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अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई

Updated at : 11 Jul 2024 10:34 PM (IST)
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Electoral Roll Revision

फेस अटेंडेंस हटाने व समान काम समान वेतन का कर रहे हैं मांग

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कटिहार. नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत कर्मियों को फेस अटेंडेंस बनाने के निर्देश के बाद कर्मियों के हड़ताल पर जाने से पूरे जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी है. फेस अटेंडेंस के विरोध में तथा समान काम समान वेतन की मांग को लेकर एनएचएम कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये हैं. संविदा पर कार्यरत एएनएम और कर्मियों के हड़ताल पर जाने से जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था काफी प्रभावित हो गयी है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हो या सुदूर इलाका जहां पर मरीजों को स्वास्थ्य व्यवस्था मिल रही थी. वह कर्मियों के हड़ताल पर जाने के कारण ठप पड़ गया है. जिले में संविदा एएनएम 305 कार्यरत है. जो नियमित एएनएम के आसपास है. नियमित एएनएम की बात करें तो 314 एएनएम पूरे जिले में कार्यरत है. इसके अलावा संविदा पर 41 जीएनएम भी अपनी सेवा दे रही है. लेकिन इन सभी के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से इसका सीधा असर जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ा है. हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपना पल्ला झाड़ रहे हो कि उनके हड़ताल पर जाने से कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा. लेकिन सच्चाई यह है कि संविदा एएनएम के हड़ताल पर जाने से इनका पूरा प्रभाव मरीज के उपचार पर पड़ा है. ग्रामीण क्षेत्र का स्वास्थ्य व्यवस्था खासकर इन संविदा कर्मियों के ऊपर ही ज्यादातर निर्भर करती है. लेकिन इसके हड़ताल पर जाने से ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों की परेशानी काफी बढ़ गई है. इसके अलावा एएनएम के हड़ताल पर जाने के साथ नियमित टीकाकरण पर भी इनका पूरा प्रभाव पड़ा है. जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडल अस्पताल में संविदा एएनएम अपनी सेवा दे रही है. लेकिन उनके हड़ताल पर जाने से बच्चों के नियमित टीकाकरण पर इनका पूरा प्रभाव पड़ा है. आंगनबाड़ी में मिलने वाली निमित टीकाकरण को लेकर भी संविदा कर्मियों के हड़ताल पर रहने से यह काफी हद तक बाधित हो गया है. संविदा एएनएम के हड़ताल पर रहने से नियमित एएनएम पर काम का भार बढ़ गया है. सीधे तौर पर कहे तो जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है. जिसको अभी जैसे तैसे माइनेज कर कर मरीज को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. संविदा एएनएम की संख्या से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में 305 संविदा एएनएम है. जबकि 41 जीएनएम है. उनके काम नहीं करने से उनके द्वारा किया जा रहा काम बाधित हो गया है. जिसका सीधा असर मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ा है.

फेस अटेंडेंस हटाने व समान काम समान वेतन का कर रहे हैं मांग

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विभागीय निर्देश के आलोक में एनएचएम कर्मियों को फेस अटेंडेंस बनाने का निर्देश दिया गया है. ऐसे में सिर्फ संविदा कर्मियों को फेस अटेंडेंस बनाने के नियम को लेकर सभी संविदा कर्मी पहले तो इनका पुरजोर विरोध किये. अब यह विरोध अनिश्चितकालीन हड़ताल मैं तब्दील हो गया है. संविदा एएनएम की माने तो नियमित एएनएम जितने हैं. इन पर यह फेस अटेंडेंस लागू नहीं किया गया है. जबकि सभी का कहना है कि नियमित एएनएम हो या संविदा पर कार्यरत एएनएम दोनों काम बराबरी का करते हैं. इसके बावजूद भी दोनों के वेतन में जमीन आसमान का अंतर है. संविदा एएनएम ने कहा कि नियमित एएनएम की सैलरी से एक तिहाई पर हमें काम करना पड़ता है. जबकि जितना कम नियमित एएनएम करती है. उतना काम हम भी करते हैं. इसके अलावा संविदा कर्मियों की मांग है कि सुदूर इलाकों में हम अपनी सेवा देते हैं. ऐसे में वहां पर मूलभूत सुविधाएं होने चाहिए. जिसमें बिजली, पीने का पानी, शौचालय आदि की व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए. संविदा एएनएम का कहना है कि यह नियम सभी के लिए समान लागू किया जाय. अन्यथा इन्हें वापस लिया जाय. यदि ऐसा नहीं होता है तो यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगा.

कहते हैं सिविल सर्जन

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सिविल सर्जन डॉ जितेंद्र नाथ सिंह ने बताया कि संविदा कर्मियों के हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था में थोड़ी परेशानी हुई है. नियमित कर्मियों से कम लिया जा रहा है. ऐसे संविदा कर्मी जो हड़ताल पर है. उनकी पूरी सूची विभाग को भेजी जा रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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