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गौशाला रेल ओवर ब्रिज के पिलरों में दिखाई दे रहीं दरारें

Updated at : 25 Feb 2026 7:30 PM (IST)
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गौशाला रेल ओवर ब्रिज के पिलरों में दिखाई दे रहीं दरारें

गौशाला रेल ओवर ब्रिज के पिलरों में दिखाई दे रहीं दरारें

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निर्माण में नियमों की अनदेखी, कार्य की गुणवत्ता पर भी उठ रहे सवालो – पानी का छिड़काव नहीं करने से उउ़ रहे धूल से स्थानीय लोग, बाइक चालक परेशान राणा सिंह, कटिहार शहर के गौशाला रेलवे फाटक पर निर्मित ओवरब्रिज वर्षों से निर्माणाधीन है. यदि निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप व गुणवत्ता के साथ होता, तो आज लोगों को रेलवे फाटक बंद रहने पर घंटों जाम में फंसकर इंतजार नहीं करना पड़ता. पहले कार्यरत एजेंसी की लापरवाही और शिथिलता के कारण निर्माण कार्य में काफी देरी हुई. अधूरे ओवरब्रिज का कार्य एक नई एजेंसी को सौंपा गया है. वर्तमान में एक एजेंसी को शेष निर्माण पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई है. ओवरब्रिज को अक्तूबर 2026 तक पूर्ण करने की तिथि निर्धारित की गई है. हालांकि निर्माण की मौजूदा स्थिति को देखकर निर्माण को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे है. ओवरब्रिज के नीचे बनाये गये पिलरों में दरारें दिखाई दे रही हैं. इन दरारों को छिपाने के लिए सीमेंट-बालू का प्लास्टर उनके ऊपर चढ़ा दिया है. लोगों का कहना है कि जिस पुल से प्रतिदिन सैकड़ों बड़ी-छोटी गाड़ियां गुजरेंगी उसमें इस तरह की खामियां भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी को आमंत्रण दे सकती हैं. गुणवत्तापूर्ण निर्माण की निगरानी के लिए जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. कई जनप्रतिनिधि ओवरब्रिज निर्माण का श्रेय लेने में आगे रहते हैं. लेकिन कार्य की गुणवत्ता जांचने स्थल पर शायद ही कभी नजर आते हैं. निर्माण कार्य के दौरान उड़ती धूल भी लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गई है. पुल निर्माण स्थल के आसपास चारों ओर धूल का गुबार छाया रहता है. रेलवे फाटक बंद होने पर जब दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लगती है और फाटक खुलते ही वाहनों की रैली गुजरती है. तो सड़क पर उड़ने वाली धूल स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है. कार्य एजेंसी द्वारा सड़क पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव नहीं किए जाने से स्थिति और खराब हो रही है. आसपास के व्यापारियों का कहना है कि धूल के कारण ग्राहकों की संख्या भी प्रभावित हो रही है. स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है. जबकि कार्य एजेंसी को धूल ना उड़े इसको लेकर समय-समय पर पानी का छिड़काव करते रहना है. एप्रोच सड़क निर्माण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पुल निर्माण से पहले दोनों ओर की एप्रोच सड़क को दुरुस्त और व्यवस्थित किया जाना था. सबसे गंभीर मुद्दा निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था का भी है. ओवरब्रिज निर्माण में लगे मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कार्य एजेंसी की लापरवाही स्पष्ट नजर आती है. अधिकांश मजदूर बिना हेलमेट, बिना सेफ्टी जूते और बिना ग्लव्स के कार्य करते देखे जा रहे हैं. भारी-भरकम लोहे के पैनल जेसीबी मशीन से उठाए जाते हैं और उन्हें सही स्थान पर फिट करने के दौरान मजदूर जोखिम भरी स्थिति में काम करते हैं. ऐसे में किसी भी समय दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. इस मामले में मजदूर को सुरक्षा सेफ्टी नही दिए जा रहे है. स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ओवरब्रिज निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच किया जाय. निर्माण स्थल पर धूल नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए जाएं तथा मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाय. यह ओवरब्रिज लोगों को सबसे ज्यादा जरूरत है. लेकिन इसकी मजबूती और सुरक्षा न केवल जिला प्रशासन बल्कि जनप्रतिनिधियों की भी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. कहते हैं साइड इंचार्ज इस संदर्भ में जब साइड इंचार्ज अंकित कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ओवरब्रिज निर्माण में गुणवत्ता को लेकर कोई समझौता नहीं किया जा रहा है. जब काम होता है. सभी मजदूरों को सुरक्षा सेफ्टी दी जाती है. पानी का छिड़काव समय पर किया जाता है.

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