मानसून के पूर्व शहर के अधिकांश नाले जाम, सिस्टम फेल

Updated at : 26 May 2025 8:04 PM (IST)
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मानसून के पूर्व शहर के अधिकांश नाले जाम, सिस्टम फेल

नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत 25 किलोमीटर नाला है. शहर में 325 किलोमीटर में नाला व सड़क इत्यादी का नेटवर्क है.

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बुडको फोबिया से ग्रसित नगर निगम, लाखों रुपये खर्च के बाद भी 40 प्रतिशत नालों की नहीं हुई सफाई

कटिहार. नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत 25 किलोमीटर नाला है. शहर में 325 किलोमीटर में नाला व सड़क इत्यादी का नेटवर्क है. नाला उड़ाही का कार्य दो तरीके से हर वर्ष होता है. पहला एनजीओ द्वारा 30 वार्ड में साफ-सफाई के लिए करीब 90 लाख रुपये हर माह खर्च की जाती है. जबकि दूसरा 15 वार्ड की साफ-सफाई नगर निगम की ओर से की जाती है. कुल मिलाकर करीब एक करोड़ प्रतिमाह साफ सफाई के नाम पर निगम की ओर से खर्च की जाती है. इस बोर्ड से पूर्व बिहार में स्वच्छ सीटी के रूप में कटिहार को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था. इसके एवज में बिहार सरकार ने 50 लाख रुपये अवार्ड किया था, वो भी राशि नाला उड़ाही में लगाया गया. इसके बाद भी 40 प्रतिशत नाला उड़ाही नहीं किया जा सका है. इस बरसात में अधिक बारिश की संभावना से शहरवासी से लेकर पार्षदों तक परेशान हैं. मानसून के पूर्व रुक-रुक कर हुई बारिश से शहर के सभी पुराने नाले जाम हैं. ड्रेनेज के नाम पर सिस्टम पूरी तरह से फेल है. रविवार की दोपहर हुई झमाझम बारिश व सोमवार की अहले सुबह हुई बारिश से वार्ड के मुहल्लों व सड़कों तक जलभराव ने निगम की तैयारी की पोल खोल कर रख दी है. रिहायशी इलाकों से लेकर सड़कों पर भारी जलजमाव से लोग परेशान हो गये. जलनिकासी की मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने के कारण नाले का पानी सड़क पर जलजमाव में मिल जाने से उठ रही दुर्गंध से लोग परेशान हो गये. कई लोगों द्वारा रास्ते बदल कर आवागमन किया तो कईयों ने घरों में दुबके रहना ही बेहतर समझा. खासकर न्यू मार्केट, गामी टोला, केबी झा कॉलेज रोड, एमजेएम महिला कॉलेज रोड के अलावा वार्ड की सड़क जलमग्न होने से लोग परेशान रहें.

पांच से दस वर्ष में भी नहीं खोले गये कई नाले

निगम के तीस वार्ड के लिए एजेंसी को प्रतिमाह करीब नब्बे लाख उपलब्ध कराया जाता है. कई पार्षदों की माने तो बुडको की ओर से ड्रेनेज निर्माण के कारण सिस्टम फेल हो चुका है. निगम प्रशासन को चाहिए कि ड्रेनेज निर्माण से पूर्व पूर्व के नाले को व्यवस्थित करा लें, लेकिन इस तरह नहीं करने के कारण ड्रेनेज निर्माण कार्य होने की वजह से सभी नाले जाम हैं. इस मानसून में स्थिति काफी भयावह होने वाली है. उनलोगों की मानें तो कई ऐसे नाले हैं, जिसे पांच से दस वर्ष बाद भी उड़ाही नहीं कराये गये.

एजेंसी के पास संसाधनों का अभाव

कई पार्षदों की मानें तो साफ-सफाई को लेकर जिस एजेंसी से एकरानामा किया गया है, एकरारनामा में भले ही सभी संसाधनों का जिक्र किया गया है, लेकिन आधारभूत संरचरण से लेकर संसाधन तक निगम की ओर उपलब्ध कराया जा रहा है. वार्ड के पार्षदों की माने तो डोजर, डम्पर, ट्रैक्टर, शॉकर मशीन, जेसीबी यहां तक यहां तक हैंड ट्रॉली तक निगम एजेंसी को सीटी को मेंटेन करने के लिए उपलब्ध करा रहा है. अपने आप में यह एक सवाल है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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