महिला फुटबॉलरों की राह में रोड़े

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कटिहार : सरकार एक ओर महिला सशक्तिकरण की दिशा में नित नये आयाम जोड़ रही है और महिलाओं को आगे आने के लिए कई प्रकार की सुविधाएं प्रदान प्रदान कर रही है, लेकिन अब भी जिले की महिलाएं खास कर महिला खिलाड़ियों को समुचित संसाधन नहीं मिलने के कारण आगे बढ़ पाने में भारी कठिनाइयों […]

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कटिहार : सरकार एक ओर महिला सशक्तिकरण की दिशा में नित नये आयाम जोड़ रही है और महिलाओं को आगे आने के लिए कई प्रकार की सुविधाएं प्रदान प्रदान कर रही है, लेकिन अब भी जिले की महिलाएं खास कर महिला खिलाड़ियों को समुचित संसाधन नहीं मिलने के कारण आगे बढ़ पाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

जिले की एकमात्र महिला फुटबॉल टीम अपने बूते मैदान मारने की दिशा में अग्रसर है. सरकारी स्तर पर किसी प्रकार की सुविधाएं उनको नहीं मिल पा रही हैं. इसके कारण उनकी प्रतिभा दम तोड़ रही है. महिला फुटबॉल टीम पूरे बिहार के विभिन्न जिलों में खेल कर जहां एक और जिले का नाम रोशन कर रही है. वहीं महिला फुटबॉल टीम की खिलाड़ियों में कई ऐसी खिलाड़ी हैं,

जो राष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल खेल में अपना प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. यदि इन्हें समुचित संसाधन उपलब्ध कराया जाये, तो जिले की यह महिला फुटबाॅल टीम प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपना परचम लहराने में सक्षम हो सकती है.

कैसे बनी महिला फुटबॉल टीम : जिला के पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी हीरालाल दिलीप साह उर्फ भोला और विनोद चौधरी फुटबॉल का मैच खेलने एक बार भागलपुर गये थे. वहां पर पुरुष खिलाड़ियों के साथ-साथ महिला फुटबॉल खिलाड़ी में प्रतियोगिता में भाग ले रही थी और अच्छा प्रदर्शन कर रही थी. जिसको देखकर उपरोक्त खिलाड़ियों ने अपने जिले में भी महिला फुटबॉल टीम तैयार करने की ठानी. वर्ष 2000 में महिलाओं को एकजुट कर एक महिला फुटबॉल टीम तैयार कर उन्हें प्रशिक्षित करने लगे. वह दिन भी आया जब महिला फुटबॉल टीम की खिलाड़ियों ने बिहार के मुंगेर, पटना, गया, खगड़िया, भागलपुर, जमुई इत्यादि जगह पर टूर्नामेंट में भाग लेकर और कई जगहों पर जीत दर्ज कर जिले का मान बढ़ाया है.
फुटबॉल स्टेडियम नहीं है जिले में : जिले में फुटबॉल खेलने के लिए रेलवे मैदान को छोड़कर एक मात्र बीएमपी मैदान ही है, जहां डीएम की अनुमति के बाद ही उसमें प्रैक्टिस या प्रतियोगिता आयोजित की जा सकती है. राजेंद्र स्टेडियम के जर्जर होने के कारण इसमें खिलाड़ी प्रैक्टिस नहीं करते हैं, क्योंकि दुर्घटना होने की आशंका ज्यादा बनी रहती है. जिले में फुटबॉल के लिए 110 मीटर लंबाई तथा 75 मीटर चौड़ाई मैदान होना चाहिए, जिसमें आम खिलाड़ी अभ्यास कर सकें, लेकिन अब तक मैदान बन नहीं सका.
सब्जी बेचने वाली की बेटी हुई चयनित : पूजा कुमारी की मां सब्जी बेच कर अपनी बेटी को पढ़ाई और खेल में भाग लेने के लिए प्रेरित करती है. वही मंगला कुमारी का पिता सत्तू बेच कर अपनी बेटी को पढ़ाई व फुटबॉल की तैयारी करवाते हैं. इन दोनों खिलाड़ियों ने वर्ष 2016 में पटना में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयन शिविर में चयनित हुए थी. वर्तमान में जिला महिला फुटबॉल टीम में पूजा कुमारी कप्तान, सूमि कुमारी उप कप्तान, प्रीति कुमारी गोलकीपर, उमा कुमारी, आरती कुमारी, मंगला कुमारी, कविता कुमारी, मनीता कुमारी, अंकिता कुमारी, निकिता कुमारी, गुड़िया कुमारी, स्मिता कुमारी, छोटी कुमारी, रेशमा कुमारी, प्रियंका कुमारी, मधु कुमारी, राधा कुमारी जैसी खिलाड़ी है जो कड़ी मेहनत कर जिले का नाम रोशन करने में लगी हुई हैं.
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