Aravalli Mining Case: अरावली खनन मामले में 'सुप्रीम' रोक, फैसले का भूपेंद्र यादव ने किया स्वागत, कांग्रेस ने मांगा इस्तीफा
Published by : Pritish Sahay Updated At : 29 Dec 2025 5:23 PM
अरावली खनन मामले में 'सुप्रीम' रोक
Aravalli Mining Case: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट के अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं पर अपने पुराने फैसले पर रोक लगाने का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि सरकार इसके संरक्षण और बहाली के लिए प्रतिबद्ध है. इधर कांग्रेस ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से इस्तीफे की मांग की है.
Aravalli Mining Case: अरावली खनन मामले (Aravalli Mining Case) में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (29 दिसंबर) को अपने पुराने फैसले पर रोक लगा दी है. कोर्ट के फैसले का केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्वागत किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट किया- मैं अरावली रेंज से जुड़े अपने आदेश पर रोक लगाने और मुद्दों का अध्ययन करने के लिए एक नई समिति बनाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्वागत करता हूं. हम अरावली रेंज की सुरक्षा और बहाली में MOEFCC से मांगी गई सभी सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. मौजूदा स्थिति के अनुसार, नए माइनिंग लीज या पुराने माइनिंग लीज के रिन्यूअल के संबंध में खनन पर पूरी तरह से रोक जारी है.”
उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने 20 नवंबर के फैसले में दिए गए निर्देशों को स्थगित कर दिया है, जिसमें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक समिति की सिफारिश पर अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं की एक समान परिभाषा को स्वीकार किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे की व्यापक और समग्र समीक्षा के लिए इस क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल कर एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा.
भूपेंद्र यादव तत्काल इस्तीफा दें, कांग्रेस ने की मांग
कांग्रेस ने अरावली पर्वतमाला की पुनर्परिभाषा से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए सोमवार को कहा कि अब पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए जो नई परिभाषा की बार -बार वकालत कर रहे थे. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप भी लगाया कि मोदी सरकार अरावली को बचाने का नहीं , बेचने का प्रयास कर रही है. रमेश ने कहा- कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करती है. मोदी सरकार ने की ओर से जिस तरह से परिभाषा बदलने की कोशिश की गई थी, उसका मकसद सिर्फ खनन की गतिविधियों, रियल स्टेट को बढ़ावा देना था. अरावली को पहले ही बहुत नुकसान हो चुका है, उसे और भी मुसीबत में डालने के लिए नई परिभाषा तय की गई. उन्होंने कहा कि हम मांग करते हैं कि पर्यावरण मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए जो इस नई परिभाषा की बार-बार वकालत कर रहे थे.
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फैसले पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (29 नवंबर) को अपने 20 नवंबर के फैसले में दिए गए उन निर्देशों को स्थगित रखने का आदेश दिया, जिसमें अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला की एक समान परिभाषा को स्वीकार किया गया था. भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाशकालीन पीठ ने इस मुद्दे की व्यापक और समग्र समीक्षा के लिए इस क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल कर एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा है. पीठ ने कहा- हम यह निर्देश देना आवश्यक समझते हैं कि समिति की ओर से प्रस्तुत सिफारिशों के साथ-साथ इस कोर्ट की ओर से 20 नवंबर, 2025 के फैसले में निर्धारित निष्कर्षों और निर्देशों को स्थगित रखा जाए. कोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर मामले को आगे की सुनवाई के लिए 21 जनवरी को सूचीबद्ध किया है. (इनपुट भाषा)
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