कदवा के दुर्गागंज दुर्गामंदिर 115 वर्ष है पुराना, श्रद्धालुओं की उमड़ती है भीड़

Updated at : 27 Sep 2025 6:31 PM (IST)
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कदवा के दुर्गागंज दुर्गामंदिर 115 वर्ष है पुराना, श्रद्धालुओं की उमड़ती है भीड़

कदवा के दुर्गागंज दुर्गामंदिर 115 वर्ष है पुराना, श्रद्धालुओं की उमड़ती है भीड़

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कदवा प्रखंड क्षेत्र के दुर्गागंज स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर इस क्षेत्र के दुर्गा मंदिरों में सबसे पुराना मंदिर है. इस मंदिर का इतिहास 115 वर्ष पुराना है. मंदिर से लोगों को बड़ी ही आस्था है. क्योंकि इस मंदिर में सच्चे मन से जो भी मनोकामना लेकर भक्त आते है. उनकी मनोकामना मां दुर्गा पूरी करती है. शारदीय दुर्गापूजा के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. इस मेले में मां दुर्गा की पूजा अर्चना करने दूर दराज से लोग आते है. मेला का भी लुत्फ उठाते है. इस मंदिर की स्थापना 1908 में मालद्वार स्टेट के राज परिवार द्वारा दान में दी गयी जमीन पर मंदिर का निर्माण कर दुर्गा पूजा की शुरुआत की गई थी. यह पूजा दुर्गागंज स्टेट के राज परिवार द्वारा ही कराया जाता था. पूजा का सारा खर्च भी परिवार के द्वारा ही किया जाता था. वर्ष 2002 में इस मंदिर को सार्वजनिक कर दिया गया. जिसके बाद अब जो भी भक्त मंदिर के लिए चंदा स्वरूप जो कुछ दान स्वरूप देना चाहे दे सकते है. लेकिन अभी भी दुर्गागंज गांव का जितना भी परिवार है चंदा वही देते हैं. उस गांव के बच्चे जो बाहर भी रहते है. अपनी कमाई में से मां दुर्गा के लिए अवश्य कुछ न कुछ भेजते है. फुर्सत निकालकर दो दिनों के लिए भी पूजा में अवश्य गांव आते है. पुष्पांजलि के समय तथा संध्या आरती व दीप जलाने के वक्त यहां सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार झा जो कि 2016 से इस पद पर ने बताया कि इस मंदिर की महिमा अपरंपार है. मंदिर में सच्चे मन से जो भी श्रद्धालु मन्नत मांगते है. उनकी मन्नत अवश्य ही पूरी होती है. यहां मन्नत पूरी होने पर सोने के आभूषण चढ़ाये जाते है. मंदिर में मां दुर्गा की पूजा विशेष तांत्रिक विधि से की जाती है. यहां विशेषकर भक्त मिठाई के अलावा माता को छागर का भी भोग चढ़ाते है. यहां अष्टमी एवं नौवमी तिथि को भक्तों की मनता वाला प्रसाद के लिए नम्बर लगाना पड़ता है. मंदिर के पंडित ललित झा ने बताया की यहां 20 वर्षों से अधिक समय से पूजा कर रहा हूं. यहां सच्चे मन से मांगी हुई हर मुराद पूरी होती है. यहां दूर दराज से भक्त आते है. जिनकी मन्नत पूरी होती है. पाठा का भोग चढ़ाते है. यहां भक्तों कि भीड़ लगी रहती है. पूजा के दरम्यान कमेटी के सचिव अरुण कुमार मित्रा, अध्यक्ष मिथिलेश कुमार झा, उपाध्याय उग्रनाथ मिश्रा, अशोक झा, कोषाध्यक्ष विश्व गोपाल झा, मनीष गोपाल झा का योगदान सराहनीय है.

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