जिले के विभिन्न विद्यालयों में चल रहे एमडीएम की िस्थति बेहद खराब

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कटिहार जिले में करीब दो हजार प्राथमिक, मध्य विद्यालय व मदरसों में मध्याह्न भोजन योजना शुरू की गयी है, लेकिन मध्याह्न भोजन योजना मानक के विपरीत चल रहा है, यूं तो जिले के अधिकांश विद्यालयों में मध्याह्न भोजन संचालित हो रहा है, लेकिन अभी भी करीब 350 विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना विभिन्न कारणों से […]

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कटिहार जिले में करीब दो हजार प्राथमिक, मध्य विद्यालय व मदरसों में मध्याह्न भोजन योजना शुरू की गयी है, लेकिन मध्याह्न भोजन योजना मानक के विपरीत चल रहा है, यूं तो जिले के अधिकांश विद्यालयों में मध्याह्न भोजन संचालित हो रहा है, लेकिन अभी भी करीब 350 विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना विभिन्न कारणों से बंद है

कटिहार : प्राथमिक व मध्य विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को मध्याह्न भोजन योजना के तहत दोपहर में पका हुआ भोजन देने की व्यवस्था की गयी है. विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के लिए यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र व राज्य सरकार ने की है.
कटिहार जिले में करीब दो हजार प्राथमिक, मध्य विद्यालय व मदरसा में मध्याह्न भोजन योजना शुरू की गयी है, लेकिन मध्यान भोजन योजना मानक के विपरीत चल रही है. यूं तो जिले के अधिकांश विद्यालयों में मध्याह्न भोजन संचालित हो रहा है, लेकिन अभी भी करीब 350 विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना विभिन्न कारणों से बंद है.
यद्यपि, जिन विद्यालयों में मध्यान भोजन योजना संचालित है, वहां भी कई तरह की गड़बडि़यां है. मसलन, मीनू के अनुसार भोजन नहीं बनना व भोजन में पोषक तत्वों की कमी की बात जग जाहिर है. हालांकि राज्य सरकार ने एमडीएम के बेहतर संचालन के लिए राज्य सरकार से लेकर प्रखंड स्तर तक स्वतंत्र मोनेटरिंग सिस्टम विकसित की है.
इसके बावजूद मध्यान भोजन का गुणवत्तापूर्ण संचालन नहीं होना मौजूदा व्यवस्था को मुंह चिढ़ाता है. जबकि सरकार ने एमडीएम के प्रतिदिन अनुश्रवण के लिए ऑनलाइन रिपोर्टिंग की भी व्यवस्था की है. इस व्यवस्था का भी प्रभाव नहीं दिख रहा है. आम लोगों में मौजूदा व्यवस्था को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी हो रही है. प्रभात खबर ने जिले मी चल रही मध्याह्न भोजन योजना की स्थिति को लेकर विभिन्न स्तरों पर पड़ताल की है. प्रस्तुत है एमडीएम की पड़ताल करती यह रिपोर्ट.
जमीनी स्तर पर गुणवत्ता का अभाव
जिले में विभिन्न विद्यालयों में चल रहे एमडीएम की स्थिति बेहद खराब है. न तो मीनू के अनुसार विद्यालय के बच्चों को दोपहर का भोजन मिलता है और न ही भोजन में पोषक तत्व पाये जाते हैं. जबकि एमडीएम के मार्गदर्शिका में साफ तौर पर कहा गया है कि प्राथमिक विद्यालय के बच्चों के भोजन में कितना पोषक तत्व होना चाहिए और मध्य विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को दिये जाने वाले बच्चों को कितनी पोषक तत्व होनी चाहिए. कई विद्यालयों के मध्यान भोजन की स्थिति देखने के बाद यह बात उभर कर सामने आयी है कि किसी तरह बच्चों के सामने भोजन परोस दिया जाय. अधिकांश विद्यालयों में तो मीनू का अनुपालन भी नहीं होता है.
एक कमरे में पढ़ाई व एमडीएम साथ
जिले में ऐसे कई विद्यालय हैं, जो एक कमरे में संचालित होती है. उसी एक कमरे में शिक्षकों के द्वारा बच्चों का पठन-पाठन होता है व उसी कमरे में एमडीएम भी बनता है तथा बच्चों को परोसा भी जाता है. दूसरी तरफ कई ऐसे विद्यालय भी हैं जहां आज तक एमडीएम शुरू भी नहीं हुई है. जबकि ऐसे विद्यालयों के स्थापना हुए पांच-छह साल हो गया है. दूसरे विद्यालयों के बच्चे को एमडीएम खाते देख ऐसे विद्यालय के बच्चों पर क्या गुजरती होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.
कहते हैं एमडीएम प्रभारी
मध्याह्न भोजन योजना के जिला प्रभारी शिवनाथ रजक ने इस संदर्भ में बताया कि खाद्यान्न के अभाव में विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंद है. शीघ्र ही एमडीएम का चावल आवंटन कर दिया जायेगा. ऐसा प्रयास किया जा रहा है कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंद नहीं हो.
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