कुरसेला का उत्तरवाहिनी त्रिमोहनी संगम तट पर माघ पूर्णिमा में श्रद्धालुओं की उमड़ेगी भीड़

Updated at : 08 Feb 2025 7:22 PM (IST)
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कुरसेला का उत्तरवाहिनी त्रिमोहनी संगम तट पर माघ पूर्णिमा में श्रद्धालुओं की उमड़ेगी भीड़

संगम व कुंभ स्नान की आस्था रखकर माघी पूर्णिमा पर कुरसेला के त्रिमोहनी संगम के उत्तरवाहिनी तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है.

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कुरसेला. संगम व कुंभ स्नान की आस्था रखकर माघी पूर्णिमा पर कुरसेला के त्रिमोहनी संगम के उत्तरवाहिनी तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है. संगम बाबा ने गंगा स्नान को आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा में कई कार्य करने की जानकारी दी है. धार्मिक रूप से माघी पूर्णिमा पर गंगा स्नान को पुण्यदायी माना गया है. वेद ग्रंथों में वर्णित संगम उत्तरवाहिनी गंगा स्नान को पाप हरनी मोक्षदायिनी माना जाता है. ऐसे स्थलों पर जप तप ध्यान साधना गंगा सेवन और स्नान विशेष रूप से फलदायी समझा जाता हैं. भारतवर्ष में ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयाग, काशी, सुल्तानगंज व कुरसेला का त्रिमोहनी संगम का तट उत्तरवाहिनी गंगा के रुप में जाना जाता है. अन्य उत्तरवाहिनी तटों के अनुरूप कुरसेला के उत्तरवाहिनी तट के महत्ता को प्रसिद्धि नहीं मिल सकी है. कोसी नदी और कलबलिया नदी की धारा है. यहां गंगा नदी से संगम करती है. यहां गंगा नदी दक्षिण दिशा से उत्तर दिशा में प्रवाहित होती है. सूर्योदय की किरणें सीधे गंगा की लहरों पर पड़ती है. जिससे प्रकृति के अनुपम दृश्य उपस्थित हो उठता है. नेपाल से निकलने वाली कोसी के सप्त धाराओं में एक सीमांचल क्षेत्र के कई जिलों से गुजरते हुए यहां आकर गंगा नदी से संगम कर वजूद खो देती है. कलबलिया नदी की एक छोटी सी धारा इस उत्तरवाहिनी गंगा तट से मिलकर संगम करती है. गंगा नदी पार दूसरे छोर पर पहाड़ों के बीच बाबा बटेश्वर नाथ का प्रसिद्ध पौराणिक मंदिर है. धार्मिक रूप से उत्तर वाहिनी गंगा का यह तट उप काशी का क्षेत्र समझा जाता है. इस बाबत संगम बाबा कहते हैं कि सवा हाथ धरती के कम पड़ने से यह क्षेत्र काशी नहीं बन सका. पुण्य भूमि काशी की सारी धार्मिक स्थितियां यहां विद्यमान है. बाबा ने खुद का जीवन गंगा मैया के नाम समर्पण कर इस स्थल के समीप रावणेश्वर कामना लिंग स्थापना के लिए मंदिर का निर्माण कर रहे है. इस मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है. इस तट के ख्याति के लिए संगम बाबा अनवरत प्रचार में जुटे हैं. मंदिर क्षेत्र को बाबा ने सुंदर नगरम का नाम दिया है.

पावन ऐतिहासिक स्थल

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मृत्यु उपरांत उनके अस्थि को देश के अन्य संगम तटों के साथ गंगा के इस त्रिमोहनी संगम पर विसर्जित किया गया था. जिसके स्मृति में पर यहां भव्य कृषि मेला लगा करता था. बापू के अस्थि के प्रवाहित होने से इस स्थल का धार्मिक आस्थाओं के साथ ऐतिहासिक रूप से पहचान कायम है. पूर्व विधायक नीरज कुमार के पहल से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्मृति के रुप मे राज्य सरकार ने इस स्थल को एतहासिक रुप से पर्यटन केन्द्र के रुप में शामिल करने का कार्य किया है. नेशनल हाईवे से सीधे संगम के पर्यटन स्थल तक सड़क निर्माण का कार्य किया गया है. बाढ़ में डूबने से सड़क की स्थिति जर्जर हो चुकी है. सार्थक प्रयास से धार्मिक एतिहासक स्थल के रूप में पर्यटन के लिए इस क्षेत्र को ख्याति मिल सकती है.

बंदरगाह व पर्यटन बनने के आसार

रेल और सड़क सुविधाओं के आसपास होने से जल परिवहन के लिए इस स्थल को बंदरगाह के रूप में प्रयोग में लाने की संभावनाएं छिपी है. जल परिवहन व्यवस्था से इसे देश की व्यापारिक महानगरों से जोड़ा जा सकता है. सड़क रेल यातायात व्यवस्था को तट के करीब पहुंचा कर एक बेहतर बंदरगाह के रूप में कार्य किया जा सकता है. पर्यटन क्षेत्र में उप नदियों और छारन झीलों, नौका विहार का पर्यटन का विकल्प मौजूद हैं. गंगा तट का मनोरम तटीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है.

गंगा स्नान पर उमड़ती है भीड़

कार्तिक व माघी पूर्णिमा के साथ अन्य धार्मिक अवसरों पर त्रिमोहनी उत्तरवाहिनी संगम तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. तट पर जप साधना गंगा स्नान और सेवन कर श्रद्धालु पुण्य बटोरने का कार्य करते है. माघी पूर्णिमा पर सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, पूर्णिया सीमावर्ती भागलपुर जिले के हजारों श्रद्धालु यहां गंगा स्नान को आया करते है. यज्ञ के साथ तट पर कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान होता है. इस स्थल से तकरीबन तीन किमी के दूरी पर सीमावर्ती जिला के तीनटेंगा मेंं माघी पूर्णिमा पर भव्य मेला लगता है.

पावन स्थल है त्रिमोहनी का संगम तट

कवि विद्यापति की गंगा पर की गयी रचना बड़ सुखसार पउल तहू तीरे छोड़ईत निकट नयन बह नीरे कि करब जप तप योग ध्याने जन्म कृतार्थ एक ही स्नाने गंगा के पवित्रता पर सटीक बैठती है. माघी पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिये त्रिमोहनी संगम उत्तरवाहिनी तट पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है. संगम स्थल पर राष्ट्रपतिता महात्मा गांधी का स्मृति में स्थल के निर्माण के अलावा श्रद्धालुओं के सुविधा मे गंगा तट पर सिढ़ी घाट धूप, बारिश से सुरक्षा के लिए शेड धर्मशाला का निर्माण नहीं हो पाया है. त्रिमोहनी संगम गंगा तट तक एनएच 31 से सुगम सड़क साधन का सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाया है. गंगा तट तक सड़क निर्माण होने के बाद पहली बाढ़ से सड़क क्षतिग्रस्त हो गया है.

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