बेबी कॉर्न की खेती कर नजीर पेश कर रहे किसान

Published by :RAJKISHOR K
Published at :23 Mar 2025 7:08 PM (IST)
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बेबी कॉर्न की खेती कर नजीर पेश कर रहे किसान

बेबी कॉर्न की खेती कर नजीर पेश कर रहे किसान

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– पौने बीघा में तैयार बेबी कॉर्न से आय कर रहे दोगुनी, किसानों को कर रहे प्रेरित – बाजार उपलब्ध को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से क्रय को कर कृषि विभाग अपील सरोज कुमार, कटिहार पहली बार बेबी कॉर्न की खेती कर किसानी में दलन पूरब पंचायत के किसान रविशंकर श्रवणे नजीर बन गये हैं. नवाचार के रूप में प्रयोग कर पौने बीघा में तैयार बेबी कॉर्न से दोगुनी आय कर दूसरे किसानों के लिए प्रेरणाश्रोत बने हुए हैं. फसल हार्वेस्टिंग के दौरान हो रही आमदनी से दूसरे किसानों को इसकी खेती वृहत पैमाने पर करने की अपील कर रहे हैं. बेबीकाॅर्न खेती को लेकर किसान रविशंकर श्रवणे बताते हैं कि रबी, खरीफ किसी भी मौसम में खेती की जा सकती है. यूं कहे कि खाली समय यथा गेहूं, आलू की फसल निकलने के बाद भी इसे लगाया जा सकता है. बेबीकॉर्न तीन माह अवधि वाली फसल है. इसकी खेती किसी भी जलवायु में किया जा सकता है. एक एकड़ में आठ से दस किलो बीज लगाया जा सकता है. रबी मौसम में सीधी लाइन में रोपा जा सकता है. बीच की दूरी 45 से 50 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी दस से 12 सेंटीमीटर, खरीफ में लाइन से लाइन की दूरी साठ सीएम व पौधे से पौधे की दूरी दस से पन्द्रह सेंटीमीटर नर पुष्प निकलने के करीब तीन दिन बाद मादा पुष्प निकलता है. एक सप्ताह तक इसकी कटाई कर लेनी चाहिए. बेबीकॉर्न को लेकर बताते हैं कि इसके कई तरह के लजीज व्यंजन बनाया जाता है. जिसमें पकौड़ा, सब्जी, खीर से लेकर मैगी की तरह स्वादिष्ट व्यंजन के रूप में उपयोग किया जाता है. पूरी तरह से जैविक खेती के कारण इससे हानि नहीं के बराबर होती है. इसका डिमांड होटलों, रेस्टूरेंटों में अधिक होते हैं. किसान रविशंकर श्रवणे का कहना है कि विभाग अगर इसके लिए बाजार उपलब्ध कराता है तो किसान समृद्ध होंगे. ऐसा इसलिए कि कम समय और कम मेहनत से इसकी खेती की जा सकती है. सहायक निदेशक पौधा संरक्षण सुदामा ठाकुर का कहना है कि नवाचार के रूप में पहली बार बेबी कॉर्न की खेती उपयोग के तौर पर की गयी है. रबी मौसम में जिले भर में दो एकड़ में प्रयोग किया गया था. जबकि गरमा मौसम में विभाग को 25 एकड़ का लक्ष्य प्राप्त है. कई बीमारियों में लाभदायक साबित होता है बेबीकॉर्न शहर के विनोदपुर स्थित फिजिशियन डॉ संजय तिवारी का कहना है कि स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से बेबीकॉर्न काफी बेहतर सिद्ध होता है. इसका उपयोग कई बीमारियों में लाभदायक है. सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. कब्ज को दूर करने, हाईब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने, आंखों के लिए बेहतर साबित होता है. उपयोग से एनीमिया से भी बचाव किया जा सकता है. इतना ही नहीं कई अन्य बीमारियों में यह रामबाण का कार्य करता है. जरूरत है कृषि विभाग व प्रशासन के स्तर से इसके बाजार को उपलब्ध कराने की. ताकि जिले में वृहत पैमाने पर किसान खेती कर सकें. इससे किसान आय की दृष्टिकोण से भी मजबूत होंगे. किसानों को प्रोत्साहित करने की है जरूरत जिला पदाधिकारी के निर्देश पर दलन पूरब पंचायत सिरसा में नवाचार प्रयोग के तहत बेबीकॉर्न मक्का फसल की शुरूआत रविशंकर श्रवणे द्वारा की गयी है. फसल हार्वेस्टिंग स्टेज में है और स्थानीय बाज़ार में खपत बेहद कम है. बाजार आसानी से उपलब्ध हो इस पर जोर दिये जाने की जरूरत है. जिला कृषि पदाधिकारी मिथिलेश कुमार ने बताया कि किसानों को इसकी खेती को लेकर प्रोत्साहित करने की जरूरत है. सभी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपील किया गया है कि बेबी कॉर्न के किसानों को प्रोत्साहित करने एवं इससे लज़ीज़ व्यंजन तैयार करने को बेबी कॉर्न किसान से सम्पर्क कर इस्तेमाल किया जाये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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