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करोड़ों से बने सदर अस्पताल के नये भवन की दीवारों में आईं दरारें

Updated at : 09 Mar 2026 6:41 PM (IST)
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करोड़ों से बने सदर अस्पताल के नये भवन की दीवारों में आईं दरारें

करोड़ों से बने सदर अस्पताल के नये भवन की दीवारों में आईं दरारें

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कटिहार सदर अस्पताल परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से बने नये 100 बेड वाले अस्पताल भवन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. निर्माण के तीन वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं. लेकिन भवन की दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं. हैरानी की बात यह है कि इन दरारों की स्थायी मरम्मत करने के बजाय संवेदक द्वारा केवल पुट्टी लगाकर उन्हें छिपाने की कोशिश की जा रही है. बता दें सदर अस्पताल भवन के निर्माण के कुछ ही महीनों बाद दीवारों में दरारें और डैम पड़नी शुरू हो गई थी. उस समय भी संवेदक द्वारा पुट्टी व रंग-रोंगन कर दरारों को ढक दिया गया था. हालांकि समय बीतने के साथ ये दरारें फिर उभरकर सामने आ गयी और अब पहले से ज्यादा बड़ी और स्पष्ट नजर आने लगी हैं. वर्तमान स्थिति यह है कि इमरजेंसी भवन सहित कई हिस्सों में नीचे के फ्लोर से लेकर ऊपर के फ्लोर तक दीवारों पर दरारें साफ दिखाई दे रही हैं. अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के बीच भी इस स्थिति को लेकर चिंता का माहौल है. लोगों का कहना है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर अस्पताल भवन का निर्माण किया गया था. तब निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया. इसका परिणाम अब भवन की दीवारों में लगातार पड़ रही दरारों के रूप में सामने आ रहा है. लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार एजेंसी द्वारा समस्या की स्थायी मरम्मत करने के बजाय बार-बार पुट्टी लगाकर खामियों को छिपाने की कोशिश की जा रही है. भवन निर्माण के साथ-साथ संवेदक द्वारा अस्पताल को जो फर्नीचर और अन्य सामान उपलब्ध कराए गए थे. उनकी गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है. मरीजों के लिए लगाए गए बेड, लोहे की कुर्सियां और अन्य सामग्री एक साल के भीतर ही खराब होने लगी हैं. कई जगहों पर सामान टूट-फूट की स्थिति में पहुंच चुका है. जहां-जहां सामान खराब हो रहे हैं. वहां संवेदक द्वारा उन्हें बदलने के बजाय केवल मरम्मत या रंग-रोंगन कर दोबारा अस्पताल प्रशासन को सौंपने में लगे हुए है. जबकि नियमों के अनुसार जो सामान पूरी तरह खराब या टूट चुके हैं. उन्हें हटाकर नए सामान उपलब्ध कराना संवेदक की जिम्मेदारी है. ऐसे में करोड़ों रुपये की लागत से बने इस अस्पताल भवन में सामने आ रही खामियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है.

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RAJKISHOR K

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By RAJKISHOR K

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