रमजानुल मुबारक का तीसरा जुमा अकीदत से अदा की

रमजानुल मुबारक का तीसरा जुमा अकीदत से अदा की
बलिया बेलौन इबादत का महिना रमजानुल मुबारक का 20 वीं रोजा के मौके पर तीसरी जुमा की नमाज लोगों ने अकीदत के साथ अदा किये. जुमा की नमाज के दौरान तकरीर करते हुए जाये मस्जिद रघुनाथपुर के इमाम साहब मौलाना मेराज आलम ने कहा की रोजा के बदले अल्लाह रब्बुल इज्जत अपने बंदों को दोजख की आग से हिफाजत फरमाते हैं. इस लिए सभी लोगों को रोजा पाबंदी से रखने की गुजारिश करते हुए कहा की जिस ने भी बिना किसी वजह के रमजान का रोजा छोड़ता है तो उस पर अजाब नाजिल होता है. लोगों को एक भी रोजा नहीं छोड़नी चाहिए. रोजेदार को जन्नत नसीब होगी, रोजा रखने से इमान ताजा होता है. रोजेदार का गुनाह माफ कर दिया जाता है. उनकी मगफिरत होती हे. रोजा रखने से सेहत भी अच्छा रहता है. परहेज़गारी पैदा होती है. इमाम साहब ने कहा की बच्चों को रोजा और नमाज के लिए कहना चाहिए. बच्चे जब सात साल का हो जाते तो उसे नमाज और रोजा की ताकीद करनी चाहिए. 11 साल की उम्र में नमाज और रोजा के लिए सख्ती करनी चाहिए. 14 सिर के उम्र में उस पर रोजा और नमाज फर्ज हो जाता है. रोजे की फजीलत बताते हुए कहा की रोजा इनसान को तक्वा और परहेज़गार बनाता है. रोजा रखने वालों पर अल्लाह पाक की रहमत बरसती है. लोगों को चाहिए की रमजानुल मुबारक का तीसों रोजा रख कर अल्लाह रब्बुल इज्जत की खुब इबादत करें. इस माह की इबादत का शवाब कई गुणा बढ़ा दी जाती है.
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