गेड़ाबाड़ी बस्ती विद्यालय तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं
Published by : RAJKISHOR K Updated At : 20 May 2026 5:19 PM
गेड़ाबाड़ी बस्ती विद्यालय तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं
– पगडंडी से आवागमन करते हैं बच्बचे, बरसात में बच्चों की राह बन जाती है खतरे का सफर कोढ़ा कोढ़ा नगर पंचायत वार्ड संख्या तीन स्थित प्राथमिक विद्यालय गेड़ाबाड़ी बस्ती आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव का दर्द झेल रहा है. शिक्षा के अधिकार और सरकारी दावों के बीच यह विद्यालय ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है. जहां मासूम बच्चे हर दिन जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. विद्यालय भवन तो बना दिया गया, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए आज तक पक्की सड़क नहीं बन सकी. नतीजा यह है कि छोटे-छोटे बच्चे खेतों के बीच बनी पगडंडियों और जंगलनुमा रास्तों से होकर स्कूल पहुंचते हैं. सुबह होते ही बच्चों का संघर्ष शुरू हो जाता है. कोई फिसलन भरे रास्ते से गुजरता है तो कोई पानी भरे खेतों के किनारे संतुलन बनाकर चलता है. बरसात के दिनों में हालात और भयावह हो जाते हैं. कीचड़, जलजमाव और फिसलन के कारण कई बार बच्चे रास्ते में गिरकर चोटिल हो जाते हैं. अभिभावकों ने कहा, बारिश के मौसम में बच्चों को स्कूल भेजना उनके लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं होता. ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार ने सिर्फ भवन निर्माण कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, लेकिन बच्चों की सुरक्षा और सुविधा की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया. स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा केवल स्कूल खोल देने से पूरी नहीं होती, बल्कि वहां तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है. अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. उनका कहना है कि हर दिन यह डर बना रहता है कि कहीं रास्ते में कोई बड़ा हादसा न हो जाए. कई परिवार ऐसे भी हैं जो खराब रास्ते के कारण बरसात में बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर देते हैं. इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उपस्थिति पर पड़ रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला. सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई. इससे लोगों में भारी आक्रोश है. लोगों ने कहा, यदि समय रहते सड़क नहीं बनी, तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है. बुद्धिजीवियों ने भी सवाल उठाया है कि जब सरकार बच्चों को शिक्षा का अधिकार देने की बात करती है, तो क्या सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना उसकी जिम्मेदारी नहीं है. खेतों और कीचड़ के बीच से होकर स्कूल पहुंचना आखिर कब तक मासूम बच्चों की मजबूरी बना रहेगा. अब लोगों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं. ग्रामीणों ने मांग की है कि अविलंब विद्यालय तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल सके.
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