ढांढ़स बंधाने की भी नहीं हो रही थी हिम्मत
आजमनगर : मराडांगी व मर्वतपुर में जब चारों शवों को जब उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया, तो वह दृश्य बेहद ह्दयविदारक था. परिजनों के चीत्कार से वहां मौजूद लोग भी उन्हें ढांढस बंधाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे. परिजनों करुण क्रंदन से आसपास का पूरा इलाका स्तब्ध था. बच्चों की आंखें अपने […]
आजमनगर : मराडांगी व मर्वतपुर में जब चारों शवों को जब उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया, तो वह दृश्य बेहद ह्दयविदारक था. परिजनों के चीत्कार से वहां मौजूद लोग भी उन्हें ढांढस बंधाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे. परिजनों करुण क्रंदन से आसपास का पूरा इलाका स्तब्ध था. बच्चों की आंखें अपने पिता को ढूंढ रही थी, तो कोई पति, तो कोई बेटे को ढूंढ रही थी. जो अब इस दुनिया में नहीं थे. पर उनको समझाता कौन. बच्चे अब्बू उठिये ना खाना खा लीजिए. बच्चों की इन बातों को सुन जो भी
सामने थे वो अपनी आंखों से आंसुओं को गिरने से रोक नहीं पा रहे थे. पूरे गांव में लग रहा था कि आग बरस रही है. हालत यह थी कि लोग पीड़ितों को चुप कराते-कराते खुद ही रोने लग जा रहे थे.
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