वें दिन भी बसों का परिचालन रहा ठप, यात्रियों की जेब पर ड़ रहा है दोगुना असर, यात्रा भी हो रही कष्टदायक

Updated at : 14 Feb 2020 9:02 AM (IST)
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वें दिन भी बसों का परिचालन रहा ठप, यात्रियों की जेब पर ड़ रहा है दोगुना असर, यात्रा भी हो रही कष्टदायक

कटिहार : 13वें दिन भी जिला मुख्यालय से बसों का परिचालन पूरी तरह से ठप रहा. यात्री यात्रा करने के लिए दिन भर भटकते रहे. यह स्थिति लगातार 13 दिनों से बनी हुई है. लेकिन हड़ताल को ताड़वाने की दशा में न नगर निगम कोई पहल कर रहा है न ही जिला प्रशासन का कोई […]

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कटिहार : 13वें दिन भी जिला मुख्यालय से बसों का परिचालन पूरी तरह से ठप रहा. यात्री यात्रा करने के लिए दिन भर भटकते रहे. यह स्थिति लगातार 13 दिनों से बनी हुई है. लेकिन हड़ताल को ताड़वाने की दशा में न नगर निगम कोई पहल कर रहा है न ही जिला प्रशासन का कोई ध्यान है. जिसका असर सिधा यात्रियों पर पड़ रहा है. बस मालिकों ने बताया कि 13वें दिन भी जिला प्रशासन व नगर निगम की ओर से बस मालिकों के हड़ताल को समाप्त करने की दिशा में कोई पहल नहीं की गयी.

एक ओर बस मालिक अपने मांगों पर अड़े हुए हैं तो दूसरी ओर जिला प्रशासन हर हाल में नये बस स्टैंड से बसों के परिचालन कराने में अड़ा हुआ है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर और कितने दिन बस सेवा ठप रहेगी. दोनों ही ओर से किसी न किसी को तो झुकना ही पड़ेगा. गौरतलब हो कि बस परिचालन बंद रहने से बस मालिकों को प्रतिदिन लाखों का नुकसान हो रहा है तो दूसरी ओर यात्रियों की यात्रा कष्टदायक साबित हो रही है.
दोगुनी किराया चुकाने के बावजूद सुखद यात्रा नहीं हो पा रही है. 13 दिनों से शहर से दूसरे स्थानों के लिए चलने वाली बसें जहां-तहां खड़ी है. बसों में काम करने वाले चालक, खलासी, कंडेक्टर, टिकट काटने वाले लोग, गैरज चलाने वाले सैकड़ों लोगों के सामने रोजी रोटी की समसया अब उत्पन्न हो गयी है. उन परिवारों के सामने भूखमरी की नौबत आ पड़ी है.
यदि ऐसा ही कुछ दिन चलता रहा तो कई घरों में चूल्हे जलने बंद हो जायेंगे. गौरतलब हो कि कटिहार से प्रतिदिन दूसरे स्थानों के लिए 50 से 60 बसों का परिचालन होता है. उन बसों का परिचालन 13 दिनों से ठप है. एक मात्र बस बिहार परिवहन निगम की कभी-कभी चलती है. जिसमें भेड़ बकरी की तरह यात्री लद कर तथा बस की छत पर बैठकर यात्रा यात्री कर रहे हैं.
प्रशासन के निर्देश का विरोध कर रहे हैं बस मालिक : जिला प्रशासन ने बस मालिकों को कड़ा निर्देश दिया है कि एक फरवरी से नये बस स्टैंड से बसों का परिचालन हर हाल में करना है. यदि ऐसा नहीं हुआ तो बस की परमिट को निरस्त करने की बात कही गयी है. बस मालिकों ने इस आदेश के विरोध में तथा नये बस स्टैंड से बसों का परिचालन नहीं करने को लेकर एक फरवरी से ही अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये हैं.
बस हड़ताल को 13 दिन बीत जाने के बावजूद जिला प्रशासन व नगर निगम प्रशासन ने बस मालिकों से इस मामले में किसी तरह की वार्ता तक नहीं की है. जिसका खामियाजा आम यात्रियों को उठानी पड़ रही है. यात्रियों ने कहा बस नहीं चलने के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. एक तो समय की बर्बादी हो रही है दूसरी अधिक पैसे खर्च कर परेशानी अलग से उठानी पड़ रही है. पूर्णिया जाने के लिए ऑटो के अलावा कोई विकल्प लोगों के पास नहीं है.
करीब 30 किलोमीटर की दूरी ऑटो में करना काफी कष्टदायक साबित हो रहा है. जबकि भागलपुर जाने के लिए लोगों को ऑटो से पहले 25 किलोमीटर दूर गेड़ाबाड़ी एनएच 31 तक पहुंचना होता है. यह दूरी भी तय करने में यात्रियों को अतिरिक्त खर्च के साथ काफी समय लग रहा है. फिर वहां से यात्रियों को भागलपुर, नवगछिया, कुरसेला आदि जगहों के लिए जाना पड़ रहा है.
क्यों नहीं हुई कोई वैकल्पिक व्यवस्था : कटिहार में बसों के हड़ताल पर रहने के कारण यात्रियों को रोज फजीहत झेलनी पड़ रही है. इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से अब तक यात्रियों की सुविधा के लिए किसी तरह की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी है. स्थानीय लोग व्यवसायी अब कहने लगे हैं कि जब बस मालिक हड़ताल पर चले गये हैं तो वैकल्पिक व्यवस्था बसों की जिला प्रशासन को करनी चाहिए. दूसरे शहरों से बसों को लाकर यहां क्यों नहीं चलाया जा रहा है या बिहार राज्य परिवहन विभाग की बसों को ही यहां से चलना चाहिए.
ताकि यात्रियों को यात्रा में कष्ट न हो तथा व्यसायी भी आराम से अपना माल दूसरे शहर भेज सकें. इसके साथ ही बस सेवा ठप रहने से सबसे अधिक परेशानी बच्चों, महिलाओं एवं वृद्ध यात्री को यात्रा करने में कष्टदायक साबित हो रहा है. 13 दिनों से बस का परिचालन बंद है. यात्रियों को ऑटो की सवारी करनी पड़ रही है. लंबी दूरी ऑटो से सवारी करना काफी कष्टदायक साबित हो रहा है.
ऑटो चालक अधिक राशि लेकर भी यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर बैठा रहे हैं. इससे महिलाओं, बच्चों व वृद्ध को यात्रा करना काफी भारी पड़ रहा है. यात्रियों ने बताया कि इस मामले में प्रशासन को हस्तक्षेप कर मामले को जल्द से जल्द सुलक्षा लेना चाहिए. यदि ज्यादा समय तक बसों का हड़ताल जारी रहा तो परेशानी बढ़ती चली जायेगी.
ट्रेनों में पैर रखने की नहीं मिल रही जगह : बसों के हड़ताल पर रहने की वजह से ट्रेनों में दवाब बढ़ गया है. भीड़ इतनी ज्यादा बढ़ गयी है कि ट्रेन में यात्री सवार नहीं हो पा रहे है. ट्रेन में पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही है.
दरअसल कटिहार में ट्रेनों से यात्रा करने के लिए लोग आश्रित नहीं है. सड़क मार्ग बेहतर होने एवं हर समय बसों का परिचालन होने की वजह से लोग बसों से ही यात्रा करना उचित समझते हैं. लेकिन 13 दिनों से ट्रेनों पर यात्री यात्रा करने को आश्रित हो गये हैं. समय-समय पर ट्रेनों की कमी है.
उपर से यात्रियों की बाढ़ आ गयी है. जिसके कारण नवगछिया की तरफ जाने वाली सभी लोकल ट्रेनों व एक्सप्रेस ट्रेनों में भेड़ बकरी की तरह यात्री यात्रा करने को विवश हो रहे हैं. बोगी की संख्या कम रहने व ट्रेनों की कमी यात्रियों को परेशान कर रही है. ट्रेनों से लोग कुरसेला, नवगछिया, भागलपुर जाने व आने वाले यात्री ट्रेनों का सहारा ले रहे हैं. जिसके कारण ट्रेनों में भीड़ तीन दिनों से बढ़ी हुई है.
रोज आने-जाने वालों की बढ़ी है परेशानी : बसों का परिचालन 13 दिनों से नहीं होने के कारण रोज बस से यात्रा करने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. कई लोग अपने घर से प्रतिदिन जिला मुख्यालय आकर सरकारी व प्राइवेट जॉब करते हैं. इसके साथ ही जिला मुख्यालय से ग्रामीण क्षेत्र में जाकर शिक्षक व अन्य लोग नौकरी करते हैं. वैसे लोगों को बस परिचालन बंद होने से टाइम टेबल गड़बड़ हो गया है.
अपने काम पर समय से नहीं पहुंच रहे हैं. जिसके कारण उनका गुस्सा जिला प्रशासन पर फूट रहा है. गौरतलब हो कि सैकड़ों की तादाद में ऐसे लोग हैं जो प्रतिदिन जिला मुख्यालय से जाकर फलका, कोढ़ा, गेड़ाबाड़ी, समेली, कुरसेला, काढ़ागोला, नवगछिया, भागलपुर में जाकर नौकरी करते हैं. वहां के लोग भी यहां आते-जाते हैं. वैसे लोगों की परेशानी बढ़ गयी है.
भागलपुर, पूर्णिया व अररिया जाने के पहले कई बार सोचते हैं लोग
बस सेवा परिचालन किसी भी शहर के लिए कितना जरूरी आज के समय में हो गया है. इसका एहसास लोगों को तब हुआ जब 13 दिनों से बस सेवा कटिहार से पूरी तरह से बंद हो गयी है. हालत यह है कि लोग भागलपुर, पूर्णिया, अररिया, फारबीसगंज सहित अन्य जगहों पर जाने के लिए पहले एक बार भी नहीं सोचते थे.
अब लोगों को सोचना पड़ रहा है कि वहां कैसे जाएं, जायेंगे तो कब तक लौट कर आना है. आने के लिए उन्हें सवारी मिलेगी भी या नहीं. किराया तो डबल लगना ही है. इसके बावजूद सुखद यात्रा संभव नहीं हो पा रही है. मिरचाईबाड़ी सहायक थाना व पुस्तकालय के निकट प्रतिदिन पूर्णिया, भागलपुर, गेड़ाबाड़ी, फलका, कुरसेला, नवगछिया आदि जगहों पर जाने वाले सैकड़ों यात्री पहुंचते हैं.
पता करते हैं कि बस सेवा चालू हुआ या नहीं. जब उन्हें पता चलता है कि बस सेवा परिचालन अब भी ठप है तो निराश होकर ऑटो से यात्रा करने को मजबूर हो रहे हैं. गुरूवार को दर्जनों लोग दोपहर 12 बजे मिरचाईबाड़ी में खड़े थे. कोई अपने पूरे परिवार के साथ था तो कोई छोटे-छोटे बच्चों व भारी भरकम समान के साथ था. इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी थी.
उन यात्रियों को जब पता चला कि बस परिचालन बंद है तो वे निराश होकर सोचने को विवश हो गये कि आखिर अब गंतव्य स्थल तक कैसे पहुंचेंगे. ऑटो वालों ने सलाह दिया कि भागलपुर जाने वाले यात्री गेड़ाबाड़ी एनएच 31 तक ऑटो से जाएं वहां से बस से भागलपुर जा सकेंगे. यात्रियों ने दोगुना किराया चुका कर भेड़ बकरी की तरह ऑटो में लद कर निकल गये. इसी तरह पूर्णिया जाने वाले लोग भी दोगुना भाड़ा देकर किसी तरह ऑटो से ही निकल पड़े. यह स्थिति रोज की बनी हुई है.
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