंस के लिए प्रतिवेदन तैयार करना
सुपरविजन लंबित रहने के कारण
थानेदारों को रोजाना विधि व्यवस्था में व्यस्त रहना
सुपरविजन रिपोर्ट टाइप करने के लिए थाना में मैनपावर की कमी
सुपरविजन नहीं होने का असर
सुपरविजन नहीं होने से कार्रवाई में देरी
दुर्घटना व वाहन चोरी के केस में मुआवजा मिलने में देरी
लंबित केस की संख्या में बढ़ोतरी होना
ऑपरेशन एएसपी का पद है रिक्त
नक्सल प्रभावित जिले में ऑपरेशन एएसपी का पद बीते एक साल से खाली पड़ा है. जिले में एक भी कंप्यूटर सिपाही की बहाली नहीं हुई है. 1981 में जिला बनने के दौरान अनुसचिवीय कर्मी/ लिपिक का कुल नौ पद सृजित था. 37 साल गुजर जाने के बाद भी लिपिक की संख्या नहीं बढ़ायी गयी है. अलबत्ता नौ में से मात्र छह लिपिक पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ड्यूटी कर रहे हैं. पुलिस बल के कमी के कारण अधिकांश समय सिपाहियों को ड्यूटी में गुजारना पड़ता है.
अक्तूबर 2017 में थाना में दर्ज मामले की संख्या
थाना संख्या
नगर थाना में 24
चित्रगुप्त नगर 24
मुफस्सिल 22
गंगोर 16
मोरकाही 13
चौथम 06
अलौली 46
मानसी 20
महिला थाना 06
एसएटी थाना 04
गोगरी 45
महेशखूंट 19
परबत्ता 44
मरैया 08
पौरा 04
पसराहा 07
बेलदौर 18
भरतखंड 03
कुल संख्या 329
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