मानव व्यापार का बदलता स्वरूप गंभीर चुनौती: पीएम नायर

Updated at : 13 Mar 2026 9:56 PM (IST)
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मानव व्यापार का बदलता स्वरूप गंभीर चुनौती: पीएम नायर

मानव व्यापार का बदलता स्वरूप गंभीर चुनौती: पीएम नायर

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डिजिटल माध्यम से बढ़ते मानव व्यापार विषय पर पूर्णिया प्रमंडल स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित कटिहार बिहार पुलिस मुख्यालय पटना के अपराध अनुसंधान विभाग एवं कमजोर वर्ग प्रभाग के निर्देश के आलोक में शुक्रवार को शहर के मिरचाईबाड़ी स्थित एक होटल में सामाजिक संस्था भूमिका विहार की ओर से ””सीमांचल के सीमावर्ती इलाकों में डिजिटल माध्यमों से बढ़ते मानव व्यापार”” विषय पर एक महत्वपूर्ण पूर्णिया प्रमंडल स्तरीय समन्वय बैठक चन्द्रगुप्त इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट पटना के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित की गयी. कार्यक्रम के अंत में भूमिका विहार की निदेशिका शिल्पी सिंह ने सभी मुख्य अतिथियों, पुलिस विभाग के अधिकारियों, प्रतिभागियों तथा सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि मानव व्यापार जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए सभी विभागों के अधिकारीयों और समाज के सामूहिक प्रयास आवश्यक है. कार्यक्रम में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) पूर्व महानिदेशक व पूर्व निदेशक नेशनल रिसर्च ऑन ह्यूमन ट्रैफिकिंग, इंडिया और चेयर प्रोफेसर, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (टीआईएसएस) पीएम नायर ने बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने कहा कि मानव व्यापार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अब डिजिटल माध्यम इसके नये रास्ते बन रहे है. उन्होंने बताया कि बिहार में वर्ष 2022 में मानव व्यापार के 260 मामले दर्ज हुए. जबकि वर्ष 2023 में 132 मामलों में 510 पीड़ितों की पहचान हुई. जिनमें 353 बच्चे थे. इंटरनेट, सोशल मीडिया और फर्जी ऑनलाइन नौकरी के प्रस्तावों के माध्यम से तस्कर युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं. इस चुनौती से निपटने के लिए पुलिस, प्रशासन और समाज के बीच मजबूत समन्वय अत्यंत आवश्यक है. चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान पटना के निदेशक प्रो राणा सिंह ने कहा कि मानव व्यापार के पीछे गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी और जागरूकता की कमी जैसे सामाजिक कारण प्रमुख है. तस्कर इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाकर बच्चों और युवाओं को बेहतर जीवन और रोजगार का लालच देकर अपने जाल में फंसाते है. डिजिटल माध्यम से मानव तस्करी गंभीर चुनौती: डीआईजी डीआईजी मधुकर अमिताभ ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव व्यापार एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बनता जा रहा है और डिजिटल माध्यमों के कारण तस्करी के तरीके और जटिल हो गए है. इसलिए सीमा सुरक्षा बल, पुलिस और स्थानीय समुदाय के बीच मजबूत समन्वय अत्यंत आवश्यक है. जिला विधिक प्राधिकार के सचिव कमलेश सिंह देव ने कहा कि मानव व्यापार एक गंभीर अपराध है और इसके विरुद्ध भारत में कई सख्त कानून मौजूद है. डीएसपी सद्दाम हुसैन ने कहा कि मानव व्यापार एक संगठित अपराध के रूप में सामने आ रहा है और इसमें परिवहन मार्ग, बस स्टैंड तथा रेलवे स्टेशन जैसी जगहें महत्वपूर्ण कड़ी बन जाती है.ऐसे में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, सतर्क निगरानी और समय पर कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है. ताकि इस अपराध पर प्रभावी रोक लगाई जा सके. पुलिस उप महानिरीक्षक, सेक्टर मुख्यालय सशस्त्र सीमा बल, पूर्णिया मधुकर अमिताभ, कमांडेंट संजीव कुमार, चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान पटना के निदेशक प्रो राणा सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के सचिव कमलेश सिंह देव, सिविल सर्जन डॉ जितेन्द्र नारायण सिंब, जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक रवि शंकर तिवारी, तथा पुलिस उपाधीक्षक (यातायात) सद्दाम हुसैन सहित कई अतिथि एवं विशेषज्ञ उपस्थित थे. इस बैठक में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया. जिनमें सीमांचल क्षेत्र के कटिहार, अररिया, पूर्णिया एवं किशनगंज जिलों से बिहार पुलिस के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मी शामिल थे. विशेष रूप से बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी (सीडब्ल्यूपीओ) तथा विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) के प्रतिनिधियों के साथ-साथ बाल संरक्षण से जुड़े अन्य हितधारकों ने सक्रिय भागीदारी निभायी.

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