बिन परीक्षा अगली कक्षा में प्रवेश की नीति से शक्षिा के स्तर में गिरावट
बिन परीक्षा अगली कक्षा में प्रवेश की नीति से शिक्षा के स्तर में गिरावट प्रतिनिधि, आबादपुर ‘जब बिन परीक्षा दिये ही विद्यार्थी पास करेंगे तो पढ़ने की दरकार ही क्या है? सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे प्रथम वर्ग से अष्टम वर्ग तक के विद्यार्थियों के लिए सरकार ने नयी नीति तैयार कर लागू किया है. […]
बिन परीक्षा अगली कक्षा में प्रवेश की नीति से शिक्षा के स्तर में गिरावट प्रतिनिधि, आबादपुर ‘जब बिन परीक्षा दिये ही विद्यार्थी पास करेंगे तो पढ़ने की दरकार ही क्या है? सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे प्रथम वर्ग से अष्टम वर्ग तक के विद्यार्थियों के लिए सरकार ने नयी नीति तैयार कर लागू किया है. ज्ञात हो कि शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार सरकारी विद्यालयों में अब अष्टम वर्ग तक के विद्यार्थियों के लिए अगली कक्षा में प्रवेश के लिए पूर्व की भांति परीक्षा देने व पास करने की बाध्यता समाप्त कर दी गयी है. अब विद्यार्थी बिना परीक्षा दिये व पास किये ही अगली कक्षा में प्रवेश कर जाते हैं. जिसमें विद्यार्थी फेल हो जाने की चिंता से मुक्त रहते हैं तथा अध्ययन करने से कन्नी काटते हैं. उक्त व्यवस्था से बच्चों में अब आपसी प्रतिस्पर्धा नहीं के बराबर देखी जा रही है. खासकर ग्रामीण क्षेत्र के स्कूली बच्चे पढ़ाई पर विशेष ध्यान नहीं दे रहे हैं. जिससे सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर दिनो-दिन नीचे गिर रहा है. इसके विपरीत निजी विद्यालयों में आज भी वार्षिक परीक्षा पास करने की बाध्यता है. जिससे वहां बच्चों में आपसी प्रतिस्पर्धा अधिक है तथा बच्चे कड़ी मेहनत करते हैं. इस तरह से देखा जाय तो निजी स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूल के बच्चे पढ़ाई से पिछड़ रहे हैं तथा भविष्य की प्रतिस्पर्धाओं से काफी पीछे हो रहे हैं. कहते हैं अभिभावक —————मामले में अभिभावकों काजी जुबेर आलम, हाजी सलाउद्दीन, विजय साह, मिन्नतुल्लाह समीरी, मो मुस्लिम उर्फ मुन्ना, मो अंजार आजम, मुकेश ठाकुर, काजी नजरूल इसलाम आदि का कहना है कि विद्यालयों में वार्षिक परीक्षा न होने से बच्चे मन लगा कर पढ़ाई नहीं कर रहे हैं तथा उक्त व्यवस्था सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए शिक्षा संबंधी गुणवत्ता के मामले में एक कमजोर कड़ी है. कहते हैं क्षेत्र के जनप्रतिनिधिवही मामले में जनप्रतिनिधियों जिप सदस्य सलीमा खातून, आबादपुर मुखिया बीबी शहनाज अजीजी, चापाखोर मुखिया रमजान अली, भवानीपुर मुखिया मो फरीद आलम व बेलवा मुखिया भानु राय का कहना है कि सरकारी स्कूलों में अष्टम वर्ग तक के बच्चों के लिए वार्षिक परीक्षा का न होना व परीक्षा पास करने की बाध्यता को खत्म करना शिक्षा की बुनियादी ढांचा को कमजोर कर रहा है तथा इसकी मजबूती के लिए पूर्व की भांति वार्षिक परीक्षा व उत्तीर्ण होने की व्यवस्था को फिर से लागू किये जाने की जरूरत है.
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