कैप्टन के गायब होने व मिलने के छह दिनों के अंतराल की कहानी अब भी अधूरी...

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इधर एसआरपी से मिली जानकारी के अनुसार कैप्टन का फिटनेश व अन्य मेडिकल किया गया लेकिन वह इन सभी में फिट आये अगर उन्हें बंधक बनाया गया था तो उनके शरीर पर निशान या उनके शरीर से किसी प्रकार की दवाई का भी अंश क्यों नहीं प्राप्त हुआ. यह तो कैप्टन के बयान से ही […]

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इधर एसआरपी से मिली जानकारी के अनुसार कैप्टन का फिटनेश व अन्य मेडिकल किया गया लेकिन वह इन सभी में फिट आये अगर उन्हें बंधक बनाया गया था तो उनके शरीर पर निशान या उनके शरीर से किसी प्रकार की दवाई का भी अंश क्यों नहीं प्राप्त हुआ. यह तो कैप्टन के बयान से ही स्पष्ट हो पायेगा

कटिहार : पूर्णिया जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के महेंद्रपुर निवासी लेफ्निेंट कर्नल अनंत मंडल के पुत्र कैप्टन शिखर दीप जो कटिहार छुट्टी में आये थे. छुट्टी समाप्त होते ही वह घर से निकले और कटिहार रेलवे स्टेशन से छह फरवरी को महानंदा एक्सप्रेस से वह दिल्ली के लिए रवाना हुए. 7 फरवरी को जब कैप्टन को दिल्ली स्टेशन पर उसका मौसेरा भाई उसे लेने आया तो बर्थ पर सभी समान था, लेकिन कैप्टन गायब थे.
इसकी सूचना परिजनों ने दिल्ली सहित कटिहार को दी. यहां तक कटिहार एसआरपी के निर्देश पर बरौनी रेल थाना में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस मामले के अनुसंधान में जुट गयी थी. नौ फरवरी को जब रेल थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई तो रेल पुलिस मामले की जांच शुरू की. इस दौरान रेल पुलिस की भी काफी फजीहत हुई कि आखिर किस प्रकार एक कैप्टन ट्रेन से लापता हो गया.
रेलवे के अधिकारी सहित आर्मी के जवान ने पटना के बाद कैप्टन की खोज आरंभ की. नदी नाला, झाड़ी सहित पटना से दिल्ली के बीच सभी स्टेशन की जांच की गयी तथा कैप्टन के आसपास के यात्रियों से भी संपर्क कर कैप्टन के संदर्भ में पूछताछ की. बावजूद रेल पुलिस के हाथ खाली रहे. इस बीच एक अज्ञात शव की बरामद होने के बाद रेल पुलिस ने भी आशंका जताते हुए उसके अधिकारी ने एक शव बरामदगी लेकिन शिनाख्त की बात कह दी.
इसके बाद कैप्टन के घर में मातमी सन्नटा पसर गया. इस बीच शुक्रवार की देर रात कैप्टन का अचानक यूपी के फैजाबाद के कोतवाली थाना में पहुंचकर अपने अपहरण की बात कोतवाली थाना पुलिस को बताया. अब सवाल यह उठता है कि कैप्टन के ट्रेन से गायब होने व बरामद होने के छह दिनों की अंतराल की कहानी अबतक जो सामने आ रही है वह अधूरी सी लग रही है.
कैप्टन जांच में आये फिट
कैप्टन के बयान के अनुसार उसे यूपी के एक जंगल में एक कमरे में बंद कर रखा गया तो कैप्टन ने रस्सी के बंधन को छुड़ाकर किसी प्रकार वहां से रेलवे ट्रेक पकड़कर फैजाबाद पहुंचा. अब सवाल यह उठता है कि अगर कैप्टन का अपरहण हुआ था तो वह रेल ट्रेक पकड़ कर जब ट्रेन पकड़ा तो किसी ने किसी सुरक्षा कर्मी को अपनी बात बता सकता था, लेकिन कैप्टन ने ऐसा ही नहीं किया और व फैजाबाद आउटर पर उतरकर कोतवाली थाना पहुंच गये.
इधर एसआरपी से मिली जानकारी के अनुसार कैप्टन का फिटनेश व अन्य मेडिकल किया गया लेकिन वह इन सभी में फिट आये अगर उन्हें बंधक बनाया गया था तो उनके शरीर पर निशान या उनके शरीर से किसी प्रकार की दवाई का भी अंश क्यों नहीं प्राप्त हुआ. यह तो कैप्टन के बयान से ही स्पष्ट हो पायेगा फिलहाल कैप्टन की गुमशुदगी से बरामदगी तक की जो कहानी है अब भी अधूरी है. इस गुमशुदगी ने कैप्टन के परिजनों खासकर मां- पिता, बहन- बहनोई सहित अन्य रिश्तेदारों के क्या हाल थे उनसे बेहतर कौन बता सकता है.
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