Katihar news : सेब, ड्रैगन फ्रूट व अंजीर की मिश्रित खेती दे रही मुनाफा

Katihar news : अंजीत ने सेब, अंजीर, ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, तरबूज, नाशपाती, बेर, परसीमन जापानी फल, आंवला, टमाटर आदि की मिश्रित खेती शुरू की है.
Katihar news : कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड क्षेत्र के भटवारा गांव के किसान अंजीत कुमार मंडल खेती में नयी लकीर खींच रहे हैं. भटवारा के अंजीत कुमार मंडल ने सेब, अंजीर, ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, तरबूज, नाशपाती, बेर, परसीमन जापानी फल, आंवला, टमाटर आदि की मिश्रित खेती शुरू की है.
एक एकड़ में की है ड्रैगन फ्रूट की खेती
कोढ़ा के भटवारा के किसान खेती किसानी में नये-नये प्रयोग कर अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं. केला खेती के लिए प्रसिद्ध कोढ़ा प्रखंड में महज 10 वर्ष पूर्व पनामा बिल्ट नामक रोग लगने के कारण प्रखंड क्षेत्र में केला खेती का रकबा घटने के बाद लोग मक्का खेती की तरफ मुड़े.अंजीत कुमार मंडल यूट्यूब से वीडियो देख कर सेब की खेती शुरू किये. सेब की खेती में मुनाफा होने के बाद उसी खेत में अब वे मिश्रित खेती करने लगे हैं. इस मिश्रित खेती में अब वे ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू किये हैं. हालांकि उन्होंने अभी एक एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरुआत की है. इससे उन्हें अंदाजा लगा कि ड्रैगन फ्रूट की खेती कर आर्थिक समृद्धि की ओर बढ़ा जा सकता है.
अब कोढ़ा में भी हो रही है सेब की खेती
अब कश्मीर व हिमाचल की तरह कोढ़ा के भटवारा में भी सेब की खेती शुरू हो गयी है. कटिहार जिले में इसकी शुरुआत करनेवाले युवा अंजीत कुमार मंडल यहां के किसानों के लिए एक उदाहरण बने हैं.अंजीत ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के विलासपुर से सेब के 230 पौधे लाकर एक एकड़ जमीन में लगाये हैं. पहले सेब के कुछ पौधों को लगाकर ट्रायल किया था. नतीजा अच्छा मिलने पर साल 2021 में उन्होंने इसकी खेती करने का फैसला किया.
पांच लाख सालाना कमा रहे
किसान अंजीत कुमार मंडल ने बताया कि वे अपने सेब के बगान में ही मिश्रित खेती कर रहे हैं. इसमें टेलिस मीटर के माध्यम से एक एकड़ में ड्रैगन व सेब की खेती कर रहे हैं. खेत की मेड़ पर तरबूज के अलावा, प्लांट इंटर क्रॉप के तहत स्ट्रॉबेरी, अंजीर, नाशपाती, बेर, टमाटर, ओल, जापानी फल परसीमन की खेती भी कर रहे हैं. ड्रैगन फ्रूट तीन सौ से लेकर चार सौ रुपये तक प्रति किलो बिक जाता है.मिश्रित खेती से वे करीब पांच लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं.
सेब व ड्रैगन फ्रूट की खेती कर लाखों कमा रहे
प्रखंड क्षेत्र के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में पिछले चार वर्षों से सेब की खेती व ड्रैगन फ्रूट की खेती कर अंजीत अब तक करीब लाखों रुपये मुनाफा कमा चुके हैं. वह करीब 25 एकड़ में मक्का, गेहूं, सरसों दलहन व तिलहन, आलू की खेती भी करते हैं. इस खेती में मेहनत भी ज्यादा है, पर मेहनत के मुताबिक मुनाफा ज्यादा नहीं है. पर, सेब व ड्रैगन फ्रूट की खेती में मेहनत कम और लागत भी बहुत है. पर, मुनाफा बहुत ज्यादा है. इसलिए और लोगों को भी परंपरागत खेती को छोड़कर सेब, ड्रैगन फ्रूट, स्ट्राॅबेरी, ओल, तरबूज, अंजीर, नाशपाती, बेर, आंवला, टमाटर, व जापानी फल परसीमन की मिश्रित खेती करनी चाहिए.
एक वर्ष में तीन बार होता है फलन
अंजीत ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट के पौधे की कीमत 180 से 200 रुपये प्रति पौधा है. टेलिस मीटर के माध्यम से खेती की जाती है. हालांकि इसमें सीमेंट के खंभे का भी इस्तेमाल किया जाता है. उनके प्लांट में चार हजार पौधे ड्रैगन फ्रूट के लगाये गये हैं. 150 से अधिक सेब के पौधे, मेड़ पर तरबूज व सेब व ड्रैगन फ्रूट के बीच में बची जगह में अंजीर, बेर, स्ट्रावेरी, ओल, टमाटर, नाशपाती, आंवला व जापानी फल परसीमन की खेती कर रहे हैं. ड्रैगन फ्रूट के पौधे में फूल आने के बाद सवा से डेढ़ महीना में फल तैयार हो जाता है. एक फल का मिनिमम वजन 300 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक होता है. फल टूटने के बाद फिर फूल आना शुरू होता है. एक वर्ष में लगातार तीन बार फलन होता है.
ड्रैगन फ्रूट के लिए यहां की मिट्टी उपयुक्त
बीएओ नवीन कुमार ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए तापमान सामान्य व दोमट तथा बालू मिश्रित खेतों की आवश्यकता होती है. यहां की मिट्टी इसके लिए उपयुक्त है तथा इसकी खेती क्षेत्र में सफलता पूर्वक की जा सकती है. उन्होंने बताया कि किसान खेत में मिश्रित खेती कर आत्मनिर्भर हो रहे हैं. उनसे अन्य किसानों को भी सीख लेनी चाहिए.
ड्रैगन फ्रूट औषधीय गुणों से भरपुर
कोढ़ा पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अमित आर्य ने कहा कि ड्रैगन फ्रूट में काफी औषधीय गुण होते हैं. इसमें विटामिन ए, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस भरपूर मात्रा में पाया जाता है. ड्रैगन फ्रूट कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर को कम करने के साथ-साथ वजन घटाने में भी मददगार है. खासकर खून की कमी वाले लोगों को यह फल खाना चाहिए. साथ ही लिवर एवं किडनी के रोगियों के लिए भी यह काफी फायदेमंद है.
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By Sharat Chandra Tripathi
Sharat Chandra Tripathi is a contributor at Prabhat Khabar.
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